वन मंत्री केदार कश्यप का कटघोरा वनमंडल दौरा, डोंगा नाला में वनौषधि केंद्र का निरीक्षण; हाथी मित्र दल को मोटरसाइकिल और जरूरी सामग्री सौंपी..

कटघोरा। कटघोरा वनमंडल में मानव-हाथी द्वंद्व की चुनौती से निपटने के साथ ही वन आधारित आजीविका और प्रकृति पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल देखने को मिली। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने गुरुवार को कटघोरा वनमंडल के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने डोंगा नाला स्थित वन धन वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र का निरीक्षण कर स्व-सहायता समूह की महिलाओं से उनके कामकाज और आय के साधनों की जानकारी ली। वहीं चोटिया के हाथी नियंत्रण केंद्र में हाथी मित्र दल के सदस्यों को मोटरसाइकिल और आवश्यक सामग्री प्रदान की। दौरे का समापन जल विहार बुका में पौधरोपण और नौका विहार के साथ हुआ, जहां बुका को प्रकृति आधारित पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
हाथी प्रभावित क्षेत्रों में अब तेज होगी निगरानी..
कटघोरा वनमंडल के केंदई वन परिक्षेत्र के चोटिया स्थित हाथी नियंत्रण केंद्र में हाथी मित्र दल को मोटरसाइकिल उपलब्ध कराना दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। वन क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही के बीच हाथी मित्र दल स्थानीय स्तर पर वन विभाग और ग्रामीणों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करता है।

मोटरसाइकिल मिलने से हाथी विचरण वाले इलाकों में दल के सदस्यों की आवाजाही आसान होगी। वे अधिक तेजी से प्रभावित गांवों तक पहुंच सकेंगे और हाथियों की मौजूदगी की सूचना ग्रामीणों तक समय पर पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीणों को सतर्क करने, हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं को कम करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
मंत्री ने हाथी नियंत्रण केंद्र की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था का भी जायजा लिया। उन्होंने हाथी मित्र दल के सदस्यों के काम की सराहना करते हुए कहा कि मानव-हाथी द्वंद्व जैसी चुनौती से निपटने में स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। स्थानीय युवाओं की भागीदारी से वन विभाग को जमीनी स्तर पर हाथियों की गतिविधियों की जानकारी तेजी से मिल सकती है।
वनौषधियों से आजीविका बढ़ाने पर जोर..
डोंगा नाला में वन धन वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र का निरीक्षण करते हुए वन मंत्री ने हरिबोल स्व-सहायता समूह की सदस्याओं से मुलाकात की। उन्होंने समूह द्वारा तैयार किए जा रहे आयुर्वेदिक और वनौषधि आधारित उत्पादों को देखा और महिलाओं से उनके काम, आमदनी तथा सामने आ रही परेशानियों के बारे में जानकारी ली।
समूह की सदस्याओं ने बताया कि उनके द्वारा तैयार किए जाने वाले आयुर्वेदिक औषधीय उत्पादों और अन्य सामग्री की आपूर्ति आयुष विभाग के अलावा निजी कंपनियों और फर्मों को भी की जाती है। समूह की ओर से उत्पादों का दायरा बढ़ाने और बाजार उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत भी बताई गई।

मंत्री ने समूह के काम की सराहना करते हुए आजीविका के इन साधनों को और मजबूत करने की दिशा में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर सकारात्मक चर्चा की। वन विभाग की ऐसी पहल से जंगल से मिलने वाले लघु वनोपज और औषधीय संसाधनों को स्थानीय स्तर पर प्रसंस्कृत कर ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार करने की संभावना बढ़ती है।
बुका में हरियाली के साथ पर्यटन की तस्वीर..
कटघोरा वनमंडल प्रवास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव जल विहार बुका रहा। यहां ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ अभियान के तहत वन मंत्री केदार कश्यप ने स्वर्गीय श्रीमती मनकी देवी कश्यप की स्मृति में पौधरोपण किया। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा और नियमित देखभाल भी उतनी ही जरूरी है।

उन्होंने आम लोगों से पर्यावरण संरक्षण के अभियान में भागीदारी की अपील की। कार्यक्रम में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और अन्य लोग भी मौजूद रहे।
नौका विहार के दौरान ईको-टूरिज्म पर मंथन..
पौधरोपण के बाद वन मंत्री और अधिकारियों ने बुका जलाशय में नौका विहार किया। इस दौरान जलाशय, आसपास के जंगल और प्राकृतिक वातावरण का अवलोकन करते हुए क्षेत्र में ईको-टूरिज्म की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

बुका का प्राकृतिक परिवेश पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। अधिकारियों ने क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विकास, प्रकृति संरक्षण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
वन मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग पर्यावरण के अनुकूल तरीके से करते हुए पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे एक ओर पर्यटकों को प्रकृति के करीब आने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा किए जा सकेंगे।
वन,वन्यजीव और रोजगार को जोड़ने की कोशिश..
कटघोरा वनमंडल के इस दौरे में वन संरक्षण के साथ तीन प्रमुख मुद्दे सामने आए – वन्यजीवों की सुरक्षा, जंगल पर निर्भर समुदायों की आजीविका और प्रकृति आधारित पर्यटन। हाथी मित्र दल को संसाधन उपलब्ध कराने से जहां मानव-हाथी द्वंद्व से निपटने की जमीनी व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश है, वहीं वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र ग्रामीण महिलाओं को वन आधारित रोजगार से जोड़ रहा है। दूसरी ओर बुका में ईको-टूरिज्म की संभावनाओं का आकलन स्थानीय अर्थव्यवस्था को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, वनमंडलाधिकारी कटघोरा जितेंद्र कुमार उपाध्याय सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।







