आरक्षित वन में अवैध कटाई का खुला खेल : बिलाईगढ़ वन परिक्षेत्र में 46 संरक्षित वृक्षों का सफाया, ट्रैक्टर-जेसीबी मौके पर पकड़े गए..

सारंगढ़-बिलाईगढ़।आरक्षित वनों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 23 जनवरी 2026 को आरक्षित वन खण्ड, कक्ष क्रमांक 442, सर्किल गाताढ़ी, वन परिक्षेत्र बिलाईगढ़ में बड़े पैमाने पर अवैध वृक्ष कटाई का गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आरक्षित वन क्षेत्र में विनिर्दिष्ट (संरक्षित) प्रजाति के कुल 46 नग हरे-भरे इमारती वृक्षों को अवैध रूप से काटा गया, जिनकी गोलाई 50 सेंटीमीटर से लेकर 160 सेंटीमीटर तक बताई जा रही है।

सूचना ग्रामीणों द्वारा दिए जाने के बावजूद वन परिक्षेत्र अधिकारी काफी देर बाद मौके पर पहुंचे, जबकि बीट गार्ड उनके पहुँचने के कुछ समय बाद घटनास्थल पर पहुँचा। मौके की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी चेन सॉ मशीन की सहायता से सुनियोजित तरीके से कटाई कर रहे थे। इतना ही नहीं, कटे हुए वृक्षों के परिवहन के लिए ट्रैक्टर और जेसीबी मशीन भी मौके पर मौजूद थीं, जिससे यह साफ होता है कि यह कार्य किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संगठित अवैध गतिविधि का हिस्सा था।

लगातार हो रही कटाई, प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्न..

यह घटना कोई अलग-थलग मामला नहीं है, बल्कि बिलाईगढ़ क्षेत्र में लगातार हो रही अवैध कटाई की एक और कड़ी है। हाल ही में बिजली विभाग द्वारा बिना अनुमति 30 से अधिक वृक्षों की कटाई किए जाने का मामला भी सामने आया था। इस पर संज्ञान लेते हुए सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले के डीएफओ द्वारा बिजली विभाग के अधिकारियों को पत्र जारी किया गया, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।

लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह संकेत मिल रहा है कि या तो वन विभाग का निगरानी तंत्र कमजोर हो चुका है, या फिर अवैध कटाई करने वालों को किसी न किसी स्तर पर संरक्षण प्राप्त है। पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई, दोषी अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या आरक्षित वनों की सुरक्षा केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित रह गई है, या वन संपदा को बचाने के लिए वास्तव में ठोस और सख्त कदम उठाए जाएंगे?

अब देखना यह होगा कि वन विभाग के मुख्यालय स्तर के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले में बिलाईगढ़ वन परिक्षेत्र अधिकारी, डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड की भूमिका पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर यह गंभीर मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।