अरपा में रेत का अवैध खेल: 66 एफआईआर, लेकिन बड़े मगरमच्छ पुलिस की पकड़ से बाहर ; ट्रैक्टर ड्राइवर को 3 साल की सजा, पर सिंडिकेट चलाने वाले सफेदपोशों पर आंच तक नही..

इन्वेस्टिगेशन : रेत माफिया के खिलाफ कलेक्टर के विशेष अभियान के 16 महीने बाद पहला फैसला, लेकिन जांच के घेरे में सिर्फ मजदूर और ड्राइवर..

बिलासपुर। जिले में अरपा नदी का सीना चीरकर हर दिन लाखों रुपये काली कमाई करने वाले रेत निकालने वाले माफिया अब भी आजाद हैं। विशेष न्यायालय ने 28 अक्टूबर 2026 को नगोई घाट से जुड़े 16 महीने पुराने एक मामले में ट्रैक्टर ड्राइवर को 3 साल के कठोर कारावास और 26 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

कार्रवाई 15 जून 2025 को कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर शुरू हुए उस चर्चित अभियान का हिस्सा है, जिसमें 9 थानों में 66 एफआईआर दर्ज की गई थीं। लेकिन तेज खबर की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि सजा पाने वाले सिर्फ दिहाड़ी मजदूर है। और जिन रसूखदारों माफियाओं और शहर के बड़े लोगों के लिए यह रेत ढोई जा रही थी, उनका नाम पुलिस की चार्जशीट और खनिज विभाग के दस्तावेजों से पूरी तरह गायब है।

सिर्फ 16 महीने में आया फैसला, पर जांच मोहरों तक सीमित..

खनिज शाखा और पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, जून 2025 को बेलगहना चौकी क्षेत्र के ग्राम नगोई घाट से ट्रैक्टर-ट्रॉली सीजी 10 बीई 7869 जब्त कर मौके से ड्राइवर कुंवर सिंह कंवर ग्राम सल्का को पकड़ा था।

विशेष न्यायाधीश के न्यायालय ने खान और खनिज अधिनियम ने मामले की सुनवाई करते हुए ipc की धारा 303(2) सहपठित धारा 3(5) के तहत 3 वर्ष की कैद व एक हजार का जुर्माना और खान एवं खनिज अधिनियम 1957 के तहत 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

बता दें कि विभाग इस कार्यवाही को अवैध खनन पर बड़ी चोट बता रहा है, लेकिन जब्ती पत्रक में वाहन मालिक और रेत के असल खरीदार का कोई जिक्र नहीं है। पूरी कार्रवाई सिर्फ उन मजदूरों पर पर हुई, जिन्हें मौके से पकड़ा गया।

रसूखदारों का सिंडिकेट, कार्रवाई का शिकार बने कर्मचारी..

शहर के कोटा, रतनपुर, सीपत, मोपका सरकण्डा, सिविल लाइन, मस्तूरी, पचपेड़ी, चकरभाठा और हिर्री इलाकों में रेत का पूरा नेटवर्क सफेदपोशों और बड़े ठेकेदारों के हाथ में है। पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 66 मामले तो दर्ज हुए, लेकिन गिरफ्तारियां सिर्फ ड्राइवरों, मुंशियों और मजदूरों की हुईं।

ज्ञात हो कि एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से रात भर में औसतन 15 से 20 ट्रिप रेत निकाली जाती है और पकड़े गए ड्राइवर कुंवर सिंह जैसे मजदूरों को हर ट्रिप के महज 300 रुपये ही मिलते हैं। असली मुनाफा शहर में बैठे कुछ नेता और रसूखदार कमा रहे हैं। मगर जांच एजेंसियों ने यह पता लगाने की कोशिश ही नहीं की। कि

बिना संरक्षण के 66 घाटों पर मशीनों से उत्खनन..

तेज खबर की पड़ताल में सामने आया है कि अभियान में जब्त किए गए ज्यादातर ट्रैक्टर-ट्रॉली या तो बेनामी हैं या उन पर फर्जी नंबर प्लेट लगी है। कई वाहनों के रजिस्ट्रेशन शहर के बड़े बिल्डरों और रसूखदारों के रिश्तेदारों के नाम पर हैं, लेकिन दबाव के चलते विभाग ने वाहन मालिकों को आरोपी नहीं बनाया।

9 थानों में दर्ज मुकदमों का स्टेटस..

कलेक्टर के निर्देश पर 9 अलग-अलग थानों में 66 एफआईआर दर्ज हुई थीं। 80 प्रतिशत मामलों में पुलिस ने ‘अज्ञात वाहन मालिक’ दिखाकर फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी है। सिर्फ मौके पर मिले लेबर और ड्राइवरों को ही कागजों में मुजरिम बनाया गया।

रोजाना 50 लाख का अवैध कारोबार..

सूत्रों के मुताबिक, अरपा नदी के घाटों से प्रतिदिन करीब 50 लाख रुपये की रेत बिना रॉयल्टी के निकाली जाती है। एक ड्राइवर को 26 हजार के जुर्माने और सजा से इस बड़े नेटवर्क की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला।

माफियाओं ने दूसरे मजदूरों को काम पर लगाया..

लगातार कार्यवाही के बाद माफियाओं के नेटवर्क पर कोई असर नहीं पड़ा है फिलहाल माफिया अपने खनन कार्यों में लगे हुए हैं जिन गरीब मजदूरों पर दंडात्मक कार्रवाई हुई है उनके घर पर भले ही चूल्हा ना चले लेकिन रसूखदार खनन माफियाओं ने दूसरे दिहाड़ी मजदूरों के माध्यम से खनन का कार्य पर लगा कर मलाई खाना शुरू कर दिया है।