
कानन पेंडारी में वन्यप्राणी सप्ताह के तीसरे दिन अनूठी पहल; कीपरों और कर्मचारियों ने साझा किए वन्यजीवों की देखभाल के अनुभव..

बिलासपुर, 4 अक्टूबर। वन्यजीवों को देखने के लिए लोग कानन पेंडारी पहुंचते हैं, लेकिन उनके पीछे दिन-रात काम करने वाले वन्यजीव कीपर और कर्मचारी अक्सर नजरों से दूर रहते हैं। वन्यप्राणी सप्ताह के तीसरे दिन कानन पेंडारी जूलॉजिकल गार्डन में इन्हीं वन्यजीव सेवकों को केंद्र में रखकर विशेष सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया। जंगल तक फाउंडेशन के स्वयंसेवकों ने वन्यजीवों की देखभाल, सुरक्षा और संरक्षण में जुटे कर्मचारियों का सम्मान कर उनके प्रति आभार जताया।

वन्यप्राणी सप्ताह के तहत 2 से 8 अक्टूबर तक कानन पेंडारी में जागरूकता और जनभागीदारी से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) प्रियंका पांडेय और कानन पेंडारी के संचालक गणेश यूआर के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान में वन्यजीव संरक्षण के साथ उन लोगों की भूमिका भी सामने लाई जा रही है, जो रोजाना वन्यजीवों की देखभाल में जुटे हैं।
भोजन से लेकर स्वास्थ्य और व्यवहार तक, हर दिन जिम्मेदारी..
सम्मान कार्यक्रम के दौरान कानन पेंडारी के वन्यजीव कीपरों और कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वन्यजीवों की देखभाल केवल भोजन और साफ-सफाई तक सीमित नहीं है। प्रत्येक वन्यजीव के स्वास्थ्य, उसके व्यवहार, खान-पान, सुरक्षा और दैनिक गतिविधियों पर लगातार नजर रखनी पड़ती है।
वन्यजीव अपने व्यवहार से कई संकेत देते हैं। ऐसे में कीपरों के लिए उन्हें समझना और समय पर बदलाव को पहचानना महत्वपूर्ण होता है। लंबे समय तक वन्यजीवों के साथ काम करने से विकसित हुई यह समझ उनके दैनिक कार्य का अहम हिस्सा है।
पर्दे के पीछे रहने वाले सेवकों को मिला सम्मान..
जंगल तक फाउंडेशन की पहल का उद्देश्य उन कर्मचारियों के योगदान को सामने लाना रहा, जो दर्शकों के बीच दिखाई दिए बिना वन्यजीवों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फाउंडेशन के स्वयंसेवकों ने कर्मचारियों और कीपरों का सम्मान कर उनके काम के प्रति आभार जताया।


फाउंडेशन के संस्थापक रोशन खामारी ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा और देखभाल के लिए कानन पेंडारी के अधिकारी, कर्मचारी और कीपर जिस समर्पण और संवेदनशीलता के साथ काम कर रहे हैं, वह प्रेरणादायी है।
पहले दो दिन विद्यार्थियों ने दिया संरक्षण का संदेश..
वन्यप्राणी सप्ताह के पहले दिन जवाहर नवोदय विद्यालय अमरकंटक के विद्यार्थियों ने जागरूकता और रचनात्मक कार्यक्रम प्रस्तुत किए थे। दूसरे दिन जवाहर नवोदय विद्यालय सक्ती के विद्यार्थियों ने निबंध लेखन और चित्रकला जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
इसके अलावा सप्ताह के दौरान कानन पेंडारी के विभिन्न वन्यजीव एनक्लोजर के सामने जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। यहां पहुंचने वाले लोगों को वन्यजीवों के व्यवहार, संरक्षण और पर्यावरण में उनकी भूमिका की जानकारी दी जा रही है।
8 अक्टूबर तक जारी रहेंगे कार्यक्रम..
वन्यप्राणी सप्ताह के तहत कानन पेंडारी और जंगल तक फाउंडेशन की संयुक्त गतिविधियां 8 अक्टूबर तक जारी रहेंगी। आने वाले दिनों में विद्यार्थियों की सहभागिता, जागरूकता कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अन्य रचनात्मक आयोजन किए जाएंगे।

तीसरे दिन के कार्यक्रम में कानन पेंडारी की रेंजर सुखबाई कंवर, डिप्टी रेंजर संतोष कुमार कांत सहित जंगल तक फाउंडेशन के स्वयंसेवक शुभम टंडन, अथर्व तिवारी, ऋषि मधेशिया, अक्षिका तिवारी, प्रिया शुक्ला और शिखा शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
संदेश यही रहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। जंगल और वन्यजीवों को बचाने में समाज की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।







