छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग..

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में गुरुवार को परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए। बीएससी सेकेंड ईयर के एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) विषय की परीक्षा सुबह 10 बजे शुरू होनी थी, लेकिन इससे करीब दो घंटे पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और विभिन्न WhatsApp ग्रुप्स में वायरल होने की खबर सामने आ गई। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के कथित तौर पर वायरल होने की जानकारी मिलते ही विद्यार्थियों में नाराजगी फैल गई और विश्वविद्यालय प्रशासन में भी हड़कंप मच गया।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में हुई कथित चूक पर सवाल उठाए। विद्यार्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर पहुंच गया था, तो यह विश्वविद्यालय की गोपनीय और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। छात्रों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ ही जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
परीक्षा से पहले वायरल होने का दावा..
जानकारी के मुताबिक 20 अगस्त को बीएससी सेकेंड ईयर के एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा निर्धारित थी। परीक्षा सुबह 10 बजे से आयोजित होनी थी। इसी बीच सुबह करीब 8 बजे प्रश्नपत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई। देखते ही देखते यह मामला छात्रों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

हालांकि, वायरल हुआ प्रश्नपत्र वास्तव में परीक्षा का मूल प्रश्नपत्र था या नहीं और वह परीक्षा शुरू होने से पहले किस माध्यम से बाहर आया, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यही वजह है कि पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
छात्रों ने सौंपा ज्ञापन..
घटना से नाराज छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच की मांग की। विद्यार्थियों ने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता और विद्यार्थियों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। यदि प्रश्नपत्र वास्तव में परीक्षा से पहले लीक हुआ है तो इसके पीछे जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
छात्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं का सीधा असर मेहनत से परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों पर पड़ता है। ऐसे मामलों से न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि विद्यार्थियों के बीच भी असमानता की स्थिति पैदा होने की आशंका रहती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुरू की जांच..
मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन सक्रिय हो गया है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रश्नपत्र की गोपनीयता किस स्तर पर भंग हुई और वायरल प्रश्नपत्र का स्रोत क्या है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि प्रश्नपत्र तैयार करने, सुरक्षित रखने और परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।
प्रशासन इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि प्रश्नपत्र विश्वविद्यालय से जुड़े किसी व्यक्ति के माध्यम से बाहर आया या किसी अन्य माध्यम से सोशल मीडिया तक पहुंचा। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं पेपर लीक के दावे..
छत्तीसगढ़ में परीक्षा प्रश्नपत्र वायरल होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2026 में 12वीं बोर्ड परीक्षा के हिंदी विषय के प्रश्नपत्र को लेकर भी सोशल मीडिया पर पेपर लीक होने के दावे किए गए थे। 14 मार्च को हिंदी विषय की परीक्षा आयोजित हुई थी और परीक्षा के बाद 15 मार्च को सोशल मीडिया पर कुछ छात्र संगठनों की ओर से प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी प्रसारित की गई थी। मामले में माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव की ओर से सिविल लाइंस और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
परीक्षा व्यवस्था की गोपनीयता पर फिर उठे सवाल..
IGKV में सामने आए ताजा मामले ने एक बार फिर परीक्षा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर बहस छेड़ दी है। देशभर में प्रतियोगी और शैक्षणिक परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बावजूद यदि परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया तक पहुंचने की पुष्टि होती है, तो यह परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में गंभीर चूक मानी जाएगी।
फिलहाल छात्रों की निगाह विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच पर टिकी हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वायरल हुआ प्रश्नपत्र असली था या नहीं और यदि वह वास्तविक प्रश्नपत्र था तो परीक्षा से पहले वह सोशल मीडिया तक कैसे पहुंचा। जांच के निष्कर्ष से ही इन सवालों का जवाब मिल सकेगा।
डिस्क्लेमर:
इस खबर में प्रश्नपत्र के परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों और सामने आई खबरों की जानकारी के आधार पर दी गई है। प्रश्नपत्र वास्तविक रूप से लीक हुआ था या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति या संस्था को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।







