गोंदिया-जबलपुर रेल प्रोजेक्ट : 5235 करोड़ से 231 किमी ट्रैक का होगा दोहरीकरण, सर्वे का काम पूर्ण ; वन्यजीव क्लीयरेंस मिलते ही जारी होंगे टेंडर..

23 स्टेशन, 507 पुल और 10 नई बिल्डिंग का खाका तैयार, अब धरातल पर उतरेगा काम..

बिलासपुर। मार्च 2026 में 5235.79 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से मंजूर हुए 231 किलोमीटर लंबे गोंदिया-जबलपुर रेलखंड के दोहरीकरण प्रोजेक्ट का जमीनी सर्वे अब पूर्ण हो गया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के इस मेगा प्रोजेक्ट में मध्य प्रदेश का 213 किलोमीटर और महाराष्ट्र का 18 किलोमीटर हिस्सा शामिल है। रेलवे के प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे रूट पर कुल 507 पुल बनाए जाने हैं, जिनके जनरल अरेंजमेंट ड्रॉइंग (GAD) तैयार किए जा चुके हैं। इस ट्रैक के पूरी तरह से चालू होने के बाद वाराणसी और प्रयागराज से सीधे चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद के बीच का सबसे छोटा रूट तैयार हो जाएगा। रेलवे बोर्ड के आकलन के मुताबिक इससे हर साल 7.6 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई का सीधा रास्ता खुलेगा।

तीन हिस्सों में बंटा काम, फारेस्ट क्लीयरेंस पर टिकी टेंडर प्रक्रिया..

प्रोजेक्ट की डीपीआर (DPR) के मुताबिक, पूरे काम को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। पहला गोंदिया-बालाघाट (42 किमी), दूसरा बालाघाट-नैनपुर (82.40 किमी) और तीसरा नैनपुर-जबलपुर (106.80 किमी)। इस लाइन पर गोंदिया, प्रतापबाग, बिरसोला, हट्टा रोड, धापेवाड़ा से लेकर ग्वारीघाट, गढ़ा और कछपुरा तक कुल 23 स्टेशन आते हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि इनमें से 21 स्टेशनों के यार्ड प्लान अप्रूव हो चुके हैं और बाकी दो पर काम जारी है। निजी जमीन का अधिग्रहण और सरकारी जमीन के ट्रांसफर की प्रक्रिया राजस्व विभाग के स्तर पर अलग-अलग चरणों में चल रही है। बालाघाट-नैनपुर और नैनपुर-जबलपुर सेक्शन क्योंकि वन्यजीव क्षेत्रों से लगते हुए गुजरते हैं, ऐसे में जब तक वन और वन्यजीव विभाग से फाइनल एनओसी (NOC) नहीं मिलती, तब तक इन दो बड़े सेक्शन के सिविल वर्क के टेंडर जारी नहीं किए जाएंगे।

10 नए स्टेशन भवन बनेंगे, 31 जगह शिफ्ट होगी यूटिलिटी..

सर्वे रिपोर्ट बताती है कि 23 स्टेशनों में से 10 जगहों पर पुराने स्ट्रक्चर को हटाकर सर्वसुविधायुक्त नए स्टेशन भवन बनाए जाने हैं। इसके अलावा रूट के अलाइनमेंट में आ रही बिजली की हाईटेंशन लाइनें, पानी की पाइपलाइन और अन्य यूटिलिटी सेवाओं को 31 चिन्हित स्थानों से शिफ्ट किया जाएगा। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शेख समी उर रहमान के अनुसार, यह प्रोजेक्ट बालाघाट, सिवनी, मंडला और जबलपुर के उद्योगों और किसानों को सीधा फायदा पहुंचाएगा। जबलपुर एंड पर यह इटारसी-वाराणसी रूट से जुड़ता है और गोंदिया में हावड़ा-मुंबई मेन लाइन से, जिससे मालगाड़ियों का मूवमेंट बिना किसी बाधा के हो सकेगा।

लॉजिस्टिक में बचेंगे 350 करोड़..

रेलवे के कमर्शियल असेसमेंट के मुताबिक, इस रूट के शुरू होने से माल ढुलाई में सीधे तौर पर हर साल 350 करोड़ रुपए की लॉजिस्टिक लागत बचेगी। क्षेत्र के पावर प्लांट, ऑर्डिनेंस फैक्ट्री और खदानों से निकलने वाला माल कम समय में और सस्ती दरों पर पोर्ट तक पहुंचेगा।

78 लाख मैन-डेज का रोजगार..

दस्तावेजों में दर्ज है कि कंस्ट्रक्शन के दौरान लगभग 78 लाख मानव दिवस (मैन डेज) का रोजगार पैदा होगा। वहीं, ट्रेनों के इलेक्ट्रिक इंजनों से चलने और रूट छोटा होने से कार्बन उत्सर्जन में सालाना 16 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी।

अंडरपास का अलग से बजट..

कान्हा नेशनल पार्क और पेंच टाइगर रिजर्व के पास वाले इको-सेंसिटिव जोन में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ट्रैक के दोनों तरफ विशेष फेंसिंग और वाइल्डलाइफ अंडरपास बनाने का बजट अलग से सैंक्शन किया गया है।

आगे क्या : जमीन अधिग्रहण और फारेस्ट क्लीयरेंस की अटकी फाइलों को तेजी से निपटाने के लिए रेलवे और मध्य प्रदेश सरकार के वन व राजस्व अधिकारियों के बीच अगले हफ्ते एक संयुक्त बैठक प्रस्तावित है। विभाग की कोशिश है कि एनओसी की कागजी प्रक्रिया जल्द निपटाकर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाए।