खैर लकड़ी तस्करी मामले में बड़ा खुलासा : 1.70 करोड़ नकद और 70 टन लकड़ी जब्त, अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच तेज..

फर्जी एनओसी, ट्रांजिट पास और बिलिंग से लकड़ी के कारोबार को वैध दिखाने का आरोप; हिमाचल प्रदेश से शिव ट्रेडर्स का संचालक गिरफ्तार, अब तक चार आरोपी पुलिस की गिरफ्त में..

महासमुंद। खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कारोबार को वैध दिखाने के मामले में महासमुंद पुलिस ने अंतरराज्यीय स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस के अनुसार, अलग-अलग कार्रवाइयों में अब तक 70 टन खैर लकड़ी और कुल 2 करोड़ 51 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं। मामले में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से शिव ट्रेडर्स के संचालक सतपाल सिंह (67) को गिरफ्तार कर महासमुंद लाया गया है। पुलिस अब लकड़ी के स्रोत, कथित फर्जी दस्तावेजों और विभिन्न फर्मों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।

पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, मामले में पहले 81 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे, जबकि हालिया कार्रवाई में 1 करोड़ 70 लाख रुपये की जब्ती बताई गई है। दोनों जब्तियों को मिलाकर कुल राशि 2.51 करोड़ रुपये होती है। हालांकि, इस रकम के कथित अपराध से संबंध और उसके स्रोत का निर्धारण जांच के बाद ही होगा।

गुरुग्राम के गोदाम से 15 टन खैर लकड़ी जब्त..

पुलिस के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम जिले के पटौदी क्षेत्र के बहोड़ा कलां गांव स्थित श्री बालाजी ट्रेडिंग के गोदाम में तलाशी ली गई। यहां से लगभग 15 टन खैर लकड़ी बरामद कर जब्त की गई। पुलिस ने ओडिशा, मध्यप्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए कुल 70 टन खैर लकड़ी जब्त किए जाने की जानकारी दी है।

23,350 किलो लकड़ी के परिवहन से शुरू हुई जांच..

इस प्रकरण में पिथौरा थाने में वन परिक्षेत्र अधिकारी के आवेदन पर 9 जुलाई 2026 को अपराध क्रमांक 172/2026 दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार, मामला 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन में इस्तेमाल किए गए एनटीपीएस एनओसी दस्तावेज में कूटरचना और धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़ा है।

जांच में आरोप है कि वास्तविक माल की आपूर्ति के बिना विभिन्न फर्मों के माध्यम से बिल तैयार किए गए और कथित फर्जी एनओसी, वन विभाग के ट्रांजिट पास तथा एचएसएन कोड के दुरुपयोग से लकड़ी के कारोबार को वैध दिखाने की कोशिश की गई।

पुलिस का दावा है कि बैंक खातों की जांच में पिछले तीन वर्षों के दौरान कई बार करोड़ों रुपये के लेन-देन के संकेत मिले हैं। इन भुगतानों का वास्तविक कारोबारी आधार क्या था और संबंधित फर्मों की भूमिका कितनी थी, इसकी पड़ताल की जा रही है।

हिमाचल प्रदेश से कारोबारी गिरफ्तार..

पुलिस के मुताबिक, 12 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब से शिव ट्रेडर्स के संचालक सतपाल सिंह को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोप लगाया है कि उनकी फर्म के माध्यम से अन्य आरोपियों के साथ कथित रूप से फर्जी बिलिंग की गई।

नाहन स्थित मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने के बाद आरोपी को महासमुंद लाया गया। पुलिस मामले में आगे की पूछताछ और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।

पहले भी तीन आरोपियों की गिरफ्तारी..

पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी बताई गई है –

मनीष अग्रवाल (30 वर्ष): गिरफ्तारी 3 सितंबर 2026। इनके मुड़पार स्थित मकान से 81 लाख रुपये नकद जब्त किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।

पारितोष मिश्रा (47 वर्ष): पीयूष इंटरप्राइजेस के संचालक; गिरफ्तारी 14 सितंबर 2026।

अखिलेश सिंघल (52 वर्ष): सिंघल इंटरप्राइजेस, संबलपुर के संचालक; गिरफ्तारी 14 सितंबर 2026।

सतपाल सिंह (67 वर्ष): शिव ट्रेडर्स के संचालक; गिरफ्तारी 12 अक्टूबर 2026।

पुलिस ने कथित अपराध से अर्जित संपत्ति की कुर्की और अवैध आर्थिक लाभ पर रोक लगाने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 के तहत वैधानिक कार्रवाई की बात कही है। मामले में भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और भारतीय वन अधिनियम, 1927 की संबंधित धाराओं के तहत भी कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है।

अब जांच के केंद्र में दस्तावेज और पैसों का स्रोत..

इस मामले में आगे की जांच के तीन प्रमुख बिंदु हैं – खैर लकड़ी का वास्तविक स्रोत, परिवहन में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की प्रामाणिकता और विभिन्न फर्मों के बैंक खातों में हुए लेन-देन का उद्देश्य। इनके सत्यापन से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित तौर पर किसकी क्या भूमिका रही और जब्त संपत्ति का मामले से क्या संबंध है।

खैर लकड़ी की अवैध कटाई और परिवहन से वन संपदा को नुकसान पहुंच सकता है। यदि फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो मामला वन विभाग की अनुमति व्यवस्था और अंतरराज्यीय व्यापारिक निगरानी से भी जुड़ता है। इसलिए वन विभाग, पुलिस और संबंधित वित्तीय एजेंसियों के बीच समन्वय के साथ जांच महत्वपूर्ण है।

फिलहाल मामले की विवेचना जारी है। पुलिस के आरोपों को न्यायालय में साबित किया जाना बाकी है। किसी भी आरोपी को दोषी तभी माना जाएगा, जब न्यायिक प्रक्रिया में आरोप प्रमाणित हों।