शिव मेडिसिटी में महिला की मौत, इंजेक्शन की खुराक पर संदेह.. देखें वीडियो..

परिजनों का आरोप – इंजेक्शन लगाने के बाद बिगड़ी हालत, मेडिसिन चार्ट नहीं दिखाने का भी दावा ; डॉक्टरों की डिग्री और इलाज की प्रक्रिया की जांच की मांग..

बिलासपुर। शहर के मोपका स्थित शिव मेडिसिटी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद अस्पताल की उपचार प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। मृतका के परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए इंजेक्शन की खुराक, दवाओं के रिकॉर्ड और संबंधित डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता की जांच कराने की मांग की है। परिजनों का दावा है कि इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की हालत अचानक बिगड़ गई और 23 अक्टूबर की सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हालांकि, इंजेक्शन की खुराक और मौत के बीच संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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परिजनों के मुताबिक, मृतका आनंदित भट्टाचार्य त्रिपुरा से नवरात्रि के दौरान घूमने के लिए बिलासपुर आई थीं। वह पेट के हिस्से में कैंसर और पीलिया से पीड़ित थीं। तबीयत बिगड़ने पर 22 अक्टूबर की शाम उनकी बहन और भतीजे ने उन्हें मोपका स्थित शिव मेडिसिटी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। परिजनों का कहना है कि भर्ती के समय महिला बातचीत कर रही थीं और उन्हें उम्मीद थी कि उपचार से उनकी स्थिति में सुधार होगा।

इंजेक्शन के बाद हालत बिगड़ने का दावा..

मृतका के भतीजे ने आरोप लगाया कि रात करीब आठ बजे के बाद महिला की तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें इंजेक्शन लगाया। इसके बाद उनकी सांसें तेज चलने लगीं और हालत लगातार खराब होती चली गई। परिजनों का दावा है कि करीब दो घंटे के अंतराल में दो बार इंजेक्शन लगाया गया था।

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परिजनों ने आरोप लगाया कि एक एमएल की जगह 10 एमएल की खुराक दिए जाने के बाद महिला की हालत गंभीर हो गई। उनके मुताबिक, इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला के शरीर ने काम करना बंद कर दिया और स्थिति संभल नहीं सकी। हालांकि, इंजेक्शन का नाम, निर्धारित खुराक, वास्तव में दी गई मात्रा और उसके संभावित दुष्प्रभावों की पुष्टि मेडिकल रिकॉर्ड तथा विशेषज्ञों की जांच से ही हो सकती है। फिलहाल परिजनों के आरोपों के आधार पर ही इस संबंध में सवाल उठाए जा रहे हैं।

मेडिसिन चार्ट और इलाज के रिकॉर्ड को लेकर सवाल..

परिजनों का कहना है कि महिला की हालत बिगड़ने के बाद उन्होंने डॉक्टरों से लगाए गए इंजेक्शन और दी जा रही दवाओं के बारे में जानकारी मांगी थी। उन्होंने मेडिसिन चार्ट दिखाने की भी मांग की, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक, उन्हें चार्ट नहीं दिखाया गया। परिजनों ने यह भी दावा किया कि रात के समय आईसीयू में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।

इन आरोपों के बाद अस्पताल में उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया, मरीज की निगरानी, दवाओं के इस्तेमाल और आपात स्थिति में उपलब्ध चिकित्सकीय सहायता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, आईसीयू में डॉक्टर की अनुपस्थिति और मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने के आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

मरीज को भर्ती किए जाने से लेकर उनकी हालत बिगड़ने और मृत्यु तक के घटनाक्रम की समयवार जांच महत्वपूर्ण होगी। इसमें भर्ती के समय की स्थिति, चिकित्सकीय परीक्षण, लिखी गई दवाएं, इंजेक्शन की निर्धारित मात्रा, दवा देने का समय, मरीज की निगरानी और हालत बिगड़ने के बाद किए गए उपचार का विवरण शामिल किया जाना चाहिए।

डॉक्टरों की डिग्री की जांच कराने की मांग..

मृतका के परिजनों ने डॉ. गिरधारी और डॉ. लोकेश गुप्ता पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने दोनों डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल डिग्री और संबंधित चिकित्सकीय पंजीयन की जांच कराने की मांग की है।

परिजनों का कहना है कि महिला की मौत के कारणों और इलाज के दौरान हुई संभावित चूक का पता लगाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी मांग की है कि अस्पताल में मरीज के उपचार से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जांच के दौरान यह स्पष्ट हो सके कि किस समय कौन-सी दवा दी गई और उस समय मरीज की चिकित्सकीय स्थिति क्या थी।

हालांकि, किसी डॉक्टर की डिग्री या योग्यता को लेकर लगाए गए आरोप अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं हैं। इसकी पुष्टि संबंधित चिकित्सा परिषद के रिकॉर्ड और सक्षम प्राधिकारी की जांच से ही हो सकती है।

अस्पताल संचालक पर बदसलूकी और धमकी देने का आरोप..

मामले में परिजनों ने अस्पताल के संचालक डॉ. संजय सिंह पर भी बदसलूकी करने और धमकी देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वे महिला को दी गई दवाओं और इंजेक्शन से जुड़ी जानकारी चाहते थे, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। परिजनों के मुताबिक, अस्पताल प्रबंधन के रवैये से उनकी परेशानी और बढ़ गई।

इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का बयान सामने आने और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही इस संबंध में स्पष्ट स्थिति बन सकेगी।

23 अक्टूबर की सुबह हुई मौत, निष्पक्ष जांच की मांग..

परिजनों के अनुसार, महिला की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका और 23 अक्टूबर की सुबह करीब सात बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में उपचार की प्रक्रिया, इंजेक्शन की खुराक, दवाओं के रिकॉर्ड और संबंधित डॉक्टरों की योग्यता की जांच कराने की मांग उठाई है।

परिजनों ने इस मामले में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) से शिकायत करने की बात कही है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि महिला की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके और यदि उपचार में कोई लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष नहीं मिल सका..

मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक अस्पताल की ओर से कोई जिम्मेदार व्यक्ति अपना पक्ष रखने के लिए सामने नहीं आया। ऐसे में इंजेक्शन की खुराक, उपचार प्रक्रिया, मेडिकल चार्ट और परिजनों के अन्य आरोपों पर अस्पताल का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।

अब जांच से स्पष्ट होंगे अहम सवाल: महिला की मौत का वास्तविक कारण क्या था? क्या इंजेक्शन निर्धारित मात्रा में दिया गया था? उपचार के दौरान सभी जरूरी चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं? मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों की योग्यता से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है? इन सवालों का जवाब चिकित्सकीय दस्तावेजों, विशेषज्ञों की राय और सक्षम प्राधिकारी की निष्पक्ष जांच से ही मिल सकेगा। फिलहाल मामले में परिजनों के आरोप सामने आए हैं, जिन्हें जांच के बिना प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।