

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला शिक्षा विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। विभाग में वित्तीय गड़बड़ी, अनुकंपा नियुक्ति में फर्जीवाड़ा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की अनदेखी जैसे कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले को लेकर अंकित गौरहा (प्रदेश महासचिव, युवा कांग्रेस) ने प्रदेश के प्रमुख सचिव से मुलाकात कर विस्तृत लिखित शिकायत सौंपी है।

शिकायत में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और स्थापना शाखा के जूनियर ऑडिटर सुनील यादव पर संगठित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
30 लाख रुपए के भत्ते पर उठे सवाल..
अंकित गौरहा के अनुसार, कोटा विकासखंड में पदस्थ रहने के दौरान विजय टांडे ने सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच एक कर्मचारी देवेंद्र कुमार फाल्के को ‘अन्य भत्ता’ और ‘वर्दी धुलाई भत्ता’ के नाम पर लगभग 30 लाख रुपए का भुगतान किया। बताया गया कि हर महीने 4 से 4.5 लाख रुपए तक की राशि एक ही कर्मचारी को दी गई, जो सामान्य वेतन से कई गुना अधिक है। इस मामले में मिलीभगत की आशंका जताई गई है।
अधिकारी की भूमिका पर सवाल..


शिकायत में कहा गया है कि उस समय विजय टांडे ही आहरण एवं संवितरण अधिकारी भी थे, ऐसे में इतनी बड़ी राशि का भुगतान उनकी जानकारी और अनुमति के बिना संभव नहीं है। मामले में संबंधित खातों की गहन जांच की मांग की गई है।

कार्रवाई के बावजूद ठोस कदम नहीं..
यह मामला पहले भी कलेक्टर की बैठकों में उठ चुका है और थाना कोटा में अपराध दर्ज होने की बात भी सामने आई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अनियमितताओं को छिपाने का आरोप..
अंकित गौरहा ने आरोप लगाया कि अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए विजय टांडे ने अधीनस्थ कर्मचारियों को निलंबित कर दिया, जबकि वास्तविक जिम्मेदारी अधिकारियों की थी। साथ ही विभाग के अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है।
बजट और दस्तावेजों में हेरफेर..
शिकायत में यह भी कहा गया है कि मासिक व्यय पत्रक और बजट दस्तावेजों में गड़बड़ी कर वास्तविक वित्तीय स्थिति छिपाई गई।हस्ताक्षरयुक्त दस्तावेज जमा होने के बावजूद रिकॉर्ड में अंतर पाया गया।
पुराने मामलों में भी कार्रवाई नहीं..
बताया गया कि इससे पहले भी कई मामलों में शिकायतें सामने आईं, लेकिन कार्रवाई के बजाय संबंधित अधिकारी को पदोन्नति दी गई। रिश्वत मांगने से जुड़े मामलों में भी जांच के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए।
अनुकंपा नियुक्ति में गड़बड़ी..
शिकायत में यह भी आरोप है कि अनुकंपा नियुक्ति में पात्र लोगों की अनदेखी कर अपात्रों को लाभ दिया गया। इस प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार किया गया और भ्रष्टाचार किया गया, जिसमें सुनील यादव की भूमिका अहम बताई गई है।
200 मामलों में नियमों को दरकिनार कर संशोधन..
युक्तियुक्तिकरण प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितता सामने आई है। बिना जिला और विकासखंड स्तरीय समितियों की अनुमति के करीब 200 मामलों में संशोधन किए गए। कई आदेश बिना हस्ताक्षर और नोटशीट के जारी किए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
निलंबन और स्वतंत्र जांच की मांग..
अंकित गौरहा ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विजय टांडे और सुनील यादव को तत्काल निलंबित किया जाए, क्योंकि पद पर रहते हुए वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
लगातार सामने आ रहे इन आरोपों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।



