

बिलासपुर। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर देशभर में एक नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। अलग-अलग राज्यों में महिलाओं के लिए घोषित योजनाओं में सहायता राशि के अंतर को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।

छत्तीसगढ़ में चल रही ‘महतारी वंदन’ योजना के तहत महिलाओं को हर महीने ₹1000, यानी सालाना ₹12,000 की आर्थिक सहायता दी जा रही है। वहीं, पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने ‘मातृशक्ति भरोसा कार्ड’ के जरिए महिलाओं को ₹3000 प्रति माह, यानी सालाना ₹36,000 देने का वादा किया है।
इसी अंतर को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि अगर मातृशक्ति के सम्मान की बात की जा रही है, तो यह पूरे देश में समान रूप से दिखनी चाहिए। एक राज्य में ₹1000 और दूसरे में ₹3000 देना यह दर्शाता है कि योजनाएं जरूरत के आधार पर नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति के तहत बनाई जा रही हैं।
अंकित गौरहा ने सवाल उठाते हुए कहा कि ममता, दर्द और जिम्मेदारियों में कोई फर्क नहीं होता, फिर सम्मान की राशि में इतना बड़ा अंतर क्यों है? क्या छत्तीसगढ़ की माताओं का सम्मान कम है?
उन्होंने इस मुद्दे पर माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi से भी स्पष्ट जवाब मांगा है। उनका कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक सहायता का मामला नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और उनके समान अधिकारों का विषय है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक चर्चा में रहेगा। खासकर तब, जब विभिन्न राज्यों में चुनावी घोषणाओं के तहत महिलाओं के लिए अलग-अलग योजनाएं और रकम सामने आ रही हैं।
अब देखना यह होगा कि यह बहस आगे किस दिशा में जाती है और क्या सरकार इस पर कोई स्पष्ट नीति या जवाब देती है।



