बिलासपुर : मानसून पर ‘अल नीनो’ का साया ! बारिश कम होने की आशंका, कृषि विभाग ने किसानों को दिया फसल बचाने का प्लान बी..

बिलासपुर। इस साल मानसून की चाल थोड़ी सुस्त नजर आ रही है। मौसम पर ‘अल नीनो’ का असर दिखने लगा है, जिसके चलते बिलासपुर जिले में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका बन गई है। पानी की कमी और मौसम की इस अनिश्चितता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इसे देखते हुए कृषि विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है और किसानों को खेती में नुकसान से बचाने के लिए ‘वैकल्पिक फसल और पानी बचाने’ की नई गाइडलाइन जारी की है। कृषि विभाग ने साफ कहा है कि मौसम को देखते हुए किसान पारंपरिक तरीकों पर पूरी तरह निर्भर न रहें और पानी के हिसाब से अपनी खेती का तरीका बदलें।

जल्दी पकने वाले धान पर दें जोर..

कृषि विभाग ने सलाह दी है कि किसान लंबी अवधि वाले धान के बजाय कम समय में पकने वाली किस्में जैसे एमटीयू-1010, एमटीयू-1156, एमटीयू-1153 और आईआर-64 लगाएं। इसके अलावा, रोपाई (जिसमें ज्यादा पानी लगता है) की जगह डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) यानी सीधी बुवाई या ‘खुर्रा बुवाई’ का तरीका अपनाएं। इससे पानी की अच्छी खासी बचत होगी।

बारिश में देरी हो तो क्या करें?

विभाग ने बताया है कि जिन किसानों ने खुर्रा बुवाई कर ली है, और अगर बारिश होने में देरी हो रही है, तो वे बोरवेल या अपने पास मौजूद पानी से हल्की सिंचाई कर लें ताकि बीज अच्छे से अंकुरित हो सकें। इस दौरान खरपतवार (कचरा) रोकने पर भी खास ध्यान दें।
अगर बारिश बहुत लंबी खिंच जाती है और दोबारा बुवाई की नौबत आती है, तो दन्तेश्वरी, इंदिरा बरानी और सहभागी जैसी किस्में लगाएं। वहीं, अगर बुवाई में बहुत ज्यादा देर हो जाए, तो खुर्रा बोनी की जगह ‘लेही पद्धति’ का इस्तेमाल करें। किसान अपने बोरवेल की मदद से नर्सरी तैयार रखें, ताकि अच्छी बारिश होते ही तुरंत रोपाई की जा सके।

धान के अलावा ये फसलें भी हैं शानदार विकल्प..

कम पानी में अच्छी पैदावार के लिए कृषि विभाग ने किसानों से धान के साथ-साथ दूसरी फसलें लगाने की भी अपील की है। किसान कोदो, कुटकी, रागी, कुल्थी, उड़द, मूंग, तिल, रामतिल और मूंगफली की खेती कर सकते हैं। इन फसलों को पानी की कम जरूरत होती है और सूखे की स्थिति में भी ये अच्छा मुनाफा दे सकती हैं।

सिंचाई के तरीके बदलें और बीमा जरूर कराएं..

पानी के सही इस्तेमाल के लिए स्प्रिंकलर (फव्वारा) और ड्रिप (टपक) जैसी सिंचाई प्रणालियों का उपयोग करने पर जोर दिया गया है। कृषि विभाग ने किसानों से खास अपील की है कि वे किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ का लाभ जरूर लें। मौसम के हर अपडेट और खेती की नई तकनीक के लिए किसान लगातार कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के संपर्क में रहें।