अब साइबर ठगों से आजादी की मुहिम : सेल्फी से घर-घर पहुंचेगा जागरूकता का संदेश..

15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलेगा ‘साइबर जागृति अभियान’, बिलासपुर में आईजी रामगोपाल गर्ग और एसएसपी रजनेश सिंह ने QR कोड स्कैन कर की शुरुआत..

बिलासपुर। देश को अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिलने के 79 साल बाद अब छत्तीसगढ़ पुलिस ने डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर अपराध के खिलाफ एक नई तरह की मुहिम छेड़ी है। स्वतंत्रता दिवस से गांधी जयंती तक प्रदेशभर में ‘साइबर जागृति अभियान’ चलाया जाएगा। इस अभियान का सबसे खास पहलू यह है कि पुलिस के साथ आम जनता भी इसकी कड़ी बनेगी। ‘साइबर जागृति की एक सेल्फी’ थीम के तहत लोग QR कोड स्कैन कर जागरूकता संदेश वाली सेल्फी लेंगे और उसे सोशल मीडिया पर शेयर करेंगे। इस तरह एक व्यक्ति की सेल्फी से उसके परिवार, दोस्तों और सोशल मीडिया फॉलोअर्स तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचेगा।

15 अगस्त से शुरू होने वाला यह अभियान 2 अक्टूबर 2026 तक सात सप्ताह चलेगा। इसका उद्देश्य केवल साइबर अपराध की जानकारी देना नहीं, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों को उनकी जरूरत के हिसाब से साइबर ठगी से बचाव के प्रति जागरूक करना है। स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों से लेकर बैंक ग्राहक, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, युवा, ग्रामीण और शहरी नागरिकों तक अभियान का दायरा रखा गया है।

बिलासपुर में आईजी-एसएसपी ने खुद ली ‘साइबर जागृति की सेल्फी’..

राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री और गृह मंत्री द्वारा अभियान के शुभारंभ के बाद बिलासपुर में भी इसकी शुरुआत की गई। पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग और उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान अभियान की जानकारी दी। आईजी ने अभियान का लिंक और QR कोड जारी किया। दोनों अधिकारियों ने स्वयं अपने मोबाइल से QR कोड स्कैन कर जागरूकता संदेश वाली सेल्फी ली और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अभियान में लोगों की भागीदारी का संदेश दिया।

आईजी रामगोपाल गर्ग ने कहा कि देश की आजादी के लिए जिस तरह करोड़ों देशवासी एकजुट हुए थे, उसी भावना के साथ साइबर अपराध के खिलाफ भी समाज को एकजुट होना होगा। उन्होंने लोगों से अभियान की सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर शेयर करने और साइबर अपराध रोकने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की।

सेल्फी बनेगी साइबर सुरक्षा का डिजिटल पोस्टर..

पुलिस ने अभियान को सोशल मीडिया से जोड़ते हुए इसे जनभागीदारी का स्वरूप दिया है। छत्तीसगढ़ पुलिस और जिला पुलिस के सोशल मीडिया हैंडल पर जारी लिंक या QR कोड के माध्यम से लोग जागरूकता वाली सेल्फी फ्रेम तक पहुंच सकेंगे। सेल्फी लेकर उसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करने से साइबर सुरक्षा का संदेश बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचेगा।

पुलिस का मानना है कि आज सोशल मीडिया आम लोगों तक तेजी से पहुंचने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसलिए जागरूकता के पारंपरिक तरीकों के साथ डिजिटल माध्यम को जोड़कर अभियान को ज्यादा प्रभावी बनाया गया है।

सात सप्ताह में सात मुद्दों पर फोकस..

एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि बिलासपुर पुलिस ने अभियान के लिए सात सप्ताह का विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया है। हर सप्ताह अलग वर्ग और अलग साइबर खतरे को केंद्र में रखकर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पहला सप्ताह : स्कूल-कॉलेजों में डिजिटल सतर्कता और मोबाइल एवं इंटरनेट की बुनियादी सुरक्षा की जानकारी दी जाएगी।

दूसरा सप्ताह : बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों के सहयोग से वित्तीय धोखाधड़ी और UPI से जुड़े फ्रॉड से बचाव के तरीके बताए जाएंगे।

तीसरा सप्ताह : वरिष्ठ नागरिकों के लिए टाउन हॉल आयोजित कर डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कॉल के प्रति जागरूक किया जाएगा।

चौथा सप्ताह : महिला कॉलेजों और सामुदायिक समूहों के बीच स्मार्टफोन प्राइवेसी और सुरक्षित इंटरनेट ब्राउजिंग को लेकर अभियान चलाया जाएगा।

पांचवां सप्ताह : युवाओं को नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी और फिशिंग से बचाने रोजगार कार्यालयों, आईटीआई तथा कौशल विकास केंद्रों में कार्यक्रम होंगे।

छठा सप्ताह : डेटा प्राइवेसी और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

सातवां सप्ताह : ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में गांधी जयंती के अवसर पर ‘साइबर मुक्त छत्तीसगढ़’ बनाने का संकल्प दिलाया जाएगा।

चौक-चौराहों से लेकर FM रेडियो तक चलेगा प्रचार..

अभियान के दौरान जिला पुलिस की टीमें और स्थानीय थाने सार्वजनिक स्थानों, चौक-चौराहों, पार्कों और बाजारों में पोस्टर-बैनर के माध्यम से QR कोड का प्रचार करेंगी। पुलिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अलावा व्हाट्सऐप ग्रुप, FM रेडियो और आकाशवाणी के माध्यम से भी लोगों को अभियान से जोड़ा जाएगा।

पुलिस का प्रयास है कि साइबर अपराध के नए-नए तरीकों की जानकारी लोगों तक समय रहते पहुंचे। खासकर डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, UPI फ्रॉड, फिशिंग, नौकरी के नाम पर ठगी और सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों से बचाव के उपायों को अभियान में प्रमुखता दी जाएगी।

व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और इंफ्लुएंसर्स से भी जुड़ने की अपील..

पुलिस ने सामाजिक एवं व्यापारिक संगठनों, संस्थानों के पदाधिकारियों, गणमान्य नागरिकों, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स, प्रोफेशनल्स और कलाकारों से अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध किसी एक वर्ग की समस्या नहीं है। इसलिए इससे बचाव के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।

2 अक्टूबर को होगा अभियान का समापन..

सात सप्ताह तक चलने वाले ‘साइबर जागृति अभियान’ का समापन 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन किया जाएगा। अंतिम चरण में ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में साइबर अपराध से मुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ बनाने का संकल्प लिया जाएगा।

इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) पंकज कुमार पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मधुलिका सिंह, उप पुलिस अधीक्षक (पुलिस लाइन) मंजूलता केरकेट्टा सहित अन्य पुलिस अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों और एनजीओ से जुड़े लोग भी उपस्थित रहे।

पुलिस का संदेश..

साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जागरूक रहें, सतर्क रहें और साइबर ठगी से बचने के लिए दूसरों को भी जागरूक करें।