

गरियाबंद। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने ग्रामीणों से अपील की है कि तेंदूपत्ता, महुआ, चार, जलाऊ लकड़ी और अन्य लघु वनोपज संग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतें। खासकर उन वन क्षेत्रों में सतर्क रहने को कहा गया है जहां हाल के दिनों में जंगल में आग की घटनाएं अधिक हुई हैं और जंगली जानवरों की गतिविधियां बढ़ी हैं।

टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बताया कि हाल ही में तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान भालू के हमले में दो ग्रामीणों की मौत हुई है। इन घटनाओं के बाद वन विभाग ने लोगों से बफर क्षेत्रों में भी सतर्कता के साथ प्रवेश करने और कोर एरिया से दूर रहने की अपील की है।
कोर क्षेत्र में घुसने पर हुआ भालू से सामना..
वन विभाग के अनुसार तौरंगा बफर क्षेत्र के एक ग्रामीण तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए प्रतिबंधित कोर क्षेत्र में पहुंच गए थे। इसी दौरान उनका भालू से सामना हो गया, जिसमें उनकी मौत हो गई।
वहीं ग्राम आमामोरा की एक बुजुर्ग महिला एक दिन तक लापता रहीं, लेकिन परिजनों और ग्रामीणों ने समय पर वन विभाग या पुलिस को सूचना नहीं दी। बाद में खोजबीन के दौरान जंगल में भालू के हमले के संकेत मिले। घायल महिला को रायपुर के मेकाहारा और डीकेएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सर्जरी के बाद उनकी मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारी पूरे इलाज के दौरान परिजनों के साथ मौजूद रहे। दोनों मामलों में प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता राशि प्रदान की गई है।
गर्मी में बढ़ जाता है जंगली जानवरों का मूवमेंट..
वन विभाग ने बताया कि गर्मी के मौसम में पानी की तलाश में भालू, हाथी और बाघ जैसे वन्यजीव जल स्रोतों और गांवों के आसपास ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए ग्रामीणों के लिए कई जरूरी सावधानियां जारी की गई हैं।
वन विभाग की ग्रामीणों से अपील..
जंगलों में आग न लगाएं, इससे जंगली जानवर आक्रामक हो जाते हैं।
बफर क्षेत्रों में अकेले न जाएं, हमेशा समूह में प्रवेश करें।
कोर क्षेत्र में वनोपज संग्रहण बिल्कुल न करें।
सुबह जल्दी, शाम और रात में जंगल जाने से बचें।
चलते समय आवाज करते रहें ताकि जंगली जानवर दूर हट सकें।
हाथियों के झुंड, भालू के बच्चों और बाघ की गतिविधि वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें।
किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
बुजुर्गों और बच्चों को घने जंगलों में जाने से रोकें।
संघर्ष रोकने के लिए कई नवाचार..
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए लगातार नए प्रयास किए जा रहे हैं।
वन विभाग द्वारा अभिनव ‘एलीफेंट ट्रैकिंग एंड अलर्ट ऐप’ संचालित किया जा रहा है, जिसके जरिए हाथियों की गतिविधियों की पहले से जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाई जाती है। विभाग का दावा है कि पिछले तीन वर्षों में हाथी-मानव संघर्ष में केवल दो जनहानि की घटनाएं हुई हैं।
इसके अलावा जंगलों में सोलर पंप लगाकर तालाबों में पानी की व्यवस्था की जा रही है। छोटे-छोटे जल स्रोत विकसित किए जा रहे हैं ताकि जंगली जानवरों को जंगल के भीतर ही पानी मिल सके और वे गांवों की ओर न आएं।
वन क्षेत्रों में आग लगाने के आरोप में अब तक 23 लोगों की गिरफ्तारी भी की गई है। वहीं ड्रोन के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है। रैपिड रिस्पॉन्स टीम और वन अमला लगातार गश्त कर ग्रामीणों को जागरूक करने में जुटा हुआ है।
वन विभाग ने कहा है कि ग्रामीणों की सतर्कता और सहयोग से ही मानव जीवन और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।



