

प्रमुख अंश :

मस्तूरी चिरायु (आरबीएसके) टीम की तत्परता से बची 11 माह के मासूम की जान।
चेन्नई के अपोलो चिल्ड्रेन अस्पताल में हुई जटिल ओपन हार्ट सर्जरी।
जन्मजात ‘कॉम्प्लेक्स सायनोटिक हार्ट डिजीज’ से पीड़ित था मासूम ध्रुवेश।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जताई खुशी, स्वास्थ्य विभाग और चिरायु टीम की थपथपाई पीठ।
बिलासपुर । छत्तीसगढ़ सरकार की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) यानी ‘चिरायु’ योजना एक बार फिर एक गरीब परिवार के लिए संजीवनी बनकर उभरी है। बिलासपुर जिले की मस्तूरी चिरायु टीम के अथक प्रयासों और संवेदनशीलता से जन्मजात गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे 11 महीने के एक मासूम को नया जीवन मिला है। चेन्नई के प्रतिष्ठित अपोलो चिल्ड्रेन अस्पताल में सफल ओपन हार्ट सर्जरी के बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है। इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले में सेवा का सच्चा जज्बा हो, तो किसी भी गरीब परिवार के बच्चे को काल के गाल से वापस लाया जा सकता है।
आंगनवाड़ी में परीक्षण के दौरान हुआ बीमारी का खुलासा..

मस्तूरी चिरायु टीम पिछले कई वर्षों से लगातार स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में 6 सप्ताह से 18 वर्ष तक के बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है। इसी कड़ी में सीपत क्षेत्र के ग्राम नरगोड़ा स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में स्वास्थ्य शिविर लगाया गया था। यहां नरेंद्र पुरी और ज्योति पुरी के 11 माह के बेटे ध्रुवेश का परीक्षण किया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों को संदेह हुआ और प्राथमिक जांच में ही स्पष्ट हो गया कि मासूम जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित है।
बिलासपुर से लेकर चेन्नई तक का संघर्षपूर्ण सफर..
बीमारी का पता चलते ही चिरायु टीम ने तनिक भी देर नहीं की। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए बच्चे को अपनी ही गाड़ी (चिरायु वाहन) से जिला अस्पताल बिलासपुर पहुंचाया। वहां ईको और ब्लड टेस्ट सहित सभी जरूरी जांच के बाद उसे बेहतर उपचार के लिए रायपुर के मेकाहारा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेकाहारा में गहन जांच के बाद पता चला कि ध्रुवेश ‘कॉम्प्लेक्स सायनोटिक हार्ट डिजीज’ (गंभीर जन्मजात हृदय रोग) जैसी जटिल बीमारी से पीड़ित है। बच्चे की जान बचाने के लिए उसे एम्स रायपुर और श्री सत्य साईं अस्पताल में भी दिखाया गया। इसके बाद बच्चे की मेडिकल रिपोर्ट्स को दिल्ली एम्स और चेन्नई के अपोलो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल सहित देश के कई उच्च स्तरीय अस्पतालों में भेजा गया। अपोलो के विशेषज्ञों ने रिपोर्ट का गहनता से अध्ययन करने के बाद ओपन हार्ट सर्जरी की हरी झंडी दे दी।
माता-पिता की झिझक और चिरायु टीम की काउंसलिंग..
इस पूरे अभियान में सबसे बड़ी चुनौती इलाज नहीं, बल्कि परिजनों को मनाना था। एक तो गरीबी और दूसरा इतनी छोटी उम्र में ओपन हार्ट सर्जरी का नाम सुनकर ध्रुवेश के माता-पिता बुरी तरह घबरा गए थे। उन्होंने शुरुआत में ऑपरेशन कराने से साफ इनकार कर दिया। लेकिन मस्तूरी चिरायु टीम ने हार नहीं मानी। टीम के सदस्यों ने लगातार परिजनों की काउंसलिंग की। उन्हें समझाया गया कि सिर्फ यह सर्जरी ही ध्रुवेश की जान बचा सकती है और इस पूरी प्रक्रिया में शासन उनका साथ देगा। आखिरकार, माता-पिता तैयार हुए।
सफल ऑपरेशन और लौट आई मुस्कान..
योजनाबद्ध तरीके से चिरायु टीम के विशेष सहयोग से 23 मार्च 2026 को बच्चे को चेन्नई भेजा गया। 25 मार्च को उसे अपोलो अस्पताल में भर्ती किया गया और 1 अप्रैल 2026 को अनुभवी सर्जनों की टीम ने सफल ओपन हार्ट सर्जरी की। आज मासूम ध्रुवेश पूरी तरह से स्वस्थ है और उसके माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है।
कलेक्टर ने दी बधाई, परिजनों ने जताया आभार..
बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस बड़ी सफलता पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए चिरायु टीम के सेवाभाव की जमकर सराहना की है। इस पूरे महाभियान में चिरायु नोडल डॉक्टर डॉ. सौरभ शर्मा, बिलासपुर सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल, मस्तूरी बीएमओ डॉ. अनिल, बीपीएम भूपेंद्र देवांगन, डॉ. मनीष सिंह, डॉ. सोनम धर्म बरगाह और पूर्णिमा सहित पूरी टीम का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा।
ध्रुवेश के माता-पिता ने रुंधे गले से स्वास्थ्य विभाग, चिरायु टीम और छत्तीसगढ़ शासन का दिल से आभार जताते हुए कहा, “यह योजना हमारे जैसे गरीब परिवारों के लिए सच में जीवनदायिनी साबित हो रही है। अगर यह टीम नहीं होती, तो शायद हम अपने बच्चे को बचा नहीं पाते।”



