रील बनाने, स्टंट करने और ईयरबड्स लगाकर गाड़ी चलाने वाले युवाओं की काउंसलिंग पर रहा मुख्य फोकस..

आईटीएमएस, नेक्स्ट जेन एम-परिवहन और बॉडी वॉर्न कैमरों जैसी आधुनिक तकनीकों की कैडेट्स को दी गई लाइव जानकारी..
बिलासपुर। पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के दिशा-निर्देश पर बिलासपुर यातायात पुलिस ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया है। गुरु घासीदास विद्यालय के रजत जयंती सभाकक्ष में आयोजित संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में 1000 से अधिक एनसीसी और स्काउट गाइड के कैडेट्स को सड़क सुरक्षा के नियमों की विस्तार से जानकारी दी गई।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे के पर्यवेक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी 1000 से अधिक कैडेट्स को यातायात पुलिस का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया। यातायात पुलिस का मुख्य उद्देश्य युवा वर्ग में बढ़ती लापरवाही को रोकना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
आंकड़ों में डरावनी सच्चाई, युवा सबसे ज्यादा प्रभावित..
यातायात पुलिस के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला समूह युवा वर्ग का ही परिलक्षित होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिलासपुर पुलिस ने शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष अभियान चलाने का लक्ष्य रखा है।
अधिकारियों ने बताया कि अक्सर छात्र-छात्राओं में वाहन चलाते समय यातायात नियमों के उल्लंघन और ट्रैफिक सेंस की कमी देखी जाती है। इस प्रवृत्ति को बदलने और युवाओं में संवेदनशीलता जगाने के लिए समय-समय पर ऐसे शिविर लगाकर उन्हें जागरूक बनाया जा रहा है।
रील और स्टंट के चक्कर में दांव पर लग रही जिंदगी..
कार्यशाला के दौरान पुलिस ने सोशल मीडिया पर व्यूज बढ़ाने के लिए रील बनाने और खतरनाक स्टंट करने वाले युवाओं की आदतों पर गहरी चिंता जताई। युवाओं को समझाया गया कि यह लापरवाही न केवल उनके खुद के लिए बल्कि दूसरों के लिए भी जोखिम निर्मित करती है।
इसके साथ ही, वाहन चलाते समय कान में ईयरबड्स लगाना, मोबाइल पर बात करना और तेज रफ्तार से गाड़ी दौड़ाना जैसी आदतों से बचने की सख्त हिदायत दी गई। पुलिस ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी इन जानलेवा आदतों की गिरफ्त में आकर दुर्घटनाओं का शिकार हो रही है।
चालान से बचने के लिए नंबर प्लेट से छेड़छाड़ पर सख्ती..
कार्यशाला में कैडेट्स को पुलिस की आधुनिक कार्यप्रणाली से भी रूबरू कराया गया। उन्हें बताया गया कि शहर में आईटीएमएस (ITMS), नेक्स्ट जेन एम-परिवहन, पीओएस (POS) मशीन और बॉडी वॉर्न कैमरे जैसी स्मार्ट तकनीकों के जरिए कैसे पारदर्शी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस ने आगाह किया कि कुछ युवा आईटीएमएस के ऑनलाइन चालान से बचने के लिए नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करते हैं। इसके अलावा मॉडिफाइड साइलेंसर से कानफोड़ू आवाज निकालना, अमानक तेज लाइटों का इस्तेमाल करना और बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाना गंभीर अपराध है, जिस पर अब पुलिस सख्ती से निपट रही है।
कर्नल और सेना के अधिकारियों की रही मौजूदगी..
इस बड़े आयोजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे के साथ कर्नल लोकेश देवा, कैप्टन आशीष शर्मा और सूबेदार मेजर देवेश प्रमुख रूप से शामिल हुए। सभी अधिकारियों ने कैडेट्स को यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने की शपथ दिलाई।

इसके अलावा फर्स्ट ऑफिसर अशोक नागपुरे, रंजू शर्मा, नवीन सिरस्वर, सेकेंड ऑफिसर रवि आडीले, पुखराज माझी, नारायण साहू, मृणाल, जयरामनगर व केंद्रीय विद्यालय के केयरटेकर, सभी एनसीसी अधिकारी और सेना का स्टाफ मौजूद रहा।







