

बिलासपुर/मस्तूरी। सियासत में कथनी और करनी का अंतर समझना हो, तो बिलासपुर जिले के मस्तूरी इलाके का ताजा ‘रेत कांड’ इसका मुकम्मल उदाहरण है। ग्राम कुकुर्दीकला में हुई रेत खदान की जनसुनवाई और उसके फर्जीवाड़े के वायरल वीडियो को सामने आए चार-पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक अमले और सत्ताधारी दल की खामोशी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जिन सफेदपोश नेताजी ने कुछ दिन पहले प्रेस क्लब में बैठकर खुद को ‘गंगाजल’ से धुला हुआ बताया था, उनका ‘ट्रैफिक पुलिस’ वाला अवतार सोशल मीडिया पर कई दिनों से तैर रहा है। इसके बावजूद, अब तक न तो कोई जांच कमेटी बैठी है और न ही किसी पर एफआईआर दर्ज हुई है।

ठंडे बस्ते में कार्रवाई, नेताजी का ‘मैनेजमेंट’ जारी..
मस्तूरी के कुकुर्दीकला में 11 हेक्टेयर क्षेत्र से 99,000 घनमीटर सालाना रेत उत्खनन के लिए 29 अप्रैल को पर्यावरण संरक्षण मंडल ने जनसुनवाई रखी थी। घटना को बीते लगभग एक हफ्ता होने जा रहा है।


इस पूरे मैनेजमेंट के ‘डायरेक्टर’ नजर आ रहे स्थानीय भाजपा नेता चंद्र प्रकाश सूर्या पर अब तक कोई आंच नहीं आई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनसुनवाई से कोई वास्ता न होने का दावा करने वाले नेताजी वीडियो में साफ तौर पर इशारों से ‘इम्पोर्टेड’ भीड़ को निर्देशित करते दिख रहे हैं। पैसों के लेन-देन के पुराने वायरल वीडियो के बाद इस नए कारनामे ने सिस्टम को बेनकाब कर दिया है, फिर भी प्रशासन धृतराष्ट्र की भूमिका में है।
किराए की भीड़ और सिस्टम का चीरहरण..


वायरल वीडियो ने यह साफ कर दिया है कि जनसुनवाई के नाम पर कैसे लोकतंत्र का गला घोंटा गया। नियम था कि कुकुर्दीकला के ग्रामीणों की राय ली जाए, लेकिन भीड़ दिखाने के लिए पड़ोसी गांव सोनसरी से महिलाओं को लाया गया। वीडियो को वायरल हुए कई दिन हो गए हैं, जिसमें जनपद पंचायत सदस्य माधुरी के प्रतिनिधि उतरा रात्रे कुर्सियों पर बैठी महिलाओं के हाथों में जबरन समर्थन का पर्चा थमाते दिख रहे हैं। महिला समूहों की अनपढ़ महिलाओं से बिना पढ़े दस्तखत करा लिए गए, लेकिन पर्यावरण विभाग और राजस्व अमले ने इस 420 (धोखाधड़ी) पर अब तक आंखें मूंद रखी हैं।
CCTV फुटेज खा रहे धूल, संगठन की चुप्पी पर सवाल..
आज चार-पांच दिन बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जनसुनवाई स्थल पर लगे CCTV कैमरों के फुटेज सिर्फ धूल खाने के लिए हैं? दिन-दहाड़े हुए इस फर्जीवाड़े के डिजिटल सुबूत मौजूद होने के बाद भी पुलिस और प्रशासन ने स्वत: संज्ञान (Suo Moto) क्यों नहीं लिया?
सत्ताधारी दल के एक नेता का इस तरह से खुलेआम रेत के खेल में मोर्चा संभालना पार्टी की सुशासन वाली छवि को डेंट कर रहा है। घटना के इतने दिन बाद भी संगठन की तरफ से कोई स्पष्टीकरण या कार्रवाई न होना यह संकेत देता है कि रेत माफिया की जड़ें सिस्टम में बहुत गहरी हैं।



