खेत, स्कूल, अस्पताल और बाजार.. जहां थे लोग, वहीं थम गए कदम ; एक साथ गूंजा ‘वंदे मातरम्’..

लखराम में राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने पर पंचायत की अनूठी पहल, करीब 2000 ग्रामीणों ने अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर किया सामूहिक गायन ; एक समय, एक स्वर और पूरा गांव बना एक परिवार..

बिलासपुर। राष्ट्रभावना की अभिव्यक्ति के लिए जरूरी नहीं कि पूरा गांव एक ही मैदान में जुटे। अगर समय एक हो और मन में देश के प्रति सम्मान का भाव हो, तो अलग-अलग जगहों पर खड़े लोग भी एक साथ जुड़ सकते हैं। बिल्हा जनपद पंचायत के ग्राम लखराम में ग्राम पंचायत की एक अनूठी पहल ने इसी विचार को साकार किया। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गांव में ऐसी व्यवस्था बनाई गई, जिसमें खेतों में काम करने वाले किसान, स्कूलों में मौजूद विद्यार्थी, स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी, बैंककर्मी, व्यापारी और आम नागरिक जहां थे, वहीं खड़े होकर राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन में शामिल हुए। इस दौरान करीब 2000 ग्रामीणों की सहभागिता ने पूरे गांव को एक स्वर में बांध दिया।

एक जगह जुटने की जरूरत नही, पूरा गांव बना गायन का हिस्सा..

लखराम में इस आयोजन की खासियत केवल सामूहिक राष्ट्रगीत गायन नहीं, बल्कि उसे आयोजित करने का तरीका रहा। आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों में लोगों को किसी एक स्थान पर एकत्र किया जाता है, लेकिन ग्राम पंचायत ने इससे अलग व्यवस्था बनाई। गांव के हर हिस्से में मौजूद लोगों को एक ही समय पर राष्ट्रगीत से जोड़ने की योजना तैयार की गई। निर्धारित समय पर लाउडस्पीकर के माध्यम से ‘वंदे मातरम्’ का गायन शुरू हुआ और गांव में जहां जो मौजूद था, वह अपने स्थान पर खड़ा होकर इसमें शामिल हुआ।

इस पहल ने गांव के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद लोगों को एक साझा कार्यक्रम का हिस्सा बना दिया। किसी ने खेत में, किसी ने स्कूल परिसर में, तो किसी ने अपने कार्यस्थल पर खड़े होकर राष्ट्रगीत का गायन किया। अलग-अलग स्थानों पर मौजूद लोगों के बीच दूरी जरूर थी, लेकिन उस समय सभी की सहभागिता एक ही भाव से जुड़ी रही।

ग्रामसभा में निर्णय, फिर पूरे गांव में तैयारी..

इस पहल को जमीन पर उतारने के लिए ग्राम पंचायत ने पहले ग्रामसभा में निर्णय लिया। सरपंच श्रीमती रुकमणि साहू, सभी पंचों और ग्रामवासियों के सहयोग से इसकी तैयारियां की गईं। पंचायत ने गांव के विभिन्न हिस्सों का सर्वे कराया, ताकि निर्धारित समय पर राष्ट्रगीत के गायन की सूचना सभी तक पहुंचाई जा सके। इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर लाउडस्पीकर लगाए गए और सामूहिक गायन की व्यवस्था बनाई गई।

तैयारियां पूरी होने के बाद सरपंच रुकमणि साहू के नेतृत्व में इस पहल की शुरुआत की गई। निर्धारित समय पर जैसे ही ‘वंदे मातरम्’ का गायन शुरू हुआ, गांव के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद लोग अपने-अपने स्थान पर खड़े हो गए। इस तरह करीब 2000 ग्रामीणों ने एक साथ राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

किसान से कर्मचारी तक, हर वर्ग की भागीदारी..

इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय तस्वीर यह रही कि इसमें किसी एक वर्ग या समूह की नहीं, बल्कि गांव के विभिन्न वर्गों की भागीदारी दिखाई दी। खेतों में काम कर रहे किसान, स्कूलों के विद्यार्थी, स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी, बैंककर्मी, व्यापारी, पंचायत प्रतिनिधि और अन्य ग्रामीण एक ही समय पर राष्ट्रगीत के गायन में शामिल हुए।

आयोजन का उद्देश्य केवल एक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि राष्ट्रगीत के माध्यम से गांव में सामूहिक सहभागिता और एकजुटता की भावना को मजबूत करना रहा। गांव के लोगों को एक स्थान पर बुलाने के बजाय उन्हें उनके कार्यस्थल और आसपास के परिवेश में ही इस पहल से जोड़ना इसकी सबसे अलग विशेषता बनी।

राष्ट्र भावना के साथ सामुदायिक एकजुटता का संदेश..

लखराम की यह पहल बताती है कि गांव में सामूहिक गतिविधियों को प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप नए तरीके अपनाए जा सकते हैं। एक निश्चित समय, लाउडस्पीकर के जरिए सूचना और ग्रामीणों की सहभागिता से पंचायत ने पूरे गांव को एक साझा गतिविधि से जोड़ने का प्रयास किया।

राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुरू हुई यह पहल गांव में राष्ट्र भावना के साथ सामुदायिक एकजुटता का संदेश भी देती है। इस आयोजन में किसी एक स्थान पर भीड़ जुटाने के बजाय पूरे गांव की भागीदारी को महत्व दिया गया। लखराम में एक समय पर अलग-अलग जगहों से उठी एक ही स्वर की गूंज ने यह संदेश दिया कि एकजुटता के लिए एक जगह खड़ा होना जरूरी नहीं, बल्कि एक उद्देश्य और एक भावना से जुड़ना अधिक महत्वपूर्ण है।