खाकी पर सवाल : रेप का प्रयास और लूट के मामले में पुलिस पर लीपापोती का आरोप, पीड़िता ने एसपी से मांगा न्याय..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए है। सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ अपहरण, रेप के प्रयास, मारपीट और लूट जैसी गंभीर वारदात को अंजाम दिया गया। लेकिन हद तो तब हो गई जब रक्षक ही भक्षक के मददगार बन गए।

आरोप है कि सिरगिट्टी थाने के एक सब-इंस्पेक्टर (SI) ने मुख्य आरोपी से मिलीभगत कर न सिर्फ एफआईआर में उसका नाम हटा दिया, बल्कि गंभीर धाराओं को भी हल्की धाराओं में बदलकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। अब पीड़िता ने न्याय के लिए बिलासपुर पुलिस अधीक्षक (एसपी) का दरवाजा खटखटाया है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़िता द्वारा एसपी को दिए गए आवेदन के अनुसार, घटना 3 मार्च 2026 की रात करीब 10 बजे की है। वह बन्नाक चौक स्थित मदन मुर्गा दुकान के पास खड़ी थी। तभी शेखर राव और मंझला रजक नाम के दो युवक गाड़ी से आए। शेखर राव ने खुद को पुलिसवाला बताकर उसे जबरन गाड़ी में बैठा लिया।

विरोध करने पर आरोपियों ने थाने ले जाने का बहाना किया और गाड़ी एक सुनसान मैदान की तरफ मोड़ दी। वहां ले जाकर दोनों ने महिला के कपड़े फाड़ दिए और रेप की कोशिश की। बचाव के लिए चीखने पर मंझला रजक ने पीड़िता के सिर पर शराब की बोतल से जानलेवा हमला कर दिया, जिससे वह बुरी तरह लहूलुहान हो गई। जाते-जाते आरोपी उसके बैग में रखे पैसे, रंग-गुलाल और घरेलू सामान भी लूट ले गए।

पुलिस पर गंभीर आरोप..

खून से लथपथ पीड़िता उसी रात सिरगिट्टी थाने पहुंची। पुलिस ने मुलायजा (मेडिकल) तो करवाया, लेकिन आरोपियों के नाम मालूम न होने के कारण मामला टाल दिया। कुछ दिनों बाद पीड़िता ने मुख्य आरोपी शेखर राव को सड़क पर पहचान लिया। जब वह थाने में आरोपियों का नाम दर्ज कराने पहुंची, तो आरोप है कि एसआई ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौज की और उसे थाने से भगा दिया।

थाने में दिनभर बैठा रखा,एफआईआर में किया ‘खेल’..

22 मार्च को पीड़िता न्याय की आस में एसपी कार्यालय पहुंची, जहां से उसे वापस सिरगिट्टी टीआई के पास भेजा गया। टीआई के निर्देश के बावजूद, अगले दिन जब पीड़िता अपने पति और मां के साथ एफआईआर दर्ज कराने पहुंची, तो एसआई ने महिला पुलिस के आने का बहाना बनाकर उन्हें सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक भूखे-प्यासे थाने में बैठाए रखा।

इस दौरान दूसरा आरोपी मंझला रजक (जो पीड़िता के मोहल्ले का ही है) के परिजन लगातार समझौते का दबाव बनाते रहे। आरोप है कि थाना परिसर में ही मुख्य आरोपी शेखर राव ने पीड़िता के पति से कहा,”मेरा नाम मत लिखाओ,साहब मेरे दोस्त हैं, मैं तुम्हारी रिपोर्ट दर्ज करवा देता हूं।

गंभीर अपराध, पर लगाई सिर्फ हल्की धाराएं..

रात 8 बजे थक-हारकर जब एफआईआर लिखी गई, तो एसआई ने पीड़िता के पति से बोलकर आवेदन लिखवाया और पूरी कहानी ही बदल दी। अपहरण, छेड़छाड़ और रेप के प्रयास जैसी गंभीर घटना होने के बावजूद पुलिस ने हल्की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एफआईआर से मुख्य आरोपी शेखर राव का नाम ही पूरी तरह से गायब कर दिया गया।

मामले को लेकर पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक को कड़ी कार्रवाई की मांग की है।