बिल्हा का प्रयोग बना जिला मॉडल ; शिक्षक दिवस से रोज 5 से 10 मिनट सामान्य ज्ञान, करेंट अफेयर्स और तर्क-विचार की पाठशाला..


बिलासपुर, 5 सितंबर 2026। अब स्कूलों में बच्चों की सुबह केवल प्रार्थना और अनुशासन की पंक्तियों से नहीं, बल्कि एक नए सवाल, नई जानकारी और नई सीख के साथ शुरू होगी। विद्यार्थियों में सामान्य ज्ञान, समसामयिक घटनाओं की समझ, जिज्ञासा और प्रतियोगी सोच विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘ज्ञान सभा – दैनिक सामान्य ज्ञान श्रृंखला’ अब बिल्हा से निकलकर पूरे बिलासपुर जिले के स्कूलों तक पहुंच गई है। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर से जिले के चारों विकासखंडों के विद्यालयों में इस पहल को शुरू किया गया है।

इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसी अलग बजट या महंगे संसाधन की जरूरत नहीं है। बिल्हा विकासखंड में शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों ने अपने स्तर पर शुरू किया जीरो-बजट और नि:शुल्क प्रयोग अब जिला स्तरीय मॉडल बन गया है। 1 जुलाई से 31 अगस्त के बीच इस अभियान के तहत सामान्य ज्ञान की 50 कड़ियां तैयार और प्रसारित की जा चुकी हैं।
बिल्हा में शुरू हुआ प्रयोग, अब पूरे जिले की पहल..
बिल्हा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले, राज्य सेवा में चयनित शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों ने मिलकर बच्चों के स्तर के अनुसार सरल और रोचक सामग्री तैयार की। इसका उद्देश्य बच्चों पर अतिरिक्त पढ़ाई का बोझ डालना नहीं, बल्कि रोजमर्रा की पढ़ाई के बीच उन्हें देश-दुनिया से जोड़ना है।


अभियान का मूल मंत्र है – ‘बच्चे पढ़ें नहीं, बच्चे सीखें।’ इसके तहत रोज केवल 5 से 10 मिनट की गतिविधि के माध्यम से बच्चों को नई जानकारी से जोड़ा जाएगा। सवाल-जवाब, चर्चा और छोटे-छोटे अभ्यास के जरिए यह भी देखा जाएगा कि बच्चों ने कितना समझा और क्या नया सीखा।


इस पहल में प्रवीण दुबे, श्री राम द्विवेदी, श्रीमती लक्ष्मी, पोलेश्वर यादव, श्रीमती स्मृति, पीएससी से चयनित अतुल पटेल और सेवानिवृत्त वित्त अधिकारी सत्येंद्र शाह सहित शिक्षकों एवं विषय विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
व्हाट्सएप से स्कूल और फिर बच्चों तक पहुंचेगा ज्ञान..
‘ज्ञान सभा’ को लागू करने के लिए किसी नई व्यवस्था की जरूरत नहीं रखी गई है। विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार सामग्री व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से संकुल और विद्यालयों तक भेजी जाएगी। संस्था प्रमुख इसे स्कूल के सूचना पटल पर प्रदर्शित कराएंगे। प्रार्थना सभा में ‘आज की जानकारी’ और ‘आज का संदेश’ पढ़कर सुनाया जाएगा। इसके बाद कक्षा शिक्षक बच्चों से उसी विषय पर सवाल-जवाब और चर्चा करेंगे।
जहां सुविधा उपलब्ध होगी, वहां सामग्री का प्रिंट निकालकर लाइब्रेरी में भी सुरक्षित रखा जाएगा। इस तरह डिजिटल माध्यम से तैयार सामग्री का उपयोग स्कूल के भीतर नियमित सीखने की गतिविधि के रूप में किया जाएगा।
एक ही मंच पर बिलासपुर से विश्व तक की जानकारी..
‘ज्ञान सभा’ में बच्चों को केवल सामान्य ज्ञान के पारंपरिक प्रश्न नहीं पढ़ाए जाएंगे। इसमें महापुरुषों का जीवन, संस्कृति, तीज-त्योहार, खेल, विज्ञान, तकनीक, रक्षा, पर्यावरण, सामाजिक और आर्थिक विषयों के साथ बिलासपुर, छत्तीसगढ़, भारत और विश्व से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी। समसामयिक घटनाओं यानी करेंट अफेयर्स को भी इसका अहम हिस्सा बनाया गया है। इससे बच्चों को अपने आसपास की घटनाओं को समझने और उन्हें व्यापक संदर्भ में देखने का अवसर मिलेगा।
कलेक्टर की रुचि से मिला जिलेभर में विस्तार..
विद्यार्थियों में सामान्य ज्ञान और समसामयिक विषयों की समझ विकसित करने में जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल की रुचि के चलते बिल्हा के इस प्रयोग को जिले के चारों विकासखंडों में विस्तार दिया गया है। जिला स्तर पर सेवानिवृत्त प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी अजय कौशिक और वर्तमान प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती वर्षा दुबे के मार्गदर्शन में अभियान को स्कूलों तक पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।


बिल्हा के बीईओ भूपेंद्र कौशिक, कोटा के गोपाल दुबे, मस्तूरी के शिवराम टंडन और तखतपुर के दीपक गुप्ता ने अपने-अपने विकासखंड में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बिल्हा बीईओ को इस अभियान का जिला नोडल बनाया गया है।
शिक्षकों की टीम बनी अभियान की असली ताकत..
बिल्हा में इस पहल को जमीन पर उतारने में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती दीप्ति गुप्ता, श्रीमती सुनीता ध्रुव और मुकेश अग्रवाल, बीआरसी श्रीमती देवी चंद्राकर और वासुदेव पांडे तथा संकुल समन्वयकों अजय साहू, केशव वर्मा और सुनील पांडे सहित सभी संकुल समन्वयकों और संस्था प्रमुखों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

यही सामूहिक प्रयास अब जिले के दूसरे विकासखंडों में भी लागू किया जा रहा है। यानी ‘ज्ञान सभा’ किसी एक स्कूल या एक शिक्षक का कार्यक्रम न रहकर शिक्षकों की सामूहिक पहल के रूप में आगे बढ़ रही है।
निरीक्षण में भी देखी जाएगी ‘ज्ञान सभा’ की गतिविधि..
अभियान को केवल कागजों और व्हाट्सएप ग्रुप तक सीमित रखने के बजाय स्कूल स्तर पर इसकी नियमितता पर भी नजर रखी जाएगी। शाला निरीक्षण के दौरान ‘ज्ञान सभा’ की गतिविधियों का अवलोकन किया जाएगा। संकुल प्राचार्य और समन्वयक यह सुनिश्चित करेंगे कि सामग्री समय पर विद्यार्थियों तक पहुंचे और उसका कक्षा में उपयोग भी हो।
एसएमसी और पीटीएम की बैठकों के माध्यम से पालकों को भी अभियान से जोड़ने की योजना है। भविष्य में पंचायतों, नगरीय निकायों और विभिन्न विभागों के सहयोग से हैंडआउट, प्रिंटआउट और वॉल राइटिंग के माध्यम से इसे जनभागीदारी के अभियान में बदलने का प्रस्ताव है।
बिल्हा जनपद उपाध्यक्ष विक्रम सिंह ने अपने गृह ग्राम सेलर में समुदाय के सहयोग से दीवारों को शिक्षण सामग्री के माध्यम में बदलकर पहले ही इस दिशा में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
सवाल याद कराने से आगे, सवाल पूछना सिखाएगी ‘ज्ञान सभा’..
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका लक्ष्य बच्चों को केवल सामान्य ज्ञान के प्रश्न और उत्तर याद कराना नहीं है। उन्हें सवाल पूछने, तर्क करने, घटनाओं को समझने और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने के लिए तैयार करना इसका मूल उद्देश्य है।
आज प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं माना जाता। सामान्य ज्ञान, करेंट अफेयर्स, तार्किक समझ और आसपास की घटनाओं की जानकारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में स्कूल स्तर से ही बच्चों में इन आदतों को विकसित करने की कोशिश की जा रही है।
‘हर स्कूल पढ़ेगा, हर बच्चा आगे बढ़ेगा’..
बिल्हा से शुरू हुआ यह जीरो-बजट प्रयोग अब जिले के सैकड़ों स्कूलों तक पहुंचने की दिशा में है। इसमें न महंगे संसाधनों की जरूरत है और न ही बच्चों के लिए अलग से लंबी कक्षाओं की। केवल कुछ मिनट की नियमित गतिविधि के जरिए स्कूल के माहौल में ज्ञान और चर्चा को बढ़ावा देने की कोशिश है।

‘ज्ञान सभा’ का संकल्प साफ है – ‘हर स्कूल पढ़ेगा, हर बच्चा आगे बढ़ेगा।’ बिल्हा का यह प्रयोग यदि इसी तरह नियमित रूप से आगे बढ़ता है तो यह सरकारी स्कूलों में कम संसाधनों के बीच शिक्षकों की पहल, तकनीक के उपयोग और सामुदायिक सहभागिता से शिक्षा में नवाचार का एक उपयोगी मॉडल बन सकता है।







