

बार-टेल्ड गॉडविट (Bar-tailed Godwit) पक्षी के नाम दर्ज है दुनिया की सबसे लंबी नॉन-स्टॉप उड़ान का रिकॉर्ड, अलास्का से उड़कर सीधे न्यूजीलैंड में लेता है सांस..

ख़बर डेस्क। प्रकृति अपने आप में रहस्यों और चमत्कारों का एक असीमित भंडार है। जब हम इंसानों को लंबी दूरी की यात्रा करनी होती है, तो हमें कई बार रुकना पड़ता है, खाना-पीना पड़ता है और आराम की जरूरत होती है। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि कोई जीव बिना कुछ खाए-पिए, बिना रुके लगातार 11 दिन और 11 रात तक उड़ सकता है? जी हां, कुदरत के इस अद्भुत करिश्मे का नाम है-बार-टेल्ड गॉडविट (Bar-tailed Godwit)
इस छोटे से पक्षी ने अपनी हैरतअंगेज क्षमता से पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है। इसके नाम दुनिया में बिना रुके (नॉन-स्टॉप) सबसे लंबी उड़ान भरने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है।
अलास्का से न्यूजीलैंड तक का महासफर..

सर्दियों के मौसम की मार से बचने के लिए बार-टेल्ड गॉडविट हर साल एक ऐसा सफर तय करता है, जिसकी कल्पना भी इंसान के लिए मुश्किल है। यह पक्षी उत्तरी ध्रुव के पास स्थित अलास्का से अपनी उड़ान शुरू करता है और विशाल प्रशांत महासागर को पार करते हुए सीधे न्यूजीलैंड में आकर रुकता है।
यह दूरी लगभग 12,000 से 13,500 किलोमीटर की होती है।
इस पूरे सफर में यह लगातार 11 दिन और रात तक हवा में ही रहता है।
बीच रास्ते में यह न तो कहीं उतरता है, न पानी पीता है और न ही भोजन करता है।
उड़ान से पहले शरीर में होते हैं चौंकाने वाले बदलाव..
इतनी लंबी यात्रा कोई साधारण बात नहीं है। इसके लिए गॉडविट अपने शरीर को पूरी तरह से एक ‘फ्लाइंग मशीन’ में तब्दील कर लेता है। उड़ान शुरू करने से पहले यह जमकर भोजन करता है और अपने शरीर का वजन दोगुना कर लेता है। यह अतिरिक्त फैट यात्रा के दौरान ईंधन का काम करता है।
सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि उड़ान के दौरान शरीर का वजन कम रखने और अतिरिक्त ऊर्जा बचाने के लिए इसके पाचन अंग (पेट और आंतें) सिकुड़ कर छोटे हो जाते हैं। हवा में उड़ते वक्त इसे कुछ भी पचाने की जरूरत नहीं होती, इसलिए शरीर खुद को उसी अनुरूप ढाल लेता है और ऊर्जा का एक-एक कतरा सिर्फ पंखों को ताकत देने में लगाता है।
कुदरती नेविगेशन : विज्ञान भी है हैरान..
प्रशांत महासागर के ऊपर जहां दूर-दूर तक सिर्फ पानी ही पानी होता है और रास्ता बताने वाला कोई निशान नहीं होता, वहां यह नन्हा पक्षी अपनी मंजिल तक कैसे पहुंचता है? विज्ञान जगत आज भी इस कुदरती ‘जीपीएस’ (GPS) पर शोध कर रहा है। माना जाता है कि बार-टेल्ड गॉडविट पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field), सूरज और तारों की स्थिति को बहुत सटीकता से भांप लेते हैं। यही खगोलीय और चुंबकीय ज्ञान उनके लिए नेविगेशन का सटीक काम करता है, जिससे वे अपना रास्ता कभी नहीं भटकते।
कैसा दिखता है यह अनोखा पक्षी?

बार-टेल्ड गॉडविट मुख्य रूप से समुद्री तटों, मुहानों और दलदली इलाकों में रहता है। इसकी चोंच लंबी और हल्की सी ऊपर की ओर मुड़ी हुई होती है, जो कीचड़ के अंदर गहराई में छिपे कीड़ों और घोंघों को निकालने में मदद करती है। आम दिनों में इसके पंख भूरे और सफेद धब्बेदार होते हैं, लेकिन प्रजनन के मौसम में नर पक्षी का रंग गहरा लाल या ईंट जैसा हो जाता है।
बार-टेल्ड गॉडविट सिर्फ एक पक्षी नहीं, बल्कि प्रकृति की असीम ताकत और अनुकूलन का एक जीता-जागता प्रमाण है। इसकी यह उड़ान हमें बताती है कि कुदरत के बनाए जीवों के आगे इंसानी तकनीक आज भी कितनी पीछे है।



