

गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने कोर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और वन विनाश के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि महानदी और वन्यजीवों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। विभाग ने बताया कि टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में लगभग 106 हेक्टेयर (करीब 265 एकड़) भूमि पर अवैध कब्जा किया गया, जिसके लिए कम से कम 1 लाख बड़े वृक्षों और लगभग 2 लाख छोटे एवं युवा पेड़ों को काटा गया। विभाग का कहना है कि छोटे पेड़ सैटेलाइट इमेज में स्पष्ट नहीं दिखते, इसलिए वास्तविक नुकसान और भी अधिक है।

वन विभाग के अनुसार इस मामले में 166 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इन आरोपियों के खिलाफ वर्ष 2008, 2011 और 2015 में भी वन अपराध प्रकरण (POR) दर्ज किए जा चुके हैं। हाल ही में माननीय जिला न्यायालय ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका भी निरस्त कर दी थी। इसके बावजूद तीन बार नोटिस दिए जाने के बाद भी अधिकांश आरोपियों ने अपना बयान दर्ज नहीं कराया।
वन टीम पर लगाए जा रहे आरोपों को बताया झूठा..
टाइगर रिजर्व प्रशासन ने कहा कि गिरफ्तारी की कार्रवाई के दौरान वन अमले पर मारपीट के लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह झूठे और भ्रामक हैं। विभाग के पास कार्रवाई से जुड़ी शुरुआत से अंत तक की वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है। फुटेज में वन कर्मचारियों से धक्का-मुक्की, शासकीय वाहन की चाबी छीनना और हिरासत में लिए गए आरोपियों को छुड़ाने जैसी घटनाएं स्पष्ट रूप से कैद हैं।
विभाग ने यह भी बताया कि 18 मई को कार्रवाई के दौरान गांव के सरपंच और पुलिस की मौजूदगी में आरोपियों ने चार दिन के भीतर सरेंडर करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अगले ही दिन वे अपने बयान से पलट गए।
महानदी बचाना हमारी जिम्मेदारी..
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने दो टूक कहा कि महानदी के जलग्रहण क्षेत्र और वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी है। विभाग ने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में भी घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बिना पुलिस बल के अभियान चलाकर लगभग 600 हेक्टेयर अतिक्रमण हटाया गया था। ऐसे में वर्तमान कार्रवाई से पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला..
वन विभाग ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने टी.एन. गोदावर्मन बनाम भारत सरकार जनहित याचिका (PIL 202/1995) में 13 फरवरी 2012 को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वन्यजीव कॉरिडोर को सुरक्षित रखा जाए तथा अतिक्रमण और शिकार गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके।
4 आरोपी जेल भेजे गए, बाकी पर गिरफ्तारी की तैयारी..

अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 दिन की रिमांड पर जेल भेजा जा चुका है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि बाकी 162 आरोपी तय समय में आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो बड़े स्तर पर गिरफ्तारी अभियान चलाया जाएगा।
कार्रवाई के दौरान तीन ड्रोन से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जाएगी, ताकि आरोपियों की पहचान आसानी से हो सके और किसी भी संभावित हमले या बाधा को साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड किया जा सके।



