

बिलासपुर। युगाब्द 5128 पुरुषोत्तम वर्ष के पावन अवसर पर शुभम विहार मानस मंडली द्वारा आयोजित सतत 211वें सुंदरकांड पाठ एवं सामूहिक हनुमान चालीसा का भव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन मेजर आशीष मिश्रा के जन्मदिन तथा धनंजय मिश्रा एवं तृप्ता मिश्रा के वैवाहिक वर्षगांठ के शुभ अवसर पर किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम और हनुमान जी की आराधना की।

संगीतमय सुंदरकांड पाठ, भजन-कीर्तन और सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने श्रीराम नाम का स्मरण करते हुए समाज, राष्ट्र और मानव कल्याण की कामना की।
इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ललित हीरालाल गर्ग ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को सहेजने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और पश्चिमी प्रभाव के दौर में नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है। ऐसे समय में परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि बच्चों को धार्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक संस्कार प्रदान किए जाएं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन आदर्श चरित्र, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है, जबकि हनुमान जी समर्पण, सेवा, शक्ति और भक्ति के सर्वोच्च उदाहरण हैं। यदि बच्चों को इन आदर्शों से परिचित कराया जाए तो उनमें नैतिक मूल्यों का विकास होगा और वे जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।
ललित गर्ग ने विशेष रूप से माताओं और बहनों से आग्रह किया कि वे अपने घरों में बच्चों को प्रतिदिन कम से कम एक बार हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए प्रेरित करें तथा सप्ताह में एक दिन परिवार या मोहल्ले के स्तर पर सामूहिक पाठ की परंपरा विकसित करें। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से केवल पूजा-अर्चना ही नहीं होती, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना भी मजबूत होती है।
उन्होंने अपने उद्बोधन में गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध चौपाई ‘होइये वही जो राम रची राखा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को कर्म करते हुए ईश्वर की इच्छा पर विश्वास रखना चाहिए। जीवन में आने वाली चुनौतियों और परिस्थितियों को सकारात्मक दृष्टि से स्वीकार कर धर्म, सत्य और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ना ही सनातन जीवन दर्शन का मूल संदेश है।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने सुंदरकांड के विभिन्न प्रसंगों का श्रवण किया और हनुमान जी के चरित्र से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया। भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत भक्तिमय रचनाओं ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

आयोजन में शुभम विहार मानस मंडली के अध्यक्ष आखिलानंद पांडेय सहित ललित अग्रवाल, अखलेश द्विवेदी, प्रमोद अवस्थी, डी.पी. सक्सेना, ए.के. स्वर्णकार, भूपेंद्र यादव, संतोष तिवारी, नीरज तिवारी, प्रो. वेद प्रकाश मिश्र, संगम शुक्ला, प्रो. हरिशंकर तिवारी, डॉ. रंजन द्विवेदी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मातृशक्ति और युवा वर्ग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक आरती, प्रसाद वितरण और राष्ट्र व समाज की सुख-समृद्धि की मंगलकामना के साथ हुआ। आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं समाज को जोड़ने, संस्कारों को सशक्त बनाने और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने का प्रभावी माध्यम हैं।



