मिठाई पर चांदी का वर्क : सेहत के लिए कितना सुरक्षित, चमक के पीछे क्या कहता है विज्ञान?

99.9 प्रतिशत शुद्ध चांदी और खाद्य सुरक्षा के मानक हैं जरूरी, मिलावट की आशंका को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी; वर्क से नहीं, मिठाई की गुणवत्ता और मात्रा से भी जुड़ा है स्वास्थ्य का सवाल..

बिलासपुर। भारतीय मिठाइयों की पहचान केवल उनके स्वाद से नहीं, बल्कि उनकी सजावट से भी होती है। काजू कतली, बर्फी, पेड़ा, रसगुल्ला और कई दूसरी मिठाइयों पर चमकती चांदी की पतली परत यानी वर्क मिठाई को आकर्षक और खास बना देती है। त्योहारों, शादी-विवाह और पारिवारिक आयोजनों में चांदी के वर्क लगी मिठाइयों का चलन लंबे समय से चला आ रहा है। लेकिन इस चमक के पीछे एक महत्वपूर्ण सवाल भी छिपा है-क्या चांदी का वर्क खाना स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है? क्या इससे शरीर को कोई फायदा मिलता है या फिर यह केवल मिठाई की सुंदरता बढ़ाने का माध्यम है?

चांदी के वर्क को लेकर समाज में कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं, तो कुछ इसके सेवन को नुकसानदायक बताते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इन दोनों धारणाओं को बिना किसी प्रमाण के सही नहीं माना जा सकता। असली सवाल यह है कि मिठाई पर लगाया गया वर्क वास्तव में खाद्य श्रेणी की शुद्ध चांदी का है या उसमें किसी दूसरी धातु अथवा अशुद्ध पदार्थ की मिलावट है।

चांदी का वर्क आखिर होता क्या है?

चांदी का वर्क शुद्ध चांदी को अत्यंत पतली परत के रूप में तैयार करके बनाया जाता है। इसे मिठाइयों के ऊपर सजावट के लिए लगाया जाता है। इसकी परत इतनी पतली होती है कि हल्की हवा से भी यह मुड़ सकती है या टूट सकती है।

खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चांदी के वर्क के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित किए हैं। खाद्य श्रेणी के चांदी के वर्क में चांदी की शुद्धता कम से कम 999/1000 यानी 99.9 प्रतिशत होनी चाहिए। इसकी मोटाई और वजन के संबंध में भी निर्धारित मानक हैं। इसके अलावा वर्क के निर्माण में किसी भी स्तर पर पशु मूल के पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

इसका अर्थ यह है कि बाजार में मिठाइयों पर दिखाई देने वाली हर चमकदार परत को केवल उसके रंग और रूप के आधार पर शुद्ध चांदी नहीं माना जा सकता। उसकी वास्तविक गुणवत्ता का पता निर्धारित मानकों और जरूरत पड़ने पर प्रयोगशाला जांच से ही लगाया जा सकता है।

क्या चांदी का वर्क खाने से शरीर को मिलता है कोई फायदा?

चांदी को लेकर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में कई तरह की धारणाएं रही हैं। कुछ लोग इसे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन सुधारने और शरीर को ताकत देने वाला मानते हैं। हालांकि, सामान्य रूप से मिठाइयों पर लगाए जाने वाले चांदी के वर्क के सेवन से ऐसे स्वास्थ्य लाभ मिलने का पर्याप्त और ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

चांदी एक धातु है। इसका शरीर में व्यवहार अन्य पोषक तत्वों की तरह नहीं होता। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जिस प्रकार प्रोटीन, विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार चांदी का वर्क कोई आवश्यक पोषक तत्व नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मिठाई पर चांदी का वर्क लगाने का मुख्य उद्देश्य उसे आकर्षक बनाना है। इससे मिठाई की सुंदरता और बाजार में उसकी प्रस्तुति बेहतर होती है, लेकिन इसे पौष्टिकता बढ़ाने वाला तत्व मानना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण : क्या चांदी शरीर में पचती है?

यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि चांदी का वर्क खाने के बाद शरीर में क्या होता है। शुद्ध धात्विक चांदी पानी में बहुत कम घुलती है। शरीर में इसका अवशोषण भी सीमित हो सकता है। हालांकि, चांदी के अलग-अलग रूपों, उसकी मात्रा और शरीर में उसके व्यवहार को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन जारी रहे हैं।

यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (EFSA) ने खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाली चांदी (E174) के पुनर्मूल्यांकन में यह निष्कर्ष दिया था कि उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़े उसकी सुरक्षा का पूरी तरह आकलन करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। वर्ष 2025 में प्रकाशित पुनर्मूल्यांकन में भी उपलब्ध आंकड़ों की सीमाओं के कारण चांदी के खाद्य उपयोग की सुरक्षा पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया जा सका। इसका अर्थ यह नहीं है कि चांदी के वर्क लगी मिठाई खाने से हर व्यक्ति को नुकसान होगा। इसका अर्थ यह है कि चांदी के सेवन को बिना शर्त स्वास्थ्यवर्धक या पूरी तरह जोखिममुक्त बताने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक आधार नहीं है।

असली खतरा कहां है? मिलावट और अशुद्ध वर्क में..

चांदी के वर्क को लेकर सबसे गंभीर चिंता उसकी मिलावट से जुड़ी है। यदि किसी मिठाई पर चांदी के स्थान पर एल्युमिनियम या दूसरी धातु की पतली परत लगाई गई है, अथवा वर्क में हानिकारक धातुओं की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक है, तो यह खाद्य सुरक्षा का गंभीर विषय बन सकता है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम केवल चांदी के कारण नहीं, बल्कि मिलावट और दूषित पदार्थों के कारण भी पैदा हो सकता है। कुछ धातुएं लंबे समय तक शरीर में पहुंचने पर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बाजार में बिकने वाली सभी चांदी के वर्क लगी मिठाइयां मिलावटी नहीं हैं। बिना जांच किसी दुकान, निर्माता या उत्पाद पर मिलावट का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता बरतना उपभोक्ता और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।

पशु की आंत से वर्क बनाने की पुरानी पद्धति पर लगा प्रतिबंध..

चांदी के वर्क को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू इसकी निर्माण प्रक्रिया है। पारंपरिक तरीके में चांदी को अत्यंत पतली परत में बदलने के लिए पशु की आंत जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता था। इस प्रक्रिया को लेकर स्वच्छता और पशु मूल के पदार्थों के उपयोग संबंधी सवाल उठे थे।

इसी के बाद FSSAI ने वर्ष 2016 में चांदी के वर्क के मानकों में संशोधन किया। निर्धारित प्रावधान के अनुसार, चांदी के वर्क का निर्माण किसी भी स्तर पर पशु मूल के पदार्थों का उपयोग करके नहीं किया जा सकता। यह प्रावधान 1 अगस्त 2017 से प्रभावी हुआ।FSSAI ने वर्ष 2018 में राज्यों को खाद्य श्रेणी के चांदी के वर्क के मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए थे।

इसलिए यह कहना कि आज हर चांदी का वर्क पशु की आंत से ही बनाया जाता है, तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। वर्तमान नियमों में ऐसी निर्माण प्रक्रिया प्रतिबंधित है। हालांकि, नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी पुष्टि निगरानी और जांच से ही की जा सकती है।

क्या चांदी का वर्क लगी मिठाई रोज खाना चाहिए?

चांदी के वर्क लगी मिठाई के सेवन को लेकर सबसे व्यावहारिक सवाल यही है कि इसे कितनी मात्रा में खाना उचित है।

मिठाइयों में सामान्यतः चीनी, घी, दूध, खोया और अन्य सामग्री का इस्तेमाल होता है। इनकी अधिक मात्रा का सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विशेषकर मधुमेह, मोटापा या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को मिठाइयों की मात्रा को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।

यहां चांदी के वर्क और मिठाई के बाकी हिस्से के बीच अंतर समझना जरूरी है। मिठाई में मौजूद चीनी और वसा का अधिक सेवन अपने आप में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा कर सकता है। वहीं, वर्क की गुणवत्ता खराब होने पर धातु संबंधी जोखिम अलग से जुड़ सकता है। इसलिए मिठाई पर चांदी का वर्क लगा होने का अर्थ यह नहीं है कि वह स्वास्थ्यवर्धक हो गई है। मिठाई का सेवन सीमित मात्रा में करना और उसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

उपभोक्ता कैसे बरतें सावधानी?

चांदी के वर्क लगी मिठाई खरीदते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना उपयोगी हो सकता है।

मिठाई हमेशा साफ-सुथरी और भरोसेमंद दुकान से खरीदें।

पैक की गई मिठाई खरीदते समय निर्माता, पैकिंग की तारीख और खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी देखें।

बहुत सस्ती या असामान्य रूप से चमकदार मिठाई को केवल उसके रूप के आधार पर शुद्ध न मानें।

वर्क की वास्तविक शुद्धता केवल देखकर तय नहीं की जा सकती। जरूरत पड़ने पर खाद्य प्रयोगशाला की जांच ही अधिक विश्वसनीय तरीका है।

मिठाइयों को लंबे समय तक खुला रखने से बचें और उनकी ताजगी पर ध्यान दें।

यदि किसी मिठाई की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, तो उसका सेवन न करें और संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी से शिकायत करें।

खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण..

मिठाइयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी केवल त्योहारों के दौरान जांच अभियान चलाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। चांदी के वर्क के निर्माण, उसकी आपूर्ति और मिठाई दुकानों में इस्तेमाल होने वाले वर्क की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी जरूरी है।

खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका होने पर नमूने लेकर निर्धारित प्रयोगशालाओं में जांच कराई जा सकती है। यदि किसी उत्पाद में निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। हालांकि, किसी विशेष दुकान या मिठाई के संबंध में मिलावट का दावा तभी किया जाना चाहिए, जब उसके समर्थन में जांच रिपोर्ट या अन्य विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध हों।

चमक देखकर नही, गुणवत्ता देखकर करें भरोसा..

चांदी के वर्क लगी मिठाइयों का भारतीय खानपान और उत्सवों में अपना अलग स्थान है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खाद्य श्रेणी के निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार वर्क और मिलावटी वर्क के बीच अंतर करना जरूरी है। चांदी के वर्क से विशेष स्वास्थ्य लाभ मिलने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं, वहीं अशुद्ध या मिलावटी वर्क स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

ऐसे में न तो चांदी के वर्क को बिना प्रमाण स्वास्थ्यवर्धक बताना उचित है और न ही हर चांदी के वर्क लगी मिठाई को नुकसानदायक मान लेना। उपभोक्ताओं के लिए सबसे बेहतर रास्ता है- विश्वसनीय स्रोत से मिठाई खरीदना, सीमित मात्रा में सेवन करना और खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक रहना।

मिठाई की असली मिठास उसकी गुणवत्ता, स्वच्छता और भरोसे में है। केवल चांदी जैसी चमक में नही।