नवीनीकरण की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में 10 हजार की रिश्वत, निगम का क्लर्क ACB के हत्थे चढ़ा.. देखें वीडियो..

संपदा शाखा में एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई से मचा हड़कंप, शिकायत के सत्यापन के बाद बिछाया जाल..

बिलासपुर। नगर निगम की संपदा शाखा में संपत्ति के नवीनीकरण संबंधी काम के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। ACB की टीम ने शुक्रवार को नगर निगम के क्लर्क लक्ष्मीकांत कोका को 10 हजार रुपए की कथित रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। कार्रवाई के बाद निगम कार्यालय, खासकर संपदा शाखा में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

जानकारी के मुताबिक, राजकिशोर नगर निवासी अजीत शुक्ला अपनी संपत्ति से जुड़े नवीनीकरण के कार्य के लिए नगर निगम की संपदा शाखा में आवेदन और संबंधित प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पहुंच रहे थे। आरोप है कि उक्त कार्य को आगे बढ़ाने और प्रक्रिया पूरी करने के एवज में उनसे रिश्वत की मांग की गई। प्रार्थी के मुताबिक, काम के लिए उन्हें कई दिनों से निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे थे।

बताया जा रहा है कि मामले की शिकायत करीब तीन दिन पहले ACB तक पहुंची थी। शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो की टीम ने पहले आरोपों का सत्यापन किया। सत्यापन के बाद शिकायत सही पाए जाने पर ACB ने संबंधित कर्मचारी को रिश्वत लेते पकड़ने की योजना तैयार की।

शुक्रवार को संपदा शाखा में पहुंची टीम.. देखें वीडियो..

योजना के तहत शुक्रवार को ACB की टीम नगर निगम की संपदा शाखा पहुंची। यहां शिकायतकर्ता द्वारा 10 हजार रुपए दिए जाने के दौरान टीम ने क्लर्क लक्ष्मीकांत कोका को पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद ACB की टीम ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और मामले से जुड़े दस्तावेज व अन्य तथ्यों की जांच शुरू कर दी।

फाइल नवीनीकरण के काम से जुड़ा है मामला..

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पूरा मामला संपत्ति के नवीनीकरण संबंधी प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। हालांकि, रिश्वत की मांग किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के लिए की गई, इसे लेकर ACB की जांच जारी है। ब्यूरो द्वारा शिकायत, सत्यापन और कथित लेन-देन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

संपदा शाखा की कार्यप्रणाली पर भी उठेंगे सवाल..

नगर निगम की संपदा शाखा में ACB की इस कार्रवाई के बाद शाखा में होने वाले संपत्ति संबंधी कार्यों और फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ACB की जांच और आधिकारिक कार्रवाई पूरी होना जरूरी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।