

बिलासपुर। शहर में अब छोटी-छोटी बातें भी जानलेवा हमलों में तब्दील होने लगी हैं। ताजा मामला तोरवा थाना क्षेत्र का है, जहां महज एक मोटर सायकल हटाने के विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। विवाद इतना बढ़ा कि आरोपियों ने दो भाइयों पर लोहे के कड़े (चूड़े) और चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद मुख्य आरोपी पुलिस से बचने के लिए दूसरे राज्य (मध्य प्रदेश) भाग गया था, लेकिन बिलासपुर पुलिस ने वहां भी दबिश देकर उसे धर दबोचा।

पार्किंग विवाद से शुरू हुआ खूनी खेल..
दरअसल, यह पूरी घटना 24 मई 2026 की रात करीब 8:20 बजे की है। लालखदान क्षेत्र निवासी अयन पाटले किसी काम से मोहम्मद बाजार गया हुआ था। इसी दौरान वहां बाइक खड़ी करने और उसे रास्ते से हटाने को लेकर कुछ स्थानीय युवकों से उसकी तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोपियों ने तैश में आकर अयन के सिर पर लोहे के भारी चूड़े से जोरदार वार कर दिया। सिर फटने से अयन लहूलुहान होकर गिर पड़ा।
घटना की जानकारी मिलते ही उसका भाई अमन पाटले उसे बचाने और बीच-बचाव करने मौके पर पहुंचा। लेकिन खून सवार आरोपियों ने अमन को भी नहीं बख्शा। उन्होंने अमन के साथ बेरहमी से मारपीट की और उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं।
मोबाइल बंद कर एमपी में छिपा था आरोपी, पुलिस ने रातों-रात दबोचा..
वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस के डर से आरोपी इलाके से फरार हो गए। मामले की सूचना मिलते ही तोरवा पुलिस मौके पर पहुंची। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के कड़े निर्देश दिए।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) पंकज कुमार पटेल और नगर पुलिस अधीक्षक (कोतवाली) गगन कुमार के मार्गदर्शन में पुलिस की विशेष टीमों ने आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच और सायबर सेल की मदद से पता चला कि मुख्य आरोपी 44 वर्षीय निर्मल पासी अपना मोबाइल बंद कर मध्य प्रदेश के महूरी इलाके में जा छिपा है। पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए एमपी का रुख किया और देर रात वहां दबिश देकर निर्मल को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, इस वारदात में शामिल दूसरे आरोपी 25 वर्षीय शिवम पासी को लालखदान स्थित उसके घर से दबोचा गया।
अन्य आरोपियों की तलाश तेज..
पुलिस ने आरोपियों के पास से हमले में इस्तेमाल किया गया लोहे का चूड़ा जब्त कर लिया है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 351(3), 115(2), 109(1) और 3(5) के तहत गंभीर अपराध दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।



