

बिलासपुर/मस्तुरी। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह सरकारी दावों की पोल खोल रही है। बिलासपुर जिले के मस्तुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुकुरदीकला स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की तस्वीर कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है, जहां मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए कक्ष अब निर्माण सामग्री के भंडारण केंद्र में तब्दील हो गए हैं।



जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र के ड्रेसिंग रूम और नेत्र परीक्षण कक्ष में सीमेंट, सरिया, गिट्टी समेत अन्य निर्माण सामग्री रख दी गई है। अस्पताल के भीतर इलाज से जुड़े महत्वपूर्ण कमरों का इस तरह उपयोग किए जाने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जहां मरीजों को उपचार मिलना चाहिए, वहां अब निर्माण सामग्री का कब्जा है।
इलाज कक्षों में सीमेंट की बोरियां, मरीजों को हो रही परेशानी..

ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों की सामग्री को सुरक्षित रखने के नाम पर स्वास्थ्य केंद्र के कमरों का उपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं बल्कि मरीजों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे अब अस्पताल में इंसानों का नहीं बल्कि सीमेंट और छड़ का इलाज किया जाएगा।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल..
मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और निगरानी होती तो अस्पताल की यह स्थिति सामने नहीं आती। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी या मौन सहमति के बिना अस्पताल परिसर का इस तरह उपयोग संभव नहीं है।
बीएमओ की मॉनिटरिंग व्यवस्था कटघरे में..
मस्तुरी ब्लॉक के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जाता तो इलाज कक्षों को गोदाम में तब्दील करने जैसी स्थिति पैदा नहीं होती। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर प्रभावी निगरानी का अभाव दिखाई दे रहा है।
कर्मचारियों की उपस्थिति पर भी सवाल..
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अस्पताल में कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। समय पर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलने से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की लचर प्रशासनिक व्यवस्था का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में आक्रोश..
कुकुरदीकला और आसपास के गांवों के लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पतालों का उद्देश्य मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है, न कि उन्हें निर्माण सामग्री के भंडारण केंद्र में बदल देना। ग्रामीणों ने जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर व्यवस्था सुधारने तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकता है जनाक्रोश..
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही अस्पताल को निर्माण सामग्री से मुक्त कर स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू नहीं किया गया, तो वे जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएगा।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती यह तस्वीर प्रशासन के लिए चेतावनी है कि सरकारी अस्पतालों की निगरानी केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी उसका प्रभाव दिखाई दे।



