

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में गिरते भू-जल स्तर को थामने के लिए जिला प्रशासन ने एक अनोखी और हाई-टेक मुहिम छेड़ दी है। रवायती सरकारी ढर्रे से हटकर अब जल संरक्षण का काम सीधे स्पेस टेक्नोलॉजी के जरिए जमीन पर उतारा जा रहा है। कलेक्टर संजय अग्रवाल की इस दूरदर्शी पहल के तहत बारिश के पानी को सहेजने के लिए जिले भर में 325 ‘इंजेक्शन वेल’ (Injection Wells) का जाल बिछाया जा रहा है। इस हाई-स्पीड महाभियान में बिलासपुर नगर निगम ने अपना शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर एक नजीर पेश की है।

पहली बार युक्तधारा और भुवन ऐप का कमाल..
आमतौर पर वाटर हार्वेस्टिंग या रिचार्ज के लिए गड्ढे अंदाजे से खोद दिए जाते थे, लेकिन इस बार प्रशासन ने स्मार्ट तरीका अपनाया है। जिले में पहली बार युक्तधारा पोर्टल और इसरो (ISRO) के भुवन ऐप के जॉइंट डेटा का इस्तेमाल किया गया है। इसके जरिए जमीन के नीचे छिपे ‘फ्रैक्चर जोन’ (वो जगहें जहां से पानी सबसे तेजी से जमीन के भीतर सोखा जाता है) को सटीक तरीके से लोकेट किया गया। इन्हीं साइंटिफिक लोकेशंस पर ये हाई-टेक इंजेक्शन वेल बनाए जा रहे हैं, ताकि बारिश की एक-एक बूंद बिना बर्बाद हुए सीधे अंडरग्राउंड वाटर लेवल को बढ़ा सके।
उद्योगों का साथ, युद्धस्तर पर काम..
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस अहम प्रोजेक्ट के लिए केवल सरकारी खजाने पर निर्भर रहने के बजाय जिले के उद्योगों से भी जनभागीदारी की अपील की। इसका असर यह हुआ कि 325 चिन्हित स्थलों पर काम शुरू हो गया। इनमें से 116 इंजेक्शन वेल बनकर पूरी तरह तैयार हैं, जबकि 209 जगहों पर दिन-रात मशीनें गरज रही हैं और काम युद्धस्तर पर जारी है।
नगर निगम 100% पास, मस्तूरी ब्लॉक भी आगे..
प्रशासनिक कसावट का ही नतीजा है कि बिलासपुर नगर निगम ने अपने हिस्से के पूरे 35 इंजेक्शन वेल का निर्माण कर शत-प्रतिशत टारगेट अचीव कर लिया है। ग्रामीण इलाकों की बात करें तो मस्तूरी ब्लॉक 83 के लक्ष्य के विरूद्ध 36 वेल बनाकर सबसे आगे चल रहा है। इसके अलावा बिल्हा (19/90), तखतपुर (14/40) और कोटा (12/77) में भी तेजी से काम चल रहा है।
आने वाली पीढ़ी के लिए ‘वाटर रिवोल्यूशन’..
इन हाई-टेक वेल के अलावा मनरेगा के तहत मिनी परकुलेशन टैंक भी बनाए जा रहे हैं। कलेक्टर अग्रवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जल संरक्षण सिर्फ कोई सरकारी योजना भर नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों की प्यास बुझाने की गारंटी है। काम की क्वालिटी और डेडलाइन में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बारिश के पहले अगर यह पूरा सिस्टम एक्टिव हो जाता है, तो बिलासपुर के लिए यह जल क्रांति से कम नहीं होगा।



