
गोवर्धन पूजा पर भगवान को अर्पित होगा अन्नकूट, विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं को मिलेगा प्रसाद; श्री लक्ष्मी नारायण सेवा संघ ने सपरिवार आमंत्रित किया..


बिलासपुर। दीपावली पर्व के उल्लास के बीच शहर के धार्मिक स्थलों पर आस्था और परंपरा का रंग चढ़ने लगा है। इसी कड़ी में सिम्स चौक स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव की तैयारियां की जा रही हैं। देवस्थानम् श्री लक्ष्मी नारायण सेवा संघ की ओर से आगामी 10 नवंबर को मंदिर परिसर में गोवर्धन पूजा के साथ विशाल अन्नकूट भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर भगवान श्री लक्ष्मी नारायण को विशेष छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में अन्नकूट भंडारे की परंपरा करीब 150 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर की आस्था, सामाजिक सहभागिता और सेवा भावना से भी जुड़ा हुआ है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने और अन्नकूट का प्रसाद ग्रहण करने मंदिर पहुंचते हैं।
गोवर्धन पूजा से जुड़ी है भगवान श्रीकृष्ण की लीला..
गोवर्धन पूजा का पर्व भगवान श्रीकृष्ण की उस लीला की याद दिलाता है, जब उन्होंने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को प्रकृति, गौवंश और अन्न के महत्व का संदेश देते हुए गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की प्रेरणा दी थी। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा चली आ रही है।


इस पर्व पर श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। गोवर्धन पूजा भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक भी मानी जाती है।
अन्न के प्रति कृतज्ञता का पर्व है अन्नकूट..
अन्नकूट का शाब्दिक अर्थ है अन्न का पर्वत। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के व्यंजन तैयार कर भगवान को भोग अर्पित किया जाता है। मंदिर में आयोजित होने वाले अन्नकूट महोत्सव में विशेष छप्पन भोग भगवान को समर्पित किया जाएगा। इसके पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।
अन्नकूट पर्व का संदेश है कि अन्न जीवन का आधार है और इसकी प्राप्ति ईश्वर की कृपा के साथ-साथ प्रकृति एवं किसानों के परिश्रम से होती है। इसलिए अन्न के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना हमारी सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद को सामूहिक रूप से ग्रहण करना आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
150 वर्षों से कायम है सेवा और समर्पण की परंपरा..
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में पिछले डेढ़ सौ वर्षों से अन्नकूट भंडारे का आयोजन लगातार किया जा रहा है। समय के साथ इस धार्मिक परंपरा ने शहर के श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान बनाया है। मंदिर में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में भक्तजन पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं।
मंदिर प्रबंधन का कहना है कि धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और समाज में सेवा एवं समर्पण की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से इस आयोजन को निरंतर जारी रखा गया है। अन्नकूट भंडारे के माध्यम से भगवान के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ ही भक्तों के बीच प्रसाद वितरण की परंपरा निभाई जाती है।
सपरिवार शामिल होकर ग्रहण करें प्रसाद..
देवस्थानम् श्री लक्ष्मी नारायण सेवा संघ ने शहर एवं आसपास के सभी श्रद्धालुओं से गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट भंडारे में सपरिवार शामिल होने की अपील की है। संघ ने भक्तों से मंदिर पहुंचकर भगवान श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन करने, पूजा-अर्चना में सहभागी बनने और प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया है।

आयोजन स्थल: श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, सिम्स चौक, बिलासपुर
आयोजन: गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट भंडारा
दिनांक: 10 नवंबर 2026
विशेष आकर्षण: भगवान को छप्पन भोग अर्पण एवं श्रद्धालुओं के लिए विशाल प्रसाद वितरण
संपर्क: 9770223456, 9425549490







