14 साल पहले बने भवन के नाम पर सरपंच-सचिव ने डकारे 9 लाख, फर्जी फर्मों में ट्रांसफर की रकम ; कलेक्टर ने बिठाई जांच..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत स्तर पर विकास के लिए भेजे गए लाखों रुपये सरपंच और सचिव ने फर्जीवाड़ा कर डकार लिए। हद तो तब हो गई जब जिस पंचायत भवन का निर्माण 14 साल पहले हो चुका था, उसी के नाम पर दोबारा बिल लगाकर करीब 9 लाख रुपये की सरकारी राशि का गबन कर लिया गया। अब इस मामले की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में हुई है, जिसके बाद कलेक्टर ने जांच के सख्त निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

मामला बिलासपुर जिले की ग्राम पंचायत लोखण्डी का है। यहां के ग्रामीण सतीश पटेल ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर दस्तावेजों के साथ इस बड़े फर्जीवाड़े की पोल खोली है। शिकायत के अनुसार, तत्कालीन महिला सरपंच सावित्री ध्रुव और तत्कालीन पंचायत सचिव बृजेश साहू ने आपसी मिलीभगत करके साल 2020 से 2025 के बीच 15वें वित्त आयोग से मिली सरकारी राशि में भारी गोलमाल किया। आरोप है कि स्वीकृत हुई भारी-भरकम राशि से गांव के धरातल पर कोई भी विकास कार्य नहीं कराया गया, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे रकम हड़प ली गई।

पुराने भवन और पुराने बोर के नाम पर निकाला पैसा..

भ्रष्टाचार का तरीका इतना शातिर था कि सालों पुराने काम को नया बताकर सरकारी खजाने को चूना लगा दिया गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि लोखण्डी में पंचायत भवन का निर्माण साल 2012 में ही बनकर तैयार हो गया था। लेकिन सरपंच-सचिव ने पंचायत भवन निर्माण (वर्क कोड-102656590) के नाम पर 16 फरवरी 2025 को 4,99,946 रुपये निकाल लिए। यही नहीं, पूर्व में बने बोर के पास दोबारा नया खनन दिखाने के लिए (वर्क कोड-75840124 के तहत) 17 फरवरी 2025 को भी पैसे आहरित किए गए। धरातल पर न तो कोई नया भवन मिला है और न ही कोई नया बोर खनन कराया गया है।

फर्जी फर्मों के खातों में ट्रांसफर की रकम..

इस पूरे गबन को अंजाम देने के लिए फर्जी फर्मों का सहारा लिया गया। सरपंच और सचिव ने ‘साहू ट्रेडर्स’ और ‘रामायण हार्डवेयर’ नाम की फर्मों के खातों में क्रमशः 1,97,326 रुपये और 1,97,200 रुपये ट्रांसफर किए। इस तरह कुल 8,94,472 रुपये (लगभग 9 लाख रुपये) की शासकीय राशि का सीधा गबन किया गया।

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश..

दस्तावेजों के साथ हुई इस पुख्ता शिकायत के बाद कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया है।शिकायतकर्ता सतीश पटेल ने उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। कलेक्टर के जांच के आदेश के बाद स्थानीय पंचायत महकमे और पूर्व पदाधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।