

जांच दबाने के लिए अधिकारियों को लाखों रुपये देने का दावा, कलेक्टर से एफआईआर और निष्पक्ष जांच की मांग..

बिलासपुर/मस्तूरी। मस्तूरी सेवा सहकारी समिति में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। समिति में हुए कथित गबन और अनियमितताओं की जांच को प्रभावित करने के लिए अधिकारियों को लाखों रुपये रिश्वत दिए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर जिला कलेक्टर बिलासपुर को शिकायत सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मनीराम कुर्रे द्वारा 21 अप्रैल 2026 को जिला कलेक्टर के समक्ष एक औपचारिक शिकायत प्रस्तुत की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मस्तूरी सेवा सहकारी समिति के तत्कालीन प्रभारी संस्था प्रबंधक मनोज रात्रे ने समिति में हुई वित्तीय गड़बड़ियों और हेराफेरी को दबाने के लिए जांच अधिकारियों से सांठगांठ की।

शिकायत में दावा किया गया है कि मामले को दबाने और जांच रिपोर्ट को प्रभावित करने के लिए जांच अधिकारी सी.एम. अजगले और शंकर आयाम को दो किस्तों में कुल 2 लाख 30 हजार रुपये दिए गए। आरोप के अनुसार पहली किस्त में 80 हजार रुपये और दूसरी किस्त में 1 लाख 50 हजार रुपये की रकम पहुंचाई गई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि रिश्वत लेने के बाद जांच अधिकारियों ने वास्तविक तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए गलत और भ्रामक जांच रिपोर्ट तैयार की, जिससे समिति में हुए कथित वित्तीय नुकसान और गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि दोषियों को बचाने के लिए पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया।

मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर सुखसागर जांगड़े, लिपिक कृष्ण कुमार करियारे और तत्कालीन प्रभारी संस्था प्रबंधक मनोज रात्रे समेत संबंधित जांच अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है ताकि सहकारी समितियों में हो रहे भ्रष्टाचार का सच सामने आ सके।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित आरोपियों पर पूर्व में भी गबन के मामले सामने आ चुके हैं और जेल जाने की बात भी कही गई है। इसके बावजूद दोबारा शासन को नुकसान पहुंचाने की तैयारी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
मामले में पक्ष जानने के लिए जांच अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
अब इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और लोग प्रशासन से सख्त कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।



