
धमतरी, गरियाबंद।धमतरी के आमानारा गांव में खौफ का पर्याय बने आदमखोर तेंदुए ने खूनी खेल खेला। एक ग्रामीण की जान लेने के बाद जब काल मासूम सुहानी की तरफ झपटा, तो पिता सुरेश ने अपनी जान की परवाह किए बिना नंगे हाथों खूंखार जानवर को दबोच लिया।उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से सटे वनांचल में पिछले चार दिनों से खौफ का दूसरा नाम बन चुका एक आदमखोर तेंदुआ शुक्रवार की सुबह मौत बनकर उतरा। सुबह के करीब 7 बजे का वक्त था। धमतरी जिले का आमानारा गांव अभी अपनी सुस्ती से जाग ही रहा था कि अचानक बस्ती में काल ने दस्तक दे दी। किसी को संभलने का जरा भी मौका नहीं मिला। बस्ती में घुसते ही तेंदुए ने सबसे पहले प्रभुराम (42 वर्ष) पर जानलेवा हमला कर दिया। खून से लथपथ प्रभुराम को जब तक ग्रामीण अस्पताल ले जाते, उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

इस घटना से पूरे गांव में दहशत फैल गई। लोग जान बचाने के लिए अपने-अपने घरों की तरफ भागे। सुरेश मरकाम (30 वर्ष) उस वक्त अपने घर की चौखट (दुआर) पर बैठे थे। तेंदुआ उनकी ओर दौड़ा तो डर के मारे सुरेश भीतर भागे, लेकिन मौत उनके पीछे-पीछे घर के अंदर तक घुस आई। तेंदुए ने सुरेश पर झपट्टा मारा और फिर वहां से निकलकर बाहर खड़े बीरबल नेताम को लहूलुहान कर दिया।लेकिन सबसे खौफनाक और दिल दहला देने वाला मंजर अभी बाकी था। सुरेश की 3 साल की मासूम बेटी सुहानी घर के सामने खेल रही थी। आदमखोर की खूनी नजर उस बच्ची पर पड़ी और वह काल बनकर मासूम पर टूट पड़ा। यह दृश्य देखकर एक पिता का कलेजा कांप उठा। मौत का खौफ भूलकर, बिना किसी हथियार के सुरेश मरकाम सीधे उस खूंखार जानवर से जा भिड़े। अपनी बेटी की जान बचाने की खातिर एक साधारण ग्रामीण के भीतर का अदम्य साहस जाग उठा था।
सुरेश ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और तेंदुए को दोनों हाथों से जकड़ लिया। इंसान और आदमखोर के बीच यह संघर्ष रोंगटे खड़े कर देने वाला था। सुरेश के इस अदम्य हौसले ने गांव वालों की नसों में भी बिजली दौड़ा दी। जो भीड़ पहले खौफ में थी, वह चीख-पुकार सुनकर लाठी-बल्लियां लेकर अपने नायक की मदद को दौड़ पड़ी। युवाओं ने गजब की हिम्मत दिखाई और लकड़ियों की मदद से तेंदुए को जमीन पर पटक दिया। करीब 20 मिनट तक ग्रामीणों ने लाठी-बल्लियों से तेंदुए के गले, पीठ और पैरों को मजबूती से माटी में दबाए रखा। आदमखोर छटपटाता रहा, लेकिन पिता के हौसले और गांव की एकता के आगे उसकी एक न चली। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को पिंजरे में कैद कर जंगल सफारी भेज दिया।
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पिछले चार दिनों में 14 लोगों पर हमला कर 2 की जान लेने वाले इस आदमखोर का आतंक आखिरकार एक पिता की ममता के आगे हार गया। प्रभुराम की मौत से गांव में आज भी मातम है, लेकिन सुरेश मरकाम की वीरता हर ग्रामीण की जुबान पर है। अगर सुरेश अपनी जान पर खेलकर काल से नहीं भिड़ता, तो शायद आमानारा की माटी आज एक और मासूम की बलि चढ़ जाती। एक निहत्थे पिता का यह साहस आने वाले कई सालों तक इस वनांचल के सुरता (यादों) में हमेशा जिंदा रहेगा।







