
साइबर क्राइम / लेयर-1 म्यूल खाता सिंडिकेट का भंडाफोड़..

बिलासपुर। पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर साइबर ठगों को बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) उपलब्ध कराने वाले एक बड़े नेटवर्क का बिलासपुर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। तारबहार पुलिस और एसीसीयू (ACCU) की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तोरवा क्षेत्र के हेमु नगर (तहसीलदार गली) निवासी 33 वर्षीय विश्वजीत ढाली (पिता विनय कुमार) को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कमीशन के लालच में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का अपना खाता (नंबर- 75669566069) साइबर ठगों के हवाले कर रखा था। इस खाते में देशभर के पीड़ितों से ठगी की लाखों रुपये की रकम जमा कराई गई और फिर उसे तुरंत यूपीआई और एटीएम के जरिए निकाल लिया गया।
जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस संदिग्ध बैंक खाते के खिलाफ लगातार शिकायतें दर्ज हो रही थीं। पुलिस मुख्यालय रायपुर ने लेयर-1 म्यूल खातों की जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। वरिष्ठ अधिकारियों के रडार पर आते ही तारबहार थाने में अपराध क्रमांक 364/2026 के तहत बीएनएस की धारा 61(2), 317(5), 318(4), 323 और 317(4) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।
बैंक स्टेटमेंट ने खोली पोल, फ्रॉड का बन गया था कलेक्शन पॉइंट
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विवेचना के दौरान जब आईडीएफसी बैंक के इस खाते का स्टेटमेंट निकाला गया, तो उसमें कई राज्यों से पैसे जमा होने के रिकॉर्ड मिले। साइबर ठगों ने इसे पूरी तरह से अपना ‘कलेक्शन अकाउंट’ बना लिया था। खाते में जैसे ही फ्रॉड का पैसा आता था, उसे तुरंत यूपीआई (UPI) के माध्यम से दूसरे खातों में डायवर्ट कर दिया जाता था या फिर एटीएम से कैश के रूप में निकाल लिया जाता था। स्टेटमेंट में सामान्य लेनदेन के बजाय सिर्फ ठगी की रकम के ट्रांजैक्शन ही ज्यादा नजर आए।
क्या है ‘लेयर-1 म्यूल अकाउंट’ और कैसे होता है खेल?
साइबर ठग कभी भी सीधे अपने खातों में पैसा नहीं मंगाते हैं। पकड़े जाने के डर से वे विश्वजीत जैसे लोगों को खोजते हैं और चंद रुपयों या कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं। इन्हें ही ‘लेयर-1 म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। शिकार हुए व्यक्ति का पैसा सबसे पहले इन्हीं खातों में आता है। इसके बाद इस पैसे को कई और खातों (लेयर-2 और लेयर-3) में घुमाया जाता है। पुलिस की जांच में यह साफ हुआ है कि आरोपी विश्वजीत इसी चेन का एक अहम मोहरा था, जो ठगों के लिए एक सुरक्षित चैनल का काम कर रहा था।
जांच में सामने आए अहम खुलासे..
पासबुक, एटीएम और सिम कार्ड भी ठगों के पास :
आमतौर पर म्यूल खाताधारक अपना पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल सिम तक मुख्य ठगों को पार्सल कर देते हैं। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि आरोपी ने अपना खाता ठगों तक कैसे पहुंचाया और इसके एवज में उसे हर महीने या प्रति ट्रांजैक्शन कितना कट मिल रहा था।
पोर्टल पर शिकायतों का लगा था अंबार :
केंद्रीय साइबर पोर्टल पर इस विशेष खाते (75669566069) को लेकर एक-दो नहीं, बल्कि कई शिकायतें पेंडिंग थीं। अलग-अलग राज्यों से एक ही खाते पर बार-बार फ्रॉड का पैसा जाने का अलर्ट जनरेट होने के बाद ही बिलासपुर पुलिस हरकत में आई।
कई और चेहरे हो सकते हैं बेनकाब :
पुलिस सूत्रों का कहना है कि शहर में ऐसे कई और युवा हो सकते हैं जिन्होंने लालच में अपने खाते किराये पर दे रखे हैं। एसीसीयू की टीम शहर के अन्य संदिग्ध खातों का डेटा भी खंगाल रही है।
आगे की जांच और कार्रवाई..
तारबहार पुलिस ने आरोपी विश्वजीत ढाली को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश कर दिया है। पुलिस अब उन यूपीआई आईडी और खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें विश्वजीत के खाते से पैसा ट्रांसफर किया गया था। माना जा रहा है कि इस मामले में आगे ठगी के मुख्य सरगना और कुछ अन्य खाताधारकों की भी जल्द गिरफ्तारी हो सकती है।







