1.13 करोड़ की ठगी की जांच में खुला 100 से ज्यादा शिकार का राज, रिसॉर्ट में चल रहा था ‘ब्लैक करेंसी’ का खेल..

रायपुर पुलिस ने पुणे के खंडाला में दबोचा अंतरराज्यीय गिरोह, 4 करोड़ से ज्यादा नकद और ठगी का पूरा सामान बरामद..

रायपुर। राजधानी रायपुर में हुई 1.13 करोड़ रुपये की ठगी की जांच करते-करते पुलिस एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह तक पहुंच गई, जो पिछले करीब दो दशक से लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा था। गिरोह के सदस्य लोगों को कम समय में रकम दोगुनी करने और काले कागज जैसे दिखने वाले नोटों को केमिकल के जरिए असली भारतीय मुद्रा में बदलने का झांसा देते थे। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में दबिश देकर गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 4 करोड़ रुपये से अधिक नकद, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार के काले पेपर, कांच की प्लेटें, दस्तावेज और ठगी में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद की है।

पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया है कि गिरोह देश के कई राज्यों में 100 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुका है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत रायपुर में दर्ज 1.13 करोड़ रुपये की ठगी के मामले से हुई, लेकिन डिजिटल साक्ष्यों की जांच ने पुलिस को नागपुर से होते हुए पुणे तक पहुंचा दिया।

नागपुर से मिला सुराग, मोबाइल चैट ने खोला पूरा नेटवर्क..

मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र के अपराध क्रमांक 330/2026 से जुड़ा है। जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले नागपुर से कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय और दीपिका पॉलीवाल को गिरफ्तार किया था। दोनों के कब्जे से मोबाइल फोन, नकदी, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड समेत अन्य सामग्री बरामद हुई।

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन में मौजूद चैट, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच की। इसी दौरान पुलिस को गिरोह के दूसरे सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। जांच में उनकी लोकेशन पुणे की सामने आई। इसके बाद रायपुर से पुलिस टीम पुणे रवाना हुई।

एक सप्ताह तक निगरानी, फिर रिसॉर्ट में दबिश..

पुणे पहुंचने के बाद पुलिस टीम ने संदिग्धों की गतिविधियों पर करीब एक सप्ताह तक नजर रखी। इसी दौरान पता चला कि खंडाला के एक रिसॉर्ट में गिरोह के सदस्य ठगी का नया सौदा करने वाले हैं।

पुलिस ने मौके पर दबिश दी तो वहां एक वाराणसी निवासी व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का लालच देकर ठगी की जा रही थी। पुलिस के अनुसार पीड़ित करोड़ों रुपये लेकर रिसॉर्ट पहुंचा था और आरोपियों के झांसे में आकर रकम सौंप चुका था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया।

काले कागज को ‘करेंसी’ बताकर बनाया जाता था भरोसा..

गिरोह का ठगी करने का तरीका बेहद सुनियोजित था। आरोपी खुद को बड़े प्रभावशाली लोगों, विदेशी निवेशकों और बड़े कारोबारी नेटवर्क से जुड़ा बताते थे। इसके बाद पीड़ित को विदेशी फंड, निवेश, सुरक्षा अनुमति और विशेष केमिकल जैसी कहानियों में उलझाया जाता था।

पीड़ित को किसी बड़े होटल या रिसॉर्ट में बुलाया जाता। वहां काले रंग से ढके नोटों को विशेष केमिकल की मदद से असली भारतीय नोट में बदलने का कथित प्रदर्शन किया जाता था। इस नकली प्रदर्शन से पीड़ित को भरोसा हो जाता कि उसके सामने वास्तव में काले नोट को असली करेंसी में बदला जा सकता है।

इसके बाद केमिकल, विदेशी टेस्टिंग, अधिकारियों की अनुमति, फंड रिलीज और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर उससे लगातार रकम मांगी जाती थी। धीरे-धीरे पीड़ित लाखों से करोड़ों रुपये तक गंवा देता था।

पुलिस ने इस तरीके को ‘Wash & Wash/Black Currency Scam’ बताया है।

‘डी ग्रुप’ का नाम लेकर बनाते थे रौब..

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी खुद को ‘डी ग्रुप कंपनी’ यानी ‘दाऊद ग्रुप’ से जुड़ा बताते थे। गिरोह में हर सदस्य की अलग भूमिका तय थी। कुछ सदस्यों को ‘कैप्टन’, जबकि कुछ को ‘बड़े सर’ जैसे नामों से बुलाया जाता था।

पीड़ितों पर प्रभाव जमाने के लिए आरोपी बड़े नेताओं और फिल्मी कलाकारों के साथ अपनी तस्वीरें दिखाते थे। पुलिस के मुताबिक गिरोह के प्रमुख सदस्यों के साथ निजी गनमैन भी रहते थे। इससे पीड़ितों के बीच आरोपियों का रौब और प्रभाव बढ़ता था।

गिरोह के सदस्य पीड़ितों को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, हरियाणा, आगरा, राजस्थान, गुजरात और नागपुर समेत अलग-अलग शहरों के बड़े होटलों में बुलाते थे। हर जगह ठगी का तरीका लगभग एक जैसा रहता था।

ठगी की रकम का प्रतिशत के हिसाब से होता था बंटवारा..

पुलिस के अनुसार गिरोह में ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी और मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर की अहम भूमिका सामने आई है। प्रवीण को गिरोह में ‘कैप्टन’ और मनोज को ‘बड़े सर’ कहा जाता था।

ठगी से हासिल रकम को गिरोह के सदस्यों के बीच तय प्रतिशत के आधार पर बांटा जाता था। पुलिस के अनुसार प्रवीण कुमार और मनोज कुमार पहले भी ठगी के मामलों में जेल जा चुके हैं।

अब तक 9 गिरफ्तार, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच..

रायपुर पुलिस इस मामले में अब तक कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें नागपुर से पकड़ी गई दो महिला आरोपी और पुणे से गिरफ्तार किए गए सात आरोपी शामिल हैं। गिरोह से जुड़े कुछ अन्य संदिग्धों के फरार होने की जानकारी सामने आई है, जिनकी तलाश की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपी..

ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, 46 वर्ष, गुड़गांव, हरियाणा; हाल मुकाम नालासोपारा, मुंबई।

प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी, 52 वर्ष, वाराणसी, उत्तर प्रदेश।

मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर, 55 वर्ष, वाराणसी, उत्तर प्रदेश।

विवेक सिंह, 48 वर्ष, वाराणसी, उत्तर प्रदेश।

शुभम पांडेय, 37 वर्ष, जौनपुर, उत्तर प्रदेश; हाल मुकाम मुंबई।

योगेन्द्र चौहान, 48 वर्ष, जौनपुर, उत्तर प्रदेश।

बालमुकुंद दीक्षित, 40 वर्ष, जौनपुर, उत्तर प्रदेश।

पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के साथ उनके मोबाइल फोन, बैंकिंग लेन-देन, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि गिरोह ने देश के अलग-अलग राज्यों में कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया और अब तक कितनी रकम की ठगी की जा चुकी है।

करोड़ों की बरामदगी से जांच को मिला बड़ा आधार..

पुलिस की कार्रवाई में 4 करोड़ रुपये से अधिक नकद की बरामदगी इस पूरे नेटवर्क की बड़ी तस्वीर सामने आने का संकेत है। इसके अलावा 17 मोबाइल फोन, काले कागज से बने नोट जैसे बंडल, कांच की प्लेटें और अन्य सामग्री भी मिली है। इन्हीं सामानों के जरिए आरोपी पीड़ितों के सामने ‘ब्लैक करेंसी’ को असली नोट में बदलने का झूठा प्रदर्शन करते थे।

रायपुर की 1.13 करोड़ रुपये की ठगी से शुरू हुई जांच अब देश के कई राज्यों तक फैले नेटवर्क तक पहुंच चुकी है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद इस गिरोह से जुड़े ठगी के कई अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है।