हाईकोर्ट और DPI के आदेशों की अनदेखी ? शिक्षा विभाग में प्रमोशन – पोस्टिंग का बड़ा खेल उजागर..

3 साल पुरानी वेटिंग लिस्ट से बनाए गए प्रधान पाठक, मनचाही जगहों पर पोस्टिंग के आरोप..

बिलासपुर। शिक्षा विभाग में पदोन्नति और पदस्थापना को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि हाईकोर्ट और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के स्पष्ट निर्देशों को नजरअंदाज कर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में नियमों के विपरीत शिक्षकों को प्रधान पाठक (हेडमास्टर) के पद पर पदोन्नत कर मनचाही जगहों पर पदस्थापित कर दिया गया।

इस पूरे मामले की शिकायत कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने कलेक्टर और कमिश्नर से की है। उन्होंने दस्तावेजों के साथ आरोप लगाया है कि जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और संबंधित कर्मचारियों ने नियमों को दरकिनार करते हुए यह प्रक्रिया पूरी की।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, 27 दिसंबर 2024 को तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी टी.आर. साहू ने विभागीय दिशा-निर्देशों के तहत सहायक शिक्षकों को प्रधान पाठक पद पर पदोन्नति दी थी। यह प्रक्रिया 29 मार्च 2023 के दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई थी।

इसके बाद कुछ शिक्षकों ने अपनी पदस्थापना को लेकर आपत्ति जताई और मामला हाईकोर्ट पहुंचा। 16 अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने संबंधित शिक्षकों को DPI के समक्ष अभ्यावेदन देने के निर्देश दिए।
बाद में 4 सितंबर 2025 को DPI ने इन अभ्यावेदनों को निरस्त करते हुए पहले जारी निर्देशों के अनुसार ही पदस्थापना करने को कहा।

यहीं से शुरू हुआ विवाद..

शिकायत के मुताबिक, DPI के आदेश के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने कथित रूप से नियमों में बदलाव करते हुए कई शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना के बजाय सुविधाजनक और शहरी क्षेत्रों में पोस्टिंग दे दी।

उदाहरण के तौर पर –

साहू को खोगसरा के बजाय राजेंद्र नगर, बघेल को मस्तूरी के बजाय पौसरा, सोनी को तखतपुर के बजाय बिल्हा..इसी तरह अन्य मामलों में भी नियमों को दरकिनार कर पोस्टिंग देने के आरोप लगाए गए हैं।

कोटा ब्लॉक से शुरू हुआ दूसरा चरण..

मामला यहीं नहीं रुका। शिकायत में कहा गया है कि पहले कुछ शिक्षकों की पोस्टिंग के बाद संशोधित आदेश जारी कर कोटा विकासखंड के अन्य शिक्षकों को भी इसी पैटर्न पर पदस्थापित किया गया। जबकि 2024 के आदेश में साफ उल्लेख था कि 10 दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर पदस्थापना स्वतः निरस्त मानी जाएगी।

वेटिंग लिस्ट से भी प्रमोशन पर सवाल..

सबसे गंभीर आरोप यह है कि करीब तीन साल पुरानी वेटिंग लिस्ट से शिक्षकों को निकालकर उन्हें प्रधान पाठक बना दिया गया। इसके लिए नई डीपीसी (Departmental Promotion Committee) बनाकर टकेश्वर जगत, आस्था गौरहा, फुलेश सिंह, हेमलता पटेल और ईश्वरी ध्रुव को पदोन्नत कर शहर के स्कूलों में पदस्थापना दे दी गई।

अवमानना का तर्क भी सवालों में..

कुछ जगहों पर अवमानना (Contempt of Court) का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन शिकायतकर्ताओं का कहना है कि DPI द्वारा अभ्यावेदन निरस्त किए जाने के बाद कोर्ट के आदेश का पालन पहले ही हो चुका था। ऐसे में बाद की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जांच की मांग तेज..

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी और संभावित लेन-देन का मामला हो सकता है।

अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और क्या जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया जाता है।