छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में गुरुवार से शुरू हुई आफत की बारिश अब भले ही थम गई है, लेकिन पानी उतरने के बाद का नजारा डराने वाला है। लोगों के घरों से पानी तो निकल गया, पर पीछे सिर्फ कीचड़, सीलन और बर्बादी छूट गई है। जिन कॉलोनियों में पिछले 20-25 साल में कभी पानी नहीं भरा, वहां इस बार लोगों ने रात-रात भर जागकर अपना सामान बचाने की मशक्कत की। पानी उतर जाने के बाद अब लोग अपने घरों के गीले कपड़े और घरेलू सामान सहेज रहे हैं। उनके चेहरों पर नुकसान की चिंता और फिर से वैसी ही बारिश आने का डर झलक रहा है, जिसने एक ही रात में निगम की विकास वाली सोच को पानी में डुबा दिया।

बंधवापारा के 50 से ज्यादा घर झेल रहे आपदा का दंश..
सरकंडा क्षेत्र के बंधवापारा में हालात काफी खराब हैं। यहां 50 से ज्यादा घर इस आपदा का दंश झेल रहे हैं। लोगों के कमरों में भरा पानी तो कम हो गया है, लेकिन हर तरफ कीचड़ ही कीचड़ फैल गया है। यहां 5 करोड़ रुपए खर्च करके 10 फीट चौड़ा नाला बनाया गया था। दावा था कि इससे बिरकोना खार से आने वाले पानी की निकासी इमलीभाठा होते हुए हो जाएगी, लेकिन यह नाला कोई काम नहीं आ सका। अब लोग बाल्टियों और वाइपर से घरों का कीचड़ बाहर निकालने में लगे हैं।
बर्बाद हो गए लाखों के सामान, गाड़ियों के इंजन हुए सीज..
देवनंदन नगर फेस-1 व 2, गीतांजलि सिटी, फ्रेंड्स कॉलोनी, वसंत विहार, जोरापारा, जबड़ापारा और सरोज विहार समेत कई रिहायशी कॉलोनियों में बारिश का पानी कमरों के भीतर तक पहुंच गया था। पानी उतरा तो तबाही का असली रूप सामने आया। घरो में रखे फ्रिज, कूलर, वॉशिंग मशीन, सोफे और दीवान पूरी तरह खराब हो चुके हैं। जिन लोगों के दोपहिया और चारपहिया वाहन पानी में डूबे थे, उनके इंजन सीज हो गए हैं। कई घरेलू सामान तो ऐसे हैं जो पानी के बहाव में बह गए और अब मिल ही नहीं रहे। पूरा दिन पहली मंजिल पर बिताने वाले लोग अब अपने हुए नुकसान का अंदाजा लगा रहे हैं।
18 करोड़ का ड्रेनेज सिस्टम हुआ फेल..
इस बारिश ने ड्रेनेज सिस्टम के काम की पोल खोल दी है। शहर में जलभराव रोकने के लिए पिछले तीन साल में करीब 18 करोड़ रुपए खर्च कर बड़े नाले बनाए गए थे। इसके बावजूद कई जगह नाले अधूरे छोड़ दिए गए या पुराने संकरे नाले बदले नहीं गए।
लिंक रोड और पुराना बस स्टैंड : यहां 7 करोड़ खर्च कर पुराना दीप होटल से जवाली नाले तक 20 फीट चौड़ा नाला बना, लेकिन बीच का 6 फीट पुराना नाला नहीं बदला गया। नतीजा, जलजमाव जस का तस है।
तालापारा : स्मार्ट सिटी के मद से 1 किलोमीटर लंबा नाला बना, बालमुकुंद स्कूल से तैयबा चौक तक 3 करोड़ का काम हुआ, फिर भी पानी भर गया।
यदुनंदन नगर : यहां 3.27 करोड़ का नाला बना, लेकिन शनि मंदिर के पास आखिरी छोर का काम अधूरा होने से कॉलोनी के कई हिस्सों में अभी भी पानी भरता है।
बुजुर्ग महिला की गई जान, 204 लोगों का रेस्क्यू..
इस जलभराव के बीच एक दुखद घटना भी हुई। लिंगियाडीह की रहने वाली 65 वर्षीय प्रमिला बाई काम पर जाते समय उफनते नाले के तेज बहाव में बह गईं। बाद में उनका शव अरपा नदी की झाड़ियों में फंसा मिला। हालात इतने बिगड़ गए थे कि देवनंदन नगर सहित शहर के आधा दर्जन से अधिक इलाकों में एसडीआरएफ को रेस्क्यू के लिए नाव चलानी पड़ी। टीम ने जगदंबा कॉलोनी, चौबे कॉलोनी, बंधवापारा और रिस्दा मल्हार सहित कई जगहों से करीब 204 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
सड़क संपर्क टूटा, ट्रेनें रद्द और पानी की किल्लत..
बिलासपुर-कोरबा, बिलासपुर-रायगढ़ मार्ग और नेशनल हाईवे पर पानी भरने से आवाजाही ठप रही। बिलासपुर स्टेशन और यार्ड में ट्रैक डूबने से 7 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। करंट न फैले, इसलिए गुरुवार रात से ही अधिकांश इलाकों की बिजली एहतियातन बंद कर दी गई। 17 ट्रांसफार्मर और तीन सब-स्टेशन जलमग्न हो गए। बिजली नहीं होने से पीने के पानी की सप्लाई भी बाधित रही और लोगों को बोतल बंद पानी से काम चलाना पड़ा।
कलेक्टर और निगम आयुक्त ने खुद कमान संभालते हुए राहत कार्य शुरू कराया। जिन परिवारों के घरों में खाना नहीं बन सका, उन्हें 1700 फूड पैकेट बांटे गए।
वहीं,राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। पूर्व विधायक ने इसे जनता के विश्वास का पानी में डूबना बताया, जबकि शहर विधायक ने टास्क फोर्स को जल्द व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल, शहरवासियों को मौसम विभाग के अगले अलर्ट की चिंता सता रही है।







