

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़क हादसों के मामलों में लापरवाही करने वाली बीमा कंपनियों को बड़ा झटका दिया है। अक्सर दुर्घटना के बाद बीमा कंपनियां क्लेम देने से बचने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाती हैं। ऐसे ही एक मामले में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को हाईकोर्ट से करारा झटका लगा है। कोर्ट ने न सिर्फ कंपनी की अपील खारिज की बल्कि मृतक के परिवार का मुआवजा भी साढ़े दस लाख से बढ़ाकर 14 लाख 72 हजार रुपये कर दिया है। इसके साथ ही साढ़े सात प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।

यह पूरा मामला जशपुर जिले के बगीचा थाना इलाके के फुलडीह गांव का है। यहां एक दुखद सड़क हादसे में देवेंद्र कुमार नाम के युवक की मौत हो गई थी। परिवार में कमाने वाले वह अकेले थे। उनके निधन के बाद पत्नी अनीता दस साल के बेटे प्रेमकुमार और तीन साल की बेटी मोनिका के सामने रोजीरोटी का भारी संकट खड़ा हो गया। छोटे बच्चों की पढ़ाई और परवरिश का पूरा बोझ अकेली मां पर आ गया।
इस मामले में जशपुर के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 17 अक्टूबर 2017 को पीड़ित परिवार के हक में फैसला सुनाया था। ट्रिब्यूनल ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया था कि वह मृतक के परिवार को साढ़े दस लाख रुपये का मुआवजा दे। यह रकम परिवार के गुजारे के लिए तय की गई थी।
लेकिन पीड़ित परिवार को तुरंत राहत देने की बजाय बीमा कंपनी ने इस फैसले को बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। कंपनी के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि मृतक ने गाड़ी मालिक से वाहन उधार लिया था। उनका तर्क था कि गाड़ी चलाते वक्त इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन हुआ है। इस आधार पर उन्होंने कहा कि कंपनी क्षतिपूर्ति देने के लिए बिल्कुल जिम्मेदार नहीं है।
वहीं दूसरी तरफ पीड़ित परिवार के वकील ने कोर्ट के सामने जमीनी हकीकत रखी। उन्होंने गुहार लगाई कि ट्रिब्यूनल ने जो मुआवजा तय किया है वह आज के समय में बहुत कम है। महंगाई और दो छोटे बच्चों के भविष्य को देखते हुए इस राशि को बढ़ाया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट में जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंच ने इस मामले की विस्तार से सुनवाई की। जज ने बीमा कंपनी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि कंपनी ने नियमों के उल्लंघन की बात तो कह दी लेकिन इसे साबित करने के लिए कोर्ट के सामने कोई भी पुख्ता सबूत पेश नहीं किया। केवल हवा में बातें करने और बिना किसी पक्के सबूत के बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती।
इसके बाद हाईकोर्ट ने मृतक की मासिक आमदनी न्यूनतम मजदूरी दरों और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की रकम की दोबारा गणना की। वार्षिक आय के सही आकलन के बाद कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को बदलते हुए मुआवजा राशि को बढ़ा दिया। अब पीड़ित परिवार को 14 लाख 72 हजार 90 रुपये मिलेंगे।
हाईकोर्ट ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को सख्त निर्देश दिया है कि वह यह पूरी बढ़ी हुई रकम साढ़े सात प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करे। कंपनी को यह पैसा अगले 45 दिनों के भीतर ट्रिब्यूनल में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा।
हाईकोर्ट के इस अहम फैसले से जशपुर के पीड़ित परिवार को सालों के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार एक बड़ी और सच्ची राहत मिली है। यह जमीनी फैसला उन सभी बीमा कंपनियों के लिए एक बड़ा सबक है, जो तकनीकी कमियां निकालकर आम आदमी के जायज दावों को टालने और उन्हें कोर्ट कचहरी में परेशान करने की कोशिश करती हैं।



