

शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों से मचा हड़कंप, डीईओ टांडे और बाबू सुनील यादव पर नई जांच के आदेश..

बिलासपुर। जिला शिक्षा विभाग में नियुक्ति, अटैचमेंट और प्रमोशन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस नेता अंकित गौराहा की शिकायत के बाद संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा आर.पी. आदित्य ने जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और स्थापना शाखा के बाबू सुनील यादव के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए हैं। इसके लिए तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
संयुक्त संचालक कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार जांच समिति में जांजगीर के जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा, सहायक संचालक जे.के. शास्त्री और बिल्हा विकासखंड के खंड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक को शामिल किया गया है। जांच के आदेश जारी होते ही शिक्षा विभाग में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और पूरे मामले ने विभागीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नियुक्ति और प्रमोशन प्रक्रिया पर उठे सवाल..

कांग्रेस नेता अंकित गौराहा ने शिक्षा विभाग में अनुकम्पा नियुक्ति, अटैचमेंट, युक्तियुक्तकरण और प्रमोशन में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने इस संबंध में संभागायुक्त और संभागीय संयुक्त संचालक को पत्र लिखकर विस्तृत जांच की मांग की थी।
गौराहा का कहना है कि कई मामलों में नियमों को नजरअंदाज कर निर्णय लिए गए, जिससे विभाग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई। इस पर उन्होंने सीधे संयुक्त संचालक से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की और कहा कि संभागायुक्त के निर्देशों के बावजूद जिला स्तर पर जांच शुरू करने में जानबूझकर देरी की गई।
पहले भी हुई थी जांच, मिली थी क्लीन चिट..
गौराहा के अनुसार इससे पहले भी इस मामले में शिकायत हुई थी। उस समय एक भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री ने कलेक्टर से शिकायत की थी। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा विभाग ने दो सदस्यीय जांच समिति बनाई थी।
इस समिति में बिल्हा और मस्तूरी के बीईओ को शामिल किया गया था। जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव को क्लीन चिट दे दी गई थी। गौराहा का आरोप है कि तकनीकी रूप से कोई बीईओ जिला शिक्षा अधिकारी की जांच नहीं कर सकता, इसके बावजूद ऐसी जांच कराकर पूरे मामले को खत्म करने की कोशिश की गई।
नई जांच समिति पर भी उठे सवाल..

नई तीन सदस्यीय जांच समिति को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। गौराहा का कहना है कि समिति में शामिल बिल्हा के खंड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक पहले उस जांच टीम का हिस्सा रह चुके हैं, जिसने टांडे और यादव को क्लीन चिट दी थी। ऐसे में वही अधिकारी दोबारा जांच समिति में रहकर निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं। इससे जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच समिति में बदलाव की मांग..
अंकित गौराहा ने संयुक्त संचालक से मांग की है कि भूपेंद्र कौशिक को जांच समिति से हटाकर किसी अन्य अधिकारी को शामिल किया जाए, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो सके। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग रखी है कि जांच पूरी होने तक जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव को विभागीय कार्यों से दूर रखा जाए।
आंदोलन और कोर्ट जाने की चेतावनी..
गौराहा ने चेतावनी दी है कि यदि जांच समिति में बदलाव नहीं किया गया और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं हुई, तो संयुक्त संचालक कार्यालय का घेराव किया जाएगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस पूरे मामले को न्यायालय तक ले जाया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।



