धर्म परिवर्तन करते ही खत्म होगा SC दर्जा : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, भाजपा ने बताया ऐतिहासिक..

बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन और अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर कोई अन्य धर्म अपनाता है, तो उसका SC का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाएगा। इस फैसले के बाद देश में सियासी बहस तेज हो गई है। भाजपा ने इसे सामाजिक न्याय की जीत बताया है।

क्या है पूरा मामला?

जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के पुराने फैसले को बरकरार रखते हुए यह आदेश दिया।

कोर्ट ने साफ कहा कि संविधान के क्लॉज 3 के तहत SC आरक्षण का लाभ केवल उन लोगों को मिलता है जो हिंदू,बौद्ध या सिख धर्म से जुड़े हैं। यदि कोई व्यक्ति इन धर्मों के बाहर धर्मांतरण करता है, तो वह आरक्षण और अन्य सुविधाओं का हकदार नहीं रहेगा।

घर वापसी के लिए माननी होंगी 3 शर्तें..

अदालत ने केवल धर्म छोड़ने पर ही नहीं, बल्कि वापस पुराने धर्म में लौटने (घर वापसी) पर भी सख्त रुख अपनाया है। फैसले के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति दोबारा हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म अपनाता है और फिर से SC दर्जा चाहता है, तो उसे 3 मुख्य शर्तें साबित करनी होंगी:

मूल धर्म का प्रमाण : उसे साबित करना होगा कि वह मूल रूप से उस जाति और धर्म का हिस्सा था।

समाज की स्वीकार्यता : जिस जाति में वह लौट रहा है, उस समाज के लोगों ने उसे स्वीकार किया हो।

धार्मिक रीति-रिवाज : वह व्यक्ति उस धर्म के नियमों और परंपराओं का पालन कर रहा हो।

भाजपा प्रवक्ता बोले : संविधान की मूल भावना की जीत.. देखें वीडियो..

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता दाऊ अनुराग अग्रवाल ने कहा कि यह निर्णय स्वागत योग्य है। उन्होंने तर्क दिया कि SC आरक्षण उन लोगों को दिया गया था जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से छुआछूत और सामाजिक भेदभाव का सामना किया।

उन्होंने आगे कहा, “धर्मांतरण के बाद जब आधार ही बदल गया, तो आरक्षण का लाभ मिलना तर्कसंगत नहीं है। यह फैसला उन लोगों के अधिकारों की रक्षा करेगा जो वास्तव में इस आरक्षण के हकदार हैं।”

क्यों अहम है यह फैसला?

कानूनी जानकारों का मानना है कि इस फैसले से उन मामलों में स्पष्टता आएगी जहां लोग धर्म बदलकर भी आरक्षण का लाभ उठा रहे थे। अब जाति प्रमाणपत्र जारी करने और उसकी जांच करने की प्रक्रिया और सख्त हो सकती है। फिलहाल, इस फैसले पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है और आने वाले दिनों में इस पर और भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।