

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। रामनवमी के पावन अवसर पर इस वर्ष भी भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। 25 मार्च को शहर के पुलिस मैदान से 1008 श्रद्धालुओं का जत्था अयोध्या धाम के लिए रवाना होगा। श्रद्धालु पहले त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान करेंगे और उसके बाद प्रभु भगवान श्रीराम के दरबार में शीश नवाएंगे।

इस भव्य और निःशुल्क यात्रा का आयोजन लगातार तीसरे वर्ष समाजसेवी प्रवीण झा के नेतृत्व में किया जा रहा है। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह और भक्ति का माहौल है। गुरुवार को आयोजित बैठक में यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए विभिन्न जिम्मेदारियां भी बांटी गईं।
25 एसी बसों से होगी यात्रा, हर सुविधा का रखा गया ध्यान..

यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए 25 एसी बसों और 15 कारों की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा, चिकित्सा और भोजन की विशेष तैयारियां भी की गई हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। 25 मार्च को दोपहर 1 बजे पुलिस मैदान से जत्था रवाना होगा और अंबिकापुर होते हुए प्रयागराज पहुंचेगा। यहां संगम स्नान के बाद सभी श्रद्धालु अयोध्या के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां 26 मार्च रामनवमी के दिन रामलला के दर्शन किए जाएंगे।
यात्रा का पूरा कार्यक्रम तय..
यात्रा समिति के सदस्य रौशन सिंह के अनुसार, 25 मार्च को सुबह 10 बजे सभी श्रद्धालुओं को पुलिस मैदान में पहुंचना अनिवार्य होगा। रात में भोजन अंबिकापुर में किया जाएगा और अगले दिन सुबह प्रयागराज में स्नान के बाद अयोध्या के लिए रवाना होंगे। वहां होटल में विश्राम और भोजन की व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी निर्देश..
यात्रा में शामिल होने वाले सभी भक्तों के लिए भगवा वस्त्र पहनना अनिवार्य किया गया है। साथ ही ओरिजनल पावती और आधार कार्ड लाना जरूरी होगा। बस में प्रवेश के लिए आई कार्ड अनिवार्य रहेगा और सभी को बस इंचार्ज के निर्देशों का पालन करना होगा।
तीसरे वर्ष भी सेवा का संकल्प..
यह यात्रा लगातार तीसरे वर्ष आयोजित की जा रही है। पिछले दो वर्षों में भी सैकड़ों श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन कराए जा चुके हैं। अब तक 2016 से अधिक भक्त इस सेवा का लाभ ले चुके हैं। आयोजक प्रवीण झा का उद्देश्य केवल यात्रा कराना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और धार्मिक चेतना को मजबूत करना है।
सुरक्षा और अनुशासन पर विशेष जोर..
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष दल और चिकित्सा टीम तैनात रहेगी। हर बस में एक इंचार्ज नियुक्त किया गया है। भोजन, जलपान और विश्राम की पूर्व व्यवस्था की गई है, ताकि यात्रा सुचारू रूप से पूरी हो सके।
आस्था और परंपरा का अनूठा संगम..
यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और सामूहिकता का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम को ‘भांजा’ मानने की परंपरा है, जिससे यहां के लोगों का अयोध्या से विशेष भावनात्मक जुड़ाव है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन यात्रा में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं।



