सरकारी भवन बना तस्करों का ‘सेफ हाउस’, 7 किलो जिंदा पेंगोलिन के साथ 3 अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार..

छत्तीसगढ़-ओडिशा की संयुक्त कार्रवाई में खुलासा, 9 अगस्त से पेंगोलिन को छिपाकर रखा था ; खरीददार की तलाश में थे आरोपी..

गरियाबंद। वन्यजीव तस्करी के खिलाफ छत्तीसगढ़ और ओडिशा वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग टीम और ओडिशा के खरियार वनमंडल की संयुक्त टीम ने नुआपाड़ा जिले के ग्राम पालमा में दबिश देकर 7 किलोग्राम वजन के एक जिंदा पेंगोलिन को बरामद किया है। तस्करों ने पेंगोलिन को छिपाकर रखने के लिए सिंचाई योजना से जुड़े एक शासकीय भवन के स्टार्टर रूम को ही कथित तौर पर ‘सेफ हाउस’ बना रखा था। मामले में तीन अंतरराज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

जानकारी के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और ओडिशा के सोनाबेड़ा क्षेत्र के बीच वन्यजीव कॉरिडोर को सुरक्षित रखने के लिए दोनों राज्यों की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। इसी दौरान एंटी पोचिंग टीम को गोपनीय सूचना मिली कि कुछ शिकारी एक जिंदा पेंगोलिन को पकड़कर उसे बेचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक वरुण जैन और खरियार वनमंडल के वनमंडलाधिकारी अजीज खान के नेतृत्व में संयुक्त टीम गठित की गई।

स्टार्टर रूम में छिपाकर रखा था पेंगोलिन..

संयुक्त टीम ने ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के खरियार वनमंडल अंतर्गत ग्राम पालमा में कार्रवाई की। जांच के दौरान सिंचाई योजना से जुड़े एक शासकीय भवन पर टीम को संदेह हुआ। यह भवन इनटेक वेल में लगी मोटर पंप के स्टार्टर के लिए उपयोग किया जाता था। तलाशी के दौरान इसी भवन के भीतर एक जिंदा पेंगोलिन बरामद हुआ। वन विभाग के अनुसार तस्करों ने उसे बाहरी लोगों की नजर से बचाने के लिए यहां छिपाकर रखा था।

प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि पेंगोलिन को 9 अगस्त से पकड़कर रखा गया था और आरोपी उसे बेचने के लिए संभावित खरीददार की तलाश कर रहे थे। कार्रवाई के बाद पेंगोलिन को खरियार रोड स्थित पशु चिकित्सक की निगरानी में सुरक्षित रखा गया।

छत्तीसगढ़ से भी जुड़ा तस्करी नेटवर्क..

पूछताछ और आरोपियों की निशानदेही के आधार पर संयुक्त टीम ने छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में भी कार्रवाई की। टीम ने पिटापारा निवासी रोशन ठाकुर को उसके घर से गिरफ्तार किया। इसके बाद आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर दो अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया गया। वन विभाग ने मामले में कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोशन ठाकुर (31), निवासी पिटापारा, थाना देवभोग, जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ़), बालकृष्णा हाती (30) और सोनू हाती (40), दोनों निवासी ग्राम पालमा, थाना खरियार, जिला नुआपाड़ा (ओडिशा) के रूप में हुई है। तीनों को खरियार न्यायालय में पेश किया गया, जहां न्यायालय के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

मुख्य शिकारी और बिचौलियों की तलाश जारी..

वन विभाग के अनुसार इस मामले में मुख्य शिकारी और कुछ बिचौलियों के अभी फरार होने की जानकारी सामने आई है। उनकी तलाश में टीमों द्वारा लगातार दबिश दी जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि पेंगोलिन को पकड़ने के बाद उसे अंतरराज्यीय नेटवर्क के माध्यम से बेचने की तैयारी की जा रही थी। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

वन्यजीव कॉरिडोर पर बढ़ाई निगरानी..

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और ओडिशा के सोनाबेड़ा क्षेत्र के बीच का इलाका वन्यजीवों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। वन विभाग द्वारा इस क्षेत्र में अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी रोकने के लिए लगातार संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में दोनों राज्यों की टीमों के बीच बेहतर समन्वय से वन्यजीव अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई संभव हो रही है।

यह कार्रवाई वन मंत्री केदार कश्यप, प्रधान मुख्य वन संरक्षक ओम प्रकाश यादव तथा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक गुरूनाथन एन. के वन्यजीव सुरक्षा संबंधी निर्देशों के तहत की गई। कार्रवाई में परिक्षेत्र अधिकारी सुशील कुमार सागर, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग टीम तथा खरियार वनमंडल के सीनापाली और खरियार रेंज के अधिकारी-कर्मचारी एवं सुरक्षा श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

ओडिशा के खरियार रेंज ने मामले में ओ.आर. नंबर 145, दिनांक 20 अगस्त 2026 दर्ज कर वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है। बरामद पेंगोलिन को सुरक्षित रखा गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया के साथ उसके स्वास्थ्य एवं पुनर्वास की दिशा में वन विभाग द्वारा आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।