मोटरसाइकिल समेत नदी में गिरे युवकों को लकड़ी के सहारे निकाला बाहर, एसएसपी रजनेश सिंह ने प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित..

बिलासपुर। संकट की घड़ी में बिना अपनी जान की परवाह किए दूसरों की जिंदगी बचाने वाले तीन युवकों ने मानवता और साहस की मिसाल पेश की है। मस्तूरी थाना क्षेत्र की चौकी मल्हार अंतर्गत मनाडेरा रोड पर स्थित लीलगार नदी में मोटरसाइकिल समेत गिरे दो युवकों की जान बचाने के लिए मनाडेरा निवासी मोहन लाल केवट, महेश केवट और आदित्य केवट उर्फ करण तत्काल नदी में उतर गए। तेज बहाव के बीच तीनों ने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए लकड़ी की मदद से दोनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस साहसिक कार्य के लिए बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने तीनों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
तेज बहाव में फंसी जिंदगी, मदद के लिए दौड़े तीन युवक..
घटना 20 अगस्त की बताई जा रही है। जांजगीर-चांपा और मल्हार के बीच मनाडेरा रोड पर लीलगार नदी पार करते समय चकरबेड़ा निवासी गुड़ा टंडन और दुर्गेश टंडन नदी में मोटरसाइकिल समेत गिर गए। नदी में पानी का बहाव तेज होने के कारण दोनों युवक मुश्किल में फंस गए।
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घटना की जानकारी मिलते ही आसपास मौजूद मोहन लाल केवट, महेश केवट और आदित्य केवट उर्फ करण ने बिना देर किए मदद के लिए कदम बढ़ाया। स्थिति बेहद जोखिम भरी होने के बावजूद तीनों ने हिम्मत नहीं हारी और नदी में फंसे युवकों तक पहुंचने का प्रयास किया।
लकड़ी के सहारे दोनों को सुरक्षित निकाला..
तीनों युवकों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए लकड़ी की सहायता ली और नदी में फंसे दोनों युवकों को पकड़कर सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। समय रहते की गई इस मदद से दोनों की जान बच गई। घटना के बाद क्षेत्र में तीनों युवकों के साहस और तत्परता की जमकर सराहना हो रही है।
एसएसपी ने कहा – ऐसे साहस को सम्मान मिलना जरूरी..
मोहन लाल केवट, महेश केवट और आदित्य केवट उर्फ करण के इस साहसिक कार्य को पुलिस विभाग ने भी सराहा। एसएसपी रजनेश सिंह ने तीनों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान उनके साहस, तत्परता और मानवतापूर्ण कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा गया कि संकट की घड़ी में जरूरतमंद की सहायता के लिए आगे आना समाज में जिम्मेदारी और मानवता की भावना को मजबूत करता है।
अब ‘जल मितान’ के रूप में तैयार होंगे ऐसे मददगार..
पुलिस विभाग ने इस घटना से एक महत्वपूर्ण पहल की दिशा भी तय की है। ऐसे साहसी और स्थानीय युवकों को एसडीआरएफ की टीम के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिलाकर ‘जल मितान’ के रूप में तैयार किया जाएगा। उन्हें आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों में किसी व्यक्ति के संकट में फंसने पर समय रहते मदद पहुंचाई जा सके।
लीलगार नदी में तीन युवकों द्वारा दिखाई गई तत्परता अब केवल दो जिंदगियां बचाने की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर आपदा के समय प्रशिक्षित नागरिकों की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बन गई है। तीनों युवकों का साहस निश्चित रूप से अन्य लोगों को भी विपरीत परिस्थितियों में जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आने की प्रेरणा देगा।







