
रात में डंपिंग, सुबह ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से बिक्री; जिले में सिर्फ एक भंडारण लाइसेंस, शहर में जगह-जगह रेत के ढेर..

बिलासपुर। जिले में बारिश के दौरान रेत घाट बंद हैं और नियमानुसार रेत के उत्खनन पर रोक है। इसके बावजूद बिलासपुर शहर और आसपास के इलाकों में रेत की आवक और बिक्री लगातार जारी है। शहर के कई हिस्सों में खाली जमीन, सड़क किनारे और अन्य स्थानों पर रेत के बड़े-बड़े ढेर दिखाई दे रहे हैं। सुबह होते ही इन जगहों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रेत भरकर अलग-अलग निर्माण स्थलों तक पहुंचाई जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रेत घाट बंद हैं तो शहर में पहुंच रही यह रेत आखिर आ कहां से रही है?
खनिज विभाग के अनुसार जिले में रेत भंडारण के लिए फिलहाल केवल कोटा क्षेत्र में एक लाइसेंस जारी है। इसके बावजूद व्यापार विहार, सरकंडा, कोनी, मंगला, लिंगियाडीह, तोरवा और बिरकोना रोड सहित कई इलाकों में रेत का भंडारण किए जाने की बात सामने आ रही है। इनमें से कई जगहों पर सरकारी अथवा खाली जमीन के आसपास रेत के ढेर देखे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय रेत से भरे वाहन इन स्थानों तक पहुंचते हैं और सुबह यहां से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए सप्लाई की जाती है।
घाट बंद होने के बाद भी रेत की आवक बनी चुनौती..
बारिश के दौरान रेत घाटों के बंद रहने की अवधि में शहर में रेत की मांग बनी रहती है। निर्माण कार्यों के लिए रेत की जरूरत के बीच बाजार में इसकी कीमत भी बढ़ जाती है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर अवैध उत्खनन और भंडारण किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय स्तर पर यह भी शिकायतें सामने आती रही हैं कि रात के समय नदी क्षेत्रों में मशीनें लगाकर रेत निकाली जाती है और सुबह होने से पहले वाहनों को वहां से हटा लिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
कार्रवाई हुई तो सामने आया अवैध उत्खनन का मामला..
एक तरफ विभाग की ओर से यह दावा किया जाता रहा है कि जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर निगरानी रखी जा रही है। दूसरी ओर, अलग-अलग स्थानों से अवैध उत्खनन की तस्वीरें और शिकायतें सामने आने के बाद विभागीय टीमों को कार्रवाई करनी पड़ी है। कार्रवाई के दौरान रेत उत्खनन में इस्तेमाल मशीनों के साथ परिवहन में लगे भारी वाहन और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़े जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इससे यह सवाल भी उठता है कि यदि घाट बंद हैं और अवैध उत्खनन नहीं हो रहा है तो शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी मात्रा में पहुंच रही रेत का स्रोत क्या है?
मस्तूरी, तखतपुर, रतनपुर और कोटा क्षेत्र पर सवाल..
जिले के मस्तूरी, तखतपुर, रतनपुर और कोटा क्षेत्र से अवैध रेत उत्खनन की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर रात के समय नदी से रेत निकाली जाती है और सुबह तक मशीनों तथा वाहनों को हटा दिया जाता है। इसके बाद यही रेत शहर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचाए जाने की बात कही जा रही है।
हालांकि अवैध उत्खनन के पीछे किसी व्यक्ति, वाहन मालिक या अधिकारी की मिलीभगत जैसे आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव है। ऐसे मामलों में परिवहन दस्तावेज, वाहन रिकॉर्ड, खनन स्थल और भंडारण स्थल की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
रेत के दाम में बड़ा अंतर..
घाट बंद होने के बाद रेत के दाम में भी काफी बढ़ोतरी की शिकायतें हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक पहले जहां एक हाइवा रेत करीब 5 से 7 हजार रुपए में मिल जाता था, वहीं अब इसके लिए 15 से 20 हजार रुपए या उससे अधिक चुकाने की बात कही जा रही है।

इसी तरह ट्रैक्टर-ट्रॉली में मिलने वाली रेत की कीमत भी पहले करीब 800 से 1200 रुपए के आसपास बताई जाती थी, जो अब बढ़कर 2800 से 3000 रुपए या उससे अधिक होने की शिकायत है।
दाम में इस अंतर का सीधा असर मकान, दुकान और अन्य निर्माण कार्य कराने वाले लोगों पर पड़ रहा है। रेत की कमी और बढ़ी कीमत के कारण निर्माण की लागत भी बढ़ रही है।
घाट बंद हैं तो स्टॉक की जांच क्यों नहीं?
रेत के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए सबसे अहम कड़ी भंडारण स्थलों की जांच हो सकती है। जिस स्थान पर बड़ी मात्रा में रेत जमा है, वहां यह देखा जा सकता है कि भंडारण की अनुमति है या नहीं, कितनी मात्रा में स्टॉक स्वीकृत है और मौजूद रेत का स्रोत क्या है।

इसी तरह रेत परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच से भी रेत की वास्तविक उत्पत्ति का पता लगाया जा सकता है। ट्रांजिट पास में खनन क्षेत्र, रेत की मात्रा, वाहन और परिवहन से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है। ऐसे में डंपिंग स्थल पर मौजूद स्टॉक और वहां से निकलने वाले वाहनों के दस्तावेजों का मिलान किया जाए तो जांच एजेंसियों को रेत के स्रोत तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
लिंगियाडीह से सरकंडा तक डंपिंग की शिकायत..
शहर के लिंगियाडीह, तोरवा, बिरकोना रोड और सरकंडा क्षेत्र में रेत के अवैध डंप की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि खाली अथवा सरकारी जमीन के आसपास रेत जमा कर रखी जाती है और बाद में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से इसकी सप्लाई की जाती है। कुछ स्थानों पर देर रात डंपर और हाइवा से भी रेत पहुंचाए जाने की शिकायत है।
यदि इन स्थानों पर वास्तव में बिना अनुमति रेत का भंडारण किया जा रहा है तो खनिज विभाग के लिए स्टॉक, परिवहन दस्तावेज और जमीन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी होगा।
विभाग बोला – अवैध डंप मिला तो होगी कार्रवाई..
खनिज अधिकारी राजू यादव ने बताया कि जिले में रेत डंप करने के लिए कोटा क्षेत्र में लाइसेंस जारी किया गया है। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति अवैध तरीके से रेत का भंडारण कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राजू यादव, खनिज अधिकारी, बिलासपुर
अब जांच का सवाल..
घाट बंद होने की अवधि में शहर और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद रेत के स्टॉक की जांच कराई जाए तो तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। विभाग के पास ट्रांजिट पास, वाहनों और भंडारण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच का विकल्प मौजूद है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि सिर्फ नदी और घाटों की निगरानी तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि शहर में बने रेत के डंपिंग प्वाइंट तक भी जांच पहुंचे।
आखिर जब जिले में रेत घाट बंद हैं और भंडारण का लाइसेंस सीमित है, तब शहर के अलग-अलग हिस्सों में जमा रेत का स्रोत क्या है – यह सवाल अब जांच की मांग कर रहा है।







