

चार वर्षों में 956 हेक्टेयर अतिक्रमण मुक्त, 550 से अधिक शिकारी-तस्कर गिरफ्तार; हॉर्नबिल, उड़न गिलहरी, पैंगोलिन और ऊदबिलाव जैसी दुर्लभ प्रजातियों की बढ़ी मौजूदगी..

गरियाबंद। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने वन्यजीव संरक्षण, वन पुनर्जीवन और जलवायु संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐसी प्रेरक कहानी प्रस्तुत की है, जो पूरे देश के लिए मिसाल बन रही है। पिछले चार वर्षों में यहां चलाए गए संरक्षण अभियानों के परिणाम अब जमीन पर स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। जहां एक ओर सैकड़ों हेक्टेयर वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, वहीं दूसरी ओर कई दुर्लभ और विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों की वापसी ने इस जंगल की बदलती तस्वीर को और मजबूत किया है।

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों के दौरान 956 हेक्टेयर अर्थात लगभग 2500 एकड़ वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस भूमि की अनुमानित नेट प्रेजेंट वैल्यू (एनपीवी) करीब 573 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह अभियान आसान नहीं था। अतिक्रमण हटाने और वन संरक्षण की कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम पर चार बार जानलेवा हमले भी हुए, लेकिन इसके बावजूद अभियान लगातार जारी रहा और वनभूमि को पुनः प्राकृतिक स्वरूप में लौटाने का कार्य सफलतापूर्वक किया गया।
शिकारियों और तस्करों पर बड़ी कार्रवाई..

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए चलाए गए विशेष अभियानों में पिछले चार वर्षों में 550 से अधिक शिकारी, वन्यजीव तस्कर और अतिक्रमणकारी गिरफ्तार अथवा निरुद्ध किए गए। कार्रवाई केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रही, बल्कि ओडिशा और महाराष्ट्र तक संयुक्त एंटी-पोचिंग ऑपरेशन चलाकर वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया गया। इन सख्त कदमों का परिणाम यह हुआ कि वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण मिला और जंगलों में उनकी गतिविधियां बढ़ने लगीं।
दुर्लभ प्रजातियों की वापसी बनी सफलता की पहचान..
संरक्षण प्रयासों का सबसे बड़ा प्रमाण रिजर्व में दुर्लभ वन्यजीवों की बढ़ती उपस्थिति है। हाल के वर्षों में मालाबार पाइड हॉर्नबिल, भारतीय विशाल गिलहरी, भारतीय उड़न गिलहरी, इंडियन पैराडाइज फ्लाईकैचर, इंडियन पिट्टा, मूषक हिरण (माउस डियर), पैंगोलिन, चौसिंगा, ऊदबिलाव तथा ट्राइकारिनेट हिल टर्टल जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियों की मौजूदगी लगातार दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार मालाबार पाइड हॉर्नबिल सामान्यतः पश्चिमी घाट क्षेत्रों से जुड़ा माना जाता है, जबकि ट्राइकारिनेट हिल टर्टल का निवास हिमालयी और पूर्वोत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में माना जाता है। ऐसी प्रजातियों का उदंती सीतानदी में दिखाई देना यहां के वन पारिस्थितिकी तंत्र के बेहतर होने का संकेत माना जा रहा है।
बाघ गणना में भी मिले सकारात्मक संकेत..

अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 के दौरान लगाए गए कैमरा ट्रैप में भी कई दुर्लभ वन्यजीव दर्ज हुए। इनमें माउस डियर, स्मॉल-क्लॉड ऑटर, यूरेशियन ऑटर और पैंगोलिन प्रमुख हैं। पैंगोलिन का पहली बार कैमरा ट्रैप में दर्ज होना वन विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि जंगलों में जैव विविधता लगातार मजबूत हो रही है।
नवाचारों से घटा मानव-वन्यप्राणी संघर्ष..
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने संरक्षण के क्षेत्र में कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग भी किया है। हाथियों की निगरानी के लिए ट्रैकिंग और अलर्ट ऐप विकसित किया गया है, जबकि थर्मल ड्रोन और एआई आधारित कैमरा निगरानी प्रणाली के माध्यम से वन्यजीवों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

इन तकनीकी उपायों के कारण मानव-वन्यप्राणी संघर्ष की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। ग्रामीणों को समय रहते चेतावनी मिलने से जान-माल के नुकसान को कम करने में सफलता मिली है।हॉर्नबिल रेस्टोरेंट और कैनोपी कनेक्टिविटी जैसी अनूठी पहल..
हॉर्नबिल रेस्टोरेंट और कैनोपी कनेक्टिविटी जैसी अनूठी पहल..
रिजर्व में संरक्षण को नई दिशा देने के लिए “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” जैसी अभिनव पहल शुरू की गई है। इसके तहत स्थानीय समुदायों और वन विभाग के सहयोग से फलदार देशी वृक्षों का रोपण और संरक्षण किया जा रहा है ताकि हॉर्नबिल पक्षियों को वर्षभर भोजन उपलब्ध हो सके।


इसी तरह “वीविंग द कैनोपी कवर” अभियान के माध्यम से जंगलों में वृक्षों के बीच प्राकृतिक संपर्क बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे भारतीय विशाल गिलहरी और उड़न गिलहरी जैसी वृक्षों पर रहने वाली प्रजातियों को सुरक्षित आवाजाही का मार्ग मिल रहा है।
संरक्षण बना जन आंदोलन..
उदंती सीतानदी की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार स्थानीय समुदायों की भागीदारी है। वन सुरक्षा समितियां, महिला स्व-सहायता समूह, ग्रामीण युवा और स्थानीय विद्यालय संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वृक्षारोपण, वन्यजीव निगरानी, घोंसला संरक्षण, अग्नि नियंत्रण और जागरूकता अभियानों में लोगों की सहभागिता ने संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया है।
जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में भी बड़ी भूमिका..

अतिक्रमण हटाकर पुनर्जीवित किए गए वन क्षेत्र केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पुनर्स्थापित वन बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हैं। इससे वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा कम करने में मदद मिलती है।

वन बहाली के कारण मिट्टी संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, स्थानीय तापमान नियंत्रण और वर्षा जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। स्वस्थ वन परिदृश्य सूखा, अत्यधिक गर्मी और अन्य चरम मौसमी परिस्थितियों के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संरक्षण, आजीविका और पर्यावरण का संतुलित मॉडल..
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व आज इस बात का जीवंत उदाहरण बन चुका है कि वैज्ञानिक प्रबंधन, सख्त संरक्षण कार्रवाई और स्थानीय समुदायों की सहभागिता के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण, रोजगार सृजन और जलवायु संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर यह सफलता गाथा संदेश देती है कि यदि जंगलों को सुरक्षित रखा जाए और समुदायों को संरक्षण का भागीदार बनाया जाए, तो न केवल दुर्लभ वन्यजीवों की वापसी संभव है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्जागरण भी किया जा सकता है। आज उदंती सीतानदी के जंगलों में लौटते हॉर्नबिल, उड़न गिलहरियां, पैंगोलिन, ऊदबिलाव और अन्य दुर्लभ जीव इसी सकारात्मक बदलाव की कहानी बयां कर रहे हैं।
उदंती सीतानदी की 4 बड़ी उपलब्धियां..
956 हेक्टेयर (2500 एकड़) वनभूमि अतिक्रमण मुक्त..
550 से अधिक शिकारी, तस्कर और अतिक्रमणकारी गिरफ्तार..
लगभग 573 करोड़ की वन संपदा संरक्षित..
कई दुर्लभ प्रजातियों की वापसी से बढ़ा इको-टूरिज्म और रोजगार..
वन विभाग की टीम पर 4 जानलेवा हमलों के बावजूद संरक्षण अभियान लगातार जारी रहा और आज इसके परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहे हैं।



