17 साल पुरानी खटारा स्कूल बस बनी यमराज 6 की मौत, 3 साल से फिटनेस और आरसी थी फेल, फिर भी वसूली के दम पर सड़क पर दौड़ती रही..

मनेंद्रगढ़ बस हादसा, सिस्टम की लापरवाही से गई बेगुनाहों की जान, कोरिया आरटीओ अमित कश्यप पर गिरी गाज, विभाग में ट्रांसफर पोस्टिंग के खेल का बड़ा खुलासा..विवादों के घेरे में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली..

रायपुर। सरगुजा संभाग के मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के सेमरमथानी मोड़ पर 22 अक्टूबर 2026 को हुए भीषण बस हादसे ने परिवहन विभाग के भ्रष्टाचार और अवैध वसूली तंत्र की पूरी पोल खोल कर रख दी है। जिस 25 सीटर स्कूल बस को नियम के मुताबिक 15 साल पूरे होने पर कबाड़ हो जाना था, वह 17 साल 9 महीने बाद भी 50 सवारियां भरकर बेरोकटोक सड़क पर दौड़ रही थी। इस दर्दनाक दुर्घटना में 6 लोगों की जान चली गई और 40 से ज्यादा यात्री घायल हो गए। इस पूरे फर्जीवाड़े में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि बस का फिटनेस प्रमाण पत्र और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट 19 जून 2023 को ही खत्म हो चुका था, इसके बावजूद आरटीओ की मेहरबानी और चेकपोस्ट पर जारी अवैध वसूली के चलते यह कंडम गाड़ी यमराज बनकर लोगों की जान से खेल रही थी।

नियमों की उड़ी धज्जियां, स्कूल बस को बना दिया सवारी बस..

परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार बस क्रमांक सीजी 16 ए 1664 का रजिस्ट्रेशन 12 अगस्त 2009 को हुआ था। शुरुआत में इसका इस्तेमाल स्कूली बच्चों को लाने ले जाने के लिए किया जाता था। बस की सीटिंग कैपेसिटी महज 25 सीटों की थी। नियम के तहत 15 साल बाद कमर्शियल वाहनों को कंडम मान लिया जाता है, लेकिन 17 साल से ज्यादा पुरानी इस स्कूल बस को सवारी बस के रूप में उतार दिया गया। एसपी रत्ना सिंह के शुरुआती बयानों से भी यह साफ हो गया है कि 25 सीटर बस में 46 से 50 यात्रियों को ठूंस ठूंस कर भरा गया था। बिना वैध आरसी और फिटनेस के इस खटारा बस का बेरोकटोक चेकपोस्ट पार करना यह साबित करता है कि इलाके में जांच के नाम पर सिर्फ अवैध वसूली का खेल चल रहा था।

भ्रष्टाचार का नेक्सस, फाइव स्टार होटल से चल रही थी वसूली..

हादसे के बाद परिवहन विभाग की जो सुस्त और भ्रष्ट कार्यप्रणाली सामने आई है, उसके तार राजधानी तक फैले हुए हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो पिछले दो साल से परिवहन विभाग सिर्फ अवैध वसूली का अड्डा बन चुका है। आरटीओ की ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए करोड़ों रुपयों का लेन देन होने की बात सामने आ रही है। खुलासा हुआ है कि मंत्री के ओएसडी प्रदीप वैध बाकायदा एक फाइव स्टार होटल में बैठकर परिवहन अधिकारियों से वसूली कर रहे थे। जब यह मामला शासन स्तर तक पहुंचा तो उन्हें ओएसडी पद से हटा दिया गया। उनकी जगह शैलाभ साहू को लाया गया, लेकिन उनके भी इसी तरह की गतिविधियों में शामिल होने पर उन्हें भी पद से हटाना पड़ा। यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि जब ऊपर से लेकर नीचे तक सिस्टम वसूली में लगा हो, तो सड़कों पर अनफिट गाड़ियां दौड़ना कोई हैरानी की बात नहीं है।

दिखावटी कार्रवाई, आरटीओ कोरिया को किया अटैच..

हादसे में 6 मौतों के बाद जब फर्जीवाड़े और सिस्टम की लापरवाही की परतें खुलने लगीं, तो राज्य सरकार ने डैमेज कंट्रोल करते हुए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कोरिया अमित प्रकाश कश्यप को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। आगामी आदेश तक उन्हें नवा रायपुर स्थित परिवहन आयुक्त कार्यालय में अटैच कर दिया गया है। स्थानीय लोगों में इस कार्रवाई को लेकर भारी नाराजगी है आरोप है कि परिवहन विभाग केवल बड़े हादसों के बाद ही जागता है और चंद दिनों बाद स्थिति फिर से जस की तस हो जाती है।

कागजों में बस का पूरा कच्चा चिट्ठा..

इस बस का प्रदूषण प्रमाण पत्र भी 31 मई 2026 से फेल था। यह गाड़ी सिर्फ 15 मार्च 2027 तक एक्टिव इंश्योरेंस के सहारे परिवहन विभाग की आंखों में धूल झोंक कर सड़कों पर दौड़ रही थी। तीन साल से न तो गाड़ी का फिटनेस टेस्ट हुआ था और न ही रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण कराया गया था।

ब्लैक स्पॉट और जर्जर सड़कों की अनदेखी..

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सेमरमथानी घाट और मोड़ पहले से ही डेंजर जोन के रूप में जाने जाते हैं। यहां कई बार चेतावनी देने के बावजूद सड़क निर्माण एजेंसियों और परिवहन विभाग ने सुरक्षा संकेतक लगाने और सड़क सुधारने की जहमत नहीं उठाई। खराब बुनियादी ढांचे और ओवरलोडेड खटारा गाड़ियों के गठजोड़ ने इस बड़े हादसे को जन्म दिया।