सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बाद बदला ट्रेंड : घर से नाराज होकर निकले और लौट आए, 618 में से केवल 48% मामलों में ही एफआईआर कर सकी पुलिस..

गुमशुदगी में नई व्यवस्था – बिना बताए जाने वालों की तलाश और दस्तयाबी से पुलिस का कागजी काम बढ़ा..

बिलासपुर। बिलासपुर जिले में गुमशुदगी के मामलों में एक नया ट्रेंड सामने आया है। मामूली घरेलू विवाद के बाद नाराज होकर घर छोड़ने वाले लोग 24 से 48 घंटे के भीतर खुद ही वापस लौट रहे हैं। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन के चलते पुलिस के लिए हर मामला एक बड़ी कागजी चुनौती बन गया है। अब गुमशुदगी की सूचना मिलते ही थानों को तत्काल वैधानिक कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करनी पड़ रही है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इस साल मई से लेकर अब तक जिले में गुमशुदगी के कुल 618 मामले सामने आए हैं। इनमें से 329 मामलों (लगभग 48-50%) में पुलिस ने सीधे एफआईआर दर्ज की है। वहीं, पुलिस की अलग-अलग टीमों ने अब तक 353 लोगों को ढूंढने में कामयाबी हासिल की है। नई व्यवस्था का सीधा असर यह है कि लापता व्यक्ति के खुद घर लौट आने के बाद भी पुलिस का काम खत्म नहीं होता; उसे थाने में व्यक्ति की दस्तयाबी (वापसी) दर्ज करने और अदालत के लिए केस खत्म करने की पूरी कागजी प्रक्रिया निभानी पड़ रही है।

पहले सिर्फ ‘गुम इंसान’ की डायरी में होती थी एंट्री, अब तुरंत कानूनी कार्रवाई..

गुमशुदगी के मामलों में थानों की कार्यप्रणाली में यह एक बड़ा बदलाव है। पहले किसी वयस्क व्यक्ति के लापता होने पर पुलिस थाने में सिर्फ ‘गुम इंसान’ की सामान्य डायरी (रोजनामचा) दर्ज करती थी और उसी आधार पर तलाश शुरू कर दी जाती थी। केवल नाबालिगों के मामले में तुरंत अपहरण की एफआईआर दर्ज करने का नियम था। लेकिन, अब निर्देशों के बाद पूरी प्रक्रिया बदल गई है। किसी भी उम्र के व्यक्ति के गायब होने की सूचना पर पुलिस को बिना देरी किए एफआईआर दर्ज करनी पड़ रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि व्यक्ति के सुरक्षित वापस आने के बाद केस डायरी को बंद करने की प्रक्रिया काफी लंबी है। थाने में दस्तयाबी दर्ज करने के साथ ही पूरे मामले का निपटारा करने में पुलिस का काफी समय और संसाधन खर्च हो रहा है।

सीडीआर (CDR) और मोबाइल लोकेशन से तलाश, सरकंडा और सिविल लाइन में सर्वाधिक मामले..

जिले के शहरी थानों में गुमशुदगी के मामले सबसे ज्यादा आ रहे हैं। इनमें सरकंडा और सिविल लाइन थाना क्षेत्र सबसे आगे हैं। सरकंडा इलाके में बड़ी संख्या में हॉस्टल, कोचिंग संस्थान और घनी आबादी होने के कारण युवा वर्ग के बिना बताए घर छोड़ने के मामले लगातार दर्ज हो रहे हैं। सरकंडा थाने में मई से अब तक 82 लोगों के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। इनमें से 70 लोग घर लौट चुके हैं, जबकि 12 की तलाश पुलिस अभी भी कर रही है। जो लोग वापस लौटे हैं, उनमें से ज्यादातर या तो 24 से 48 घंटे में खुद घर आ गए या फिर पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और मोबाइल टावर लोकेशन की मदद से उन्हें ट्रेस कर लिया। दूसरी ओर, सिविल लाइन थाना क्षेत्र में कामकाजी लोगों और पारिवारिक विवाद के चलते घर छोड़ने वालों के मामले ज्यादा सामने आए हैं। पुलिस आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 60 प्रतिशत लापता लोगों को तकनीकी मदद से ढूंढ लिया गया है।

एक्सपर्ट व्यू : जांच में देरी और पुलिस की ढिलाई रोकना है मकसद..

सुप्रीम कोर्ट की इस नई व्यवस्था के पीछे का कानूनी पहलू समझाते हुए अधिवक्ता रोहित शर्मा बताते हैं, किसी भी नागरिक के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने पर शुरुआती घंटों में जांच में ढिलाई रोकना बहुत जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का मुख्य मकसद यही है। तत्काल एफआईआर दर्ज होने से थानों पर दबाव बढ़ता है। उन्हें तुरंत लापता व्यक्ति की लोकेशन ट्रेस करनी पड़ती है और सर्विलांस की मदद लेनी पड़ती है। इससे किसी बड़ी अनहोनी की आशंका समय रहते कम हो जाती है।

हम हर मामले की कर रहे हैं गंभीर जांच..

इस नए ट्रेंड और बढ़ते कागजी काम पर एएसपी सिटी (बिलासपुर) पंकज पटेल का कहना है कि पुलिस किसी भी केस को हल्के में नहीं ले रही है। उन्होंने स्पष्ट किया,गुमशुदगी की सूचना मिलने पर थानों में तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। यह सच है कि कई मामलों में लोग पारिवारिक कलह से नाराज होकर निकलते हैं और एक-दो दिन में खुद लौट आते हैं, लेकिन पुलिस हर मामले को पूरी गंभीरता से लेती है और तकनीकी जांच के जरिए उनकी तलाश सुनिश्चित करती है।

आने वाले समय में क्या : गुमशुदगी के इन बढ़ते मामलों और भारी कागजी काम को देखते हुए पुलिस विभाग अब थानों में ऐसे मामलों की निगरानी के लिए अलग व्यवस्था बनाने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा, सरकंडा जैसे इलाकों में पुलिस कोचिंग संस्थानों और हॉस्टल संचालकों को भी निर्देश जारी कर रही है कि वे छात्रों के बाहर जाने और लौटने का पूरा रिकॉर्ड अपने रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज करें।