
सत्ता और संगठन के बीच तालमेल पर उठे सवाल, पीडीएस और गुड़ खरीदी की शिकायतें भी बनी छंटनी का बड़ा कारण..

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार के पौने तीन साल के कार्यकाल में मंत्रियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती दूरी का सीधा असर मंत्रियों के निजी स्टाफ पर पड़ा है। सत्ता और संगठन के बीच समन्वय की कमी के चलते अब तक आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों के 12 से ज्यादा ओएसडी (विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी), निज सचिव और सहायकों की या तो संविदा समाप्त कर दी गई है या उन्हें मूल विभाग लौटा दिया गया है। सबसे ज्यादा 5 बदलाव अकेले वन मंत्री केदार कश्यप के दफ्तर में हुए हैं। वहीं हाल ही में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के निज सचिव संतोष अग्रवाल को भी पद से हटाकर मूल विभाग भेज दिया गया है। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने मंत्रियों के कार्यालयों की कार्यप्रणाली और जनता से संवाद की व्यवस्था की पोल खोल दी है।
मंत्रियों के दफ्तर में तैनात यह निजी स्टाफ कार्यकर्ताओं और आम जनता के लिए मंत्री तक पहुंचने का मुख्य जरिया होता है। लेकिन लगातार सामने आ रही खुफिया और सांगठनिक रिपोर्टों के अनुसार यह स्टाफ समन्वय बनाने के बजाय ‘दीवार’ का काम कर रहा था। संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक यह बात बार-बार पहुंच रही थी कि कार्यकर्ताओं को अपने ही मंत्रियों से मिलने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। फोन न उठाना, संदेशों को मंत्री तक न पहुंचाना और विभागीय अधिकारियों के साथ समानांतर व्यवस्था चलाने की शिकायतों के बाद यह बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गई है।
केदार कश्यप के दफ्तर में हर कुछ महीने में बदल रहे अधिकारी..
सत्ता में आने के बाद से ही वन मंत्री केदार कश्यप का कार्यालय निजी स्टाफ के फेरबदल का केंद्र रहा है। सितंबर 2024 में सबसे पहले उनके ओएसडी सुनील तिवारी को मूल विभाग भेजा गया। इसके बाद जितेंद्र कुमार गुप्ता की नियुक्ति हुई लेकिन उन्हें भी जल्द हटाकर प्रदीप कुमार वैद्य को ओएसडी बनाया गया।
कार्यप्रणाली में सुधार न होने पर जुलाई 2026 में प्रदीप वैद्य को भी मूल विभाग लौटा दिया गया और उनकी जगह दुष्यंत कुमार को प्रभार दिया गया है। इसके अलावा मई 2026 में संकर्षण सिंह की संविदा सेवा समाप्त कर दी गई जबकि कमल नारायण कांडे को भी ओएसडी की जिम्मेदारी से मुक्त किया जा चुका है। सूत्रों की मानें तो सैलाभ साहू को भी हटा दिया गया है।
वही इसके पूर्व एक चर्चित ओएसडी तीरथ राज अग्रवाल को कार्य मुक्त किया जा चुका है चर्चा है कि तीरथ राज अग्रवाल पर पूर्व में भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप लगे थे।
डिप्टी सीएम और राजस्व मंत्री के दफ्तर भी अछूते नही..
फेरबदल की यह प्रक्रिया केवल एक मंत्री तक सीमित नहीं है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव के कार्यालय से शुरुआती महीनों में ही गोपाल पटवा को ओएसडी पद से हटाया गया था जिसके बाद विपुल कुमार गुप्ता की भी छुट्टी कर दी गई। इसी तरह राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के कार्यालय में पदस्थ निज सहायक दुर्गेश धारे की संविदा सेवा सीधे तौर पर समाप्त कर दी गई। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के दफ्तर में भी अहम जिम्मेदारी संभाल रहे ओमप्रकाश देवांगन को उनके प्रभार से हटाकर पूरी व्यवस्था बदली गई है।
दयालदास बघेल के दफ्तर में पीडीएस और गुड़ खरीदी का विवाद..
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के कार्यालय से अजय यादव की विदाई के बाद हाल ही में निज सचिव संतोष अग्रवाल को मूल विभाग वापस भेज दिया गया। सूत्रों के मुताबिक संगठन लगातार इस बात से नाराज था कि कार्यकर्ताओं को मंत्री से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और करोड़ों रुपये की गुड़ खरीदी से जुड़ी कई गंभीर शिकायतें सीधे संगठन और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच रही थीं। हालांकि इन आरोपों पर अभी विभागीय जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं है लेकिन कार्रवाई को इन्हीं शिकायतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
कार्यप्रणाली पर सवाल: सिर्फ चेहरे बदले व्यवस्था नही..
मंत्रालयीन सूत्रों की मानें तो ओएसडी, निज सचिव और संविदा कर्मचारियों को हटाने की प्रशासनिक प्रक्रियाएं तो लगातार हो रही हैं लेकिन दफ्तरों का ढर्रा नहीं बदला है। अभी भी मुलाकातों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है और आम लोगों की पेंडिंग शिकायतों का डेटाबेस नहीं बना है। जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा न होने से यह पता ही नहीं चलता कि कौन सी फाइल या शिकायत किस कर्मचारी के पास अटकी है।
सत्ता और संगठन के स्तर पर अब मंत्रियों के दफ्तरों की खुफिया मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और मंत्रियों के दफ्तरों से बड़े चेहरों की छुट्टी हो सकती है। पार्टी नेतृत्व का सीधा संदेश है कि जो स्टाफ कार्यकर्ताओं और मंत्री के बीच दूरी बनाएगा उसे तत्काल प्रभाव से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
यक्ष प्रश्न.. क्या मंत्रियों से बड़ा है OSD और निज सहायकों का रुतबा…







