
मंगला चौक से मोपका बाईपास तक कई प्रमुख मार्गों की हालत पर उठे सवाल, कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने मांगा सड़कवार काम का हिसाब..

बिलासपुर। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की स्वीकृति और भूमिपूजन को लेकर किए जा रहे दावों के बीच शहर के कई प्रमुख मार्गों की बदहाल स्थिति ने विकास की रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगला चौक से दीनदयाल कॉलोनी, अशोक नगर से बिरकोना, चांटीडीह चौक से डीएलएस कॉलेज और सेंदरी से मोपका बाईपास तक के मार्गों को लेकर स्थानीय नागरिकों की परेशानियां सामने आ रही हैं। वहीं, राजकिशोर नगर चौक से छठ घाट और साइंस कॉलेज से सब्जी मंडी तक की सड़कों की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
इन मार्गों पर गड्ढों, जर्जर सतह और धूल के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होने की शिकायतें हैं। रोजाना इन सड़कों से गुजरने वाले वाहन चालकों, दोपहिया सवारों और राहगीरों के लिए सुरक्षित सफर बड़ी चुनौती बन रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति के दावे किए जा रहे हैं, तो प्रमुख सड़कों की स्थिति में अपेक्षित सुधार कब दिखाई देगा?
स्वीकृति और भूमिपूजन के बाद धरातल पर काम का इंतजार..
विकास कार्यों की घोषणा, स्वीकृति और भूमिपूजन किसी भी परियोजना की शुरुआत के महत्वपूर्ण चरण हैं, लेकिन आम लोगों को उसका वास्तविक लाभ तब मिलता है, जब निर्माण कार्य समय पर पूरा हो और सड़कें बेहतर स्थिति में नजर आएं। बेलतरा क्षेत्र की प्रमुख सड़कों को लेकर उठ रहे सवाल इसी अंतर की ओर ध्यान दिला रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर सड़क निर्माण, मरम्मत और रखरखाव की जरूरत के बीच यह जानना जरूरी है कि संबंधित मार्गों में से किनके लिए बजट स्वीकृत हुआ है, किनका काम शुरू हो चुका है और किन परियोजनाओं पर अभी काम बाकी है। साथ ही, जहां निर्माण कार्य चल रहा है, वहां उसकी समयसीमा और गुणवत्ता की निगरानी भी जरूरी है।
गड्ढों और धूल से आम लोगों की परेशानी..
खराब सड़कों का असर केवल आवागमन की गति पर नहीं पड़ता, बल्कि इससे वाहन चालकों को दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। गड्ढों से बचने के लिए अचानक दिशा बदलने वाले वाहनों के कारण जोखिम बढ़ सकता है। वहीं, धूल से आसपास रहने वाले लोगों और दुकानदारों को भी परेशानी होती है।
शहर के इन मार्गों से रोजाना गुजरने वाले लोगों को राहत देने के लिए केवल अस्थायी मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। जरूरत के अनुसार स्थायी निर्माण, गड्ढों की मरम्मत, सड़क की गुणवत्ता की जांच और नियमित रखरखाव पर ध्यान देना होगा। हालांकि, इन मार्गों पर दुर्घटनाओं की वास्तविक संख्या और सड़कवार निर्माण की वर्तमान स्थिति के आधिकारिक आंकड़े सामने आने पर ही समस्या की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
अंकित गौरहा ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मांगा जवाब..
कांग्रेस नेता एवं पूर्व जिला पंचायत सभापति अंकित गौरहा ने बेलतरा क्षेत्र की सड़कों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तो शहर की प्रमुख सड़कों की हालत में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं दिखाई दे रहा है?
गौरहा ने संबंधित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सड़कवार स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि किन सड़कों के निर्माण या मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत की गई है, किन कार्यों की शुरुआत हो चुकी है और उन्हें पूरा करने की समयसीमा क्या तय की गई है। जिन मार्गों पर काम लंबित है, उनके संबंध में भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
विकास का पैमाना जनता को मिलने वाली राहत..
गौरहा ने कहा कि आम जनता को केवल घोषणाओं और भूमिपूजन से राहत नहीं मिलती। लोगों की अपेक्षा है कि उन्हें सुरक्षित, सुगम और बेहतर सड़कें मिलें, ताकि रोजमर्रा का आवागमन आसान हो सके। संबंधित विभागों को सड़कवार समस्याओं की समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निराकरण करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास की असली पहचान केवल परियोजनाओं की स्वीकृति या भूमिपूजन नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले काम और उससे जनता को मिलने वाली राहत है।
बेलतरा क्षेत्र की सड़कों को लेकर उठे ये सवाल अब संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से जुड़ गए हैं। लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि बदहाल मार्गों के सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, निर्माण कार्यों की समयसीमा क्या तय होती है और सड़कों की स्थिति में वास्तविक बदलाव कब दिखाई देता है।







