पैंगोलिन के शल्क और तेंदुए की खाल से खुला वन्यजीव तस्करी का नेटवर्क, 6 आरोपी हिरासत में..

बीजापुर में वन विभाग की दो ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई, 9.260 किलो पैंगोलिन शल्क और तेंदुए की खाल बरामद..

गंगालूर से बासागुड़ा तक पहुंची जांच, पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर दूसरी दबिश..

बीजापुर। वन्यजीवों के शिकार और उनके अंगों की अवैध तस्करी पर लगाम लगाने के लिए वन विभाग ने बीजापुर जिले में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने दो अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर पैंगोलिन के 9.260 किलोग्राम शल्क और तेंदुए की एक खाल बरामद की है। इस कार्रवाई में कुल छह आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। वन विभाग की इस कार्रवाई को वन्यजीव तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

कार्रवाई के दौरान सामने आए तथ्यों ने वन्यजीवों के अवैध कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर पैंगोलिन जैसे दुर्लभ वन्यजीव के शल्क बरामद हुए, तो दूसरी ओर तेंदुए की खाल मिलने से वन्यजीवों के शिकार और उनके अंगों की तस्करी की आशंका भी सामने आई है। हालांकि, इस पूरे मामले में आरोपियों की भूमिका और तस्करी के नेटवर्क की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

गंगालूर में पहली कार्रवाई, पैंगोलिन के शल्क बरामद..

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, तस्करी के खिलाफ पहली कार्रवाई ग्राम रेड्डी, तहसील गंगालूर में की गई। यहां वन विभाग की टीम ने दबिश देकर पैंगोलिन के 9.260 किलोग्राम शल्क बरामद किए। इस मामले में चार आरोपियों को हिरासत में लिया गया।

पैंगोलिन के शल्क की इतनी मात्रा बरामद होना वन विभाग के लिए जांच का महत्वपूर्ण आधार बना है। टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद शल्क कहां से लाए गए थे और इन्हें किन लोगों तक पहुंचाने की तैयारी थी। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस अवैध कारोबार में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं।

पूछताछ में मिले सुराग, बासागुड़ा तक पहुंची टीम..

ग्राम रेड्डी में कार्रवाई के बाद वन विभाग की टीम ने आरोपियों से पूछताछ की। इस दौरान मिले सुरागों के आधार पर टीम ने ग्राम मल्लेपल्ली, बासागुड़ा क्षेत्र में दूसरी दबिश दी।

यहां से तेंदुए की एक खाल बरामद की गई। इस कार्रवाई में दो अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया गया। इस तरह दोनों स्थानों पर हुई कार्रवाई में कुल छह आरोपी वन विभाग की पकड़ में आए हैं।

एक ही कार्रवाई के दौरान पैंगोलिन के शल्क और तेंदुए की खाल की बरामदगी ने मामले को गंभीर बना दिया है। वन विभाग अब दोनों बरामदगी के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रहा है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वन्यजीवों का शिकार स्थानीय स्तर पर किया गया था या इनके अंग किसी बाहरी नेटवर्क के माध्यम से यहां तक पहुंचे थे।

अनुसूची-1 के वन्यजीव, शिकार और तस्करी पर सख्त कानून..

पैंगोलिन और तेंदुआ दोनों ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल हैं। इन वन्यजीवों को उच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इनके शिकार, अवैध व्यापार और अंगों की तस्करी में शामिल पाए जाने पर कानून के तहत कठोर कार्रवाई का प्रावधान है।

पैंगोलिन का शिकार उसके शल्कों के लिए किया जाता है, जबकि तेंदुए की खाल का अवैध कारोबार वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। ऐसे मामलों में केवल शिकार करने वालों की पहचान ही नहीं, बल्कि इनके अंगों की खरीद-फरोख्त करने वाले और तस्करी की पूरी श्रृंखला तक पहुंचना भी जरूरी माना जाता है।

नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की चुनौती..

वन विभाग ने आरोपियों के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। अब जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि बरामद वन्यजीव अंगों का स्रोत क्या है और इनके अवैध कारोबार में कितने लोग शामिल हैं।

रेड्डी से मल्लेपल्ली तक हुई कार्रवाई के बाद वन विभाग के सामने तस्करी के संभावित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की चुनौती है। यदि जांच में अन्य आरोपियों या तस्करी से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आती है, तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।

बीजापुर जैसे वन संपदा से समृद्ध जिले में वन्यजीवों का संरक्षण केवल जंगलों में गश्त तक सीमित नहीं है। वन्यजीवों के अंगों के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए शिकारियों से लेकर खरीदारों और तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है। वन विभाग की मौजूदा कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मामले में आरोपियों की भूमिका और वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है। आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।