बिलासपुर जिले के तारबाहर थाना इलाके में हुए म्यूल बैंक खाता मामले में पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। कमीशन का लालच देकर आम लोगों के बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के दो फरार आरोपियों को पुलिस ने रायपुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस इस मामले में पहले ही चार आरोपियों को पकड़ कर जेल भेज चुकी है। अब दो और आरोपियों के पकड़े जाने से इस नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई से साइबर अपराधियों में हड़कंप मच गया है।

पकड़े गए आरोपियों के नाम अमीर उर्फ अमीरुद्दीन और मोहम्मद अल्मास गाजी हैं। अमीर के पिता का नाम वकील अहमद है और उसकी उम्र 29 वर्ष है। वह सतीश किराना दुकान के पास मौदहापारा रायपुर का रहने वाला है। वहीं दूसरा आरोपी मोहम्मद अल्मास गाजी 24 साल का है और उसके पिता का नाम मोहम्मद परवेज गाजी है। वह जेठा बाड़ी वृंदावन कॉम्प्लेक्स मौदहापारा रायपुर का निवासी है। इन दोनों के पास से पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि ये आरोपी कमीशन के लिए म्यूल बैंक खाते साइबर ठगों को देते थे।इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से मिली रकम को मंगाने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। पूरा मामला 13 मई 2026 को सामने आया था। उस दिन मुखबिर से पुलिस को सूचना मिली थी कि व्यापार विहार स्थित स्टेट बैंक के पास एक व्यक्ति बैंक आने जाने वाले लोगों को रोककर कमीशन का प्रलोभन दे रहा है। वह लोगों से ठगी के लिए उनके बैंक खाते मांग रहा था।
सूचना मिलते ही बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर पंकज कुमार पटेल और नगर पुलिस अधीक्षक सिटी कोतवाली गगन कुमार के मार्गदर्शन में तारबाहर थाना प्रभारी निरीक्षक रविन्द्र अनंत की टीम ने जांच शुरू की। शुरुआत में पुलिस ने दीपेश कुमार गुप्ता नवनीत मिश्रा ऋषभ साहू और राजा घरानी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा था।
इन चार आरोपियों के पकड़े जाने के बाद से पुलिस बाकी फरार आरोपियों की लगातार तलाश कर रही थी। विवेचना के दौरान साइबर सेल से मिले तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन विश्लेषण के आधार पर पता चला कि दोनों फरार आरोपी रायपुर में छिपे हुए हैं। इसके बाद तारबाहर पुलिस की एक टीम तुरंत रायपुर रवाना हुई। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दोनों को हिरासत में लिया।
पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य एकत्र कर दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि साइबर धोखाधड़ी करने वाले अन्य लोगों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जा सके।







