टाइगर रिजर्व की जमीन पर खेती का दावा, जांच में खुला बड़ा सच..उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में 106 हेक्टेयर अतिक्रमण का मामला, 166 आरोपियों के पास पहले से 610 एकड़ निजी जमीन..

गरियाबंद। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में अवैध अतिक्रमण और वन कटाई के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। जिन 166 लोगों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और भारतीय वन अधिनियम के तहत कार्रवाई चल रही है, उन्होंने अब दावा किया है कि वे टाइगर रिजर्व की जमीन पर नहीं बल्कि अपने पूर्वजों की निजी भूमि पर खेती कर रहे हैं। हालांकि टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इस दावे को उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के विपरीत बताया है।

टाइगर रिजर्व प्रशासन के अनुसार मामला सीतानदी कोर क्षेत्र के ग्राम जैतपुरी से जुड़ा हुआ है, जहां लंबे समय से वन भूमि पर अवैध कब्जा, जंगल कटाई और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। मामले में कई आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं भी जिला न्यायालय द्वारा पहले ही खारिज की जा चुकी हैं।

उपग्रह चित्रों और ड्रोन सर्वे में सामने आई सच्चाई..

वन विभाग ने बताया कि ISRO के CARTOSAT उपग्रह चित्रों, GPS सर्वे, ड्रोन मैपिंग और जमीनी निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि वर्ष 2011 से लगातार टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ा है। जांच में लगभग 106 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जे के प्रमाण मिले हैं।

वन विभाग के मुताबिक हालिया निरीक्षण में 237 पेड़ों की कटाई, 574 पेड़ों को चारों ओर से घेरकर सुखाने, ठूंठ जलाने और नए क्षेत्रों में अतिक्रमण फैलाने के साक्ष्य भी मिले हैं। विभाग ने इसे जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बताया है।

पहले खुद माना था – जमीन के दस्तावेज नहीं..

वन विभाग का कहना है कि कई आरोपियों ने पहले अपने जवाब में स्वीकार किया था कि उनके पास संबंधित वन भूमि के स्वामित्व के वैध दस्तावेज नहीं हैं। इसके बावजूद अब वे इसे पुश्तैनी भूमि बताकर नया दावा कर रहे हैं।

इस बीच राजस्व विभाग से मिली जानकारी में यह भी सामने आया है कि 166 आरोपियों के पास पहले से ही राजस्व क्षेत्र में करीब 247 हेक्टेयर यानी लगभग 610 एकड़ निजी जमीन मौजूद है। अब यह भी जांच की जा रही है कि क्या अवैध कब्जे और वन भूमि के उपयोग से आर्थिक लाभ लेकर नई संपत्तियां अर्जित की गई हैं।

जंगल बचाने के लिए शुरू हुआ पुनर्वास और संरक्षण अभियान..

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच वैज्ञानिक और कानूनी आधार पर की जा रही है तथा सभी साक्ष्यों का परीक्षण जारी है। विभाग का कहना है कि संरक्षित कोर क्षेत्र में हुए नुकसान की भरपाई के लिए बड़े स्तर पर फॉरेस्ट री-स्टोरेशन कार्य शुरू कर दिए गए हैं।

इसके तहत जल संरक्षण संरचनाएं, कंटूर ट्रेंच, चेक डैम निर्माण, फेंसिंग और फलदार प्रजातियों के पौधरोपण जैसे कार्य किए जा रहे हैं ताकि जंगल और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को दोबारा सुरक्षित किया जा सके।

वन विभाग ने कहा कि टाइगर रिजर्व के संवेदनशील कोर क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण और पर्यावरणीय नुकसान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।